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माता-पिता के मर जाने के बाद औलाद को चाहिए कि वह उनके जनाज़े की तजहीज़, गुस्ल व कफ़न व नमाज़ व तद्फीन को सुनन व मुतहेब्बात की रिआयत के साथ अदा करें, उनके लिए हमेशा दुआ व इस्तिग्फार करते रहें, सदका व खैरात व नेक काम का सवाब उन्हें हमेशा पहुंचाते रहें, अपनी नमाज़ और रोजों के साथ उनके लिए भी नमाज़ पढ़ें और उनके लिए भी रोज़े रखें, माता-पिता पर कोई उधार हो तो उसे जल्दी अदा करें, उनपर कोई फर्ज़ रह गया हो तो अपनी कुदरत के अनुसार उसे पूरा करें जैसे उनकी तरफ से हज्जे बदल कराना आदि, अगर माँ बाप ने कोई जायज और शरई वसीयत की हो तो उसके निफाज़ की पूरी कोशिश करना, उनकी कसम पुरी करना, हर जुमे को उनके कब्र की ज़्यारत के लिए जाना, वहाँ यासीन शरीफ की तिलावत करना और उसका सवाब उनकी रूह को पहुंचाना, माँ बाप के रिश्तेदारों, दोस्तों के साथ उमर भर नेक सुलूक करना और उनका सम्मान करना, और इसी तरह कोई गुनाह करके उन्हें कब्र में तकलीफ ना पहुंचाना आदिl