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Hindi Section (22 Aug 2016 NewAgeIslam.Com)



Compassionate Islam and Ma Malakat Aymanukum दया और सहानुभूति का धर्म इस्लाम और “मा मलकत अय्मानुकुम” का अर्थ



टी. ओ. शनावास, न्यु एज इस्लाम

8 अगस्त 2016

(अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद: वर्षा शर्मा, न्यु एज इस्लाम)

“मा मलकत अय्मानुकुम”, यह वाक्य सूरह अल-मआरिज की आयत 30 और 31 में है और इन जैसी दूसरी आयतों का अनुवाद (तर्जुमा) इस तरह किया जाता है: “जो अपने गुप्तांग (शर्मगाह) के प्रति सतर्कता बरतते रहते हैं और उसकी हिफाज़त करते हैं सिवाए अपनी बीवियों और गुलामों के जो उनकी मिल्क में हैं तो इस बात पर उनकी कोई भर्त्सना नही। किन्तु जिस किसी ने इसके अतिरिक्त कुछ और चाहा तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करनेवाले है।"  

 

पारम्परिक व्याख्या के अनुसार इनके पास जाने से इन पर कोई मलामत नही। अक्सर पारम्परिक इस्लामी विद्वानों के अनुसार “मा मलकत अय्मानुकुम” से मुराद बांदियाँ और दासियाँ (यानि ग़ुलाम लौंडियाँ) हैं।

 

क़ुरान के अक्सर टिप्पणीकारों ने “मा मलकत अय्मानुकुम” से मुराद बांदियों को ही माना है और उनके अनुसार उनके साथ यौन संबंध बनाना जायज़ है। लेकिन इस रूढ़िवादी विचारधारा के विषय में मुहम्मद असद का मानना यह है कि निकाह अथवा शादी के बगैर किसी बांदी या गुलाम से सम्भोग करना जायज़ या मान्य नही। इसलिए असद “मा मलकत अय्मानुकुम” का अनुवाद इस प्रकार करते हैं: “सिवाए उन बांदियों के जो (वैवाहिक रिश्ते के माध्यम से) उनकी मिलकियत (न्यायपूर्वक अधिकार) में हैं”।

 

इस बारे में मैं मुहम्मद असद की अधिकतर बातों से सहमत हूँ लेकिन बांदी अथवा गुलाम के साथ यौन संबंध स्थापित करने को लेकर सभी पारम्परिक मुस्लिम उलेमा के फतवे को विश्व के सारे मुस्लिम समाज में स्वीकार किये जाने की बात से सहमत नही हूँ।

 

“मा मलकत अय्मानुकुम” के सही अर्थ और हज़रत मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम के जीवन के दौरान शादी की प्रथाओं, उसके तौर-तरीकों और उसके इतिहास का अध्यन करने बाद पता चलता है कि इस्लाम रहमत और हमदर्दी का धर्म है।

 

“मा मलकत अय्मानुकुम” से तात्पर्य वो औरतें हैं जो अस्थाई रूप से (यानि थोड़े समय की शादी) के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) में होती थीं, लेकिन पारम्परिक निकाह वाली औरतों के समान नही होती थीं। इस तरह के विवाह का चलन इस्लामी दौर के पूर्व से लेकर पैग़म्बर मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम के जीवनकाल तक हुआ करता था। अस्थाई निकाह (थोड़े समय की शादी) को खैबर युद्ध के दौरान मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम ने वर्जित (सख्त मना) कर दिया। जैसा कि हज़रत उमर इब्न-ए-खत्ताब ने इस हदीस में कहा है कि:

“खैबर के युद्ध के समय अल्लाह के दूत मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम ने “मुताअ” अथवा अस्थाई निकाह (थोड़े समय की शादी) को वर्जित (सख्त मना) कर दिया था और कहा था के वो आदमी गधे के मॉस खाने के समान होगा जो यह शादी करेगा”।

 

अब्द नदरा से रिवायत है कि जब मै जाबिर के पास बैठा हुआ था तब एक व्यक्ति मेरे पास आया और उसने कहा: “दो मुता (हज-ए-तम्त्तो और औरतों के साथ अस्थाई विवाह) के संबध में इब्न अब्बास और इब्न जुबैर के विचारों में मतभेद है। उस पर जाबिर ने कहा कि हम अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम के जीवनकाल से ये कर रहे हैं। इसके बाद उमर ने हमें ऐसा करने से मना किया और जब से हमने इसका सहारा कभी नही लिया”।

 

सच्चे मोमीनों की खासियत कुरान के साथ-साथ हदीसों में भी सूचीबद्ध है जो क़ुरान के मुताबिक है। इस से पता चलता है कि पारम्परिक इस्लामी विद्वानों (उलेमा) और उनके फैसलों ने “मा मलकत अय्मानुकुम” के मफ्हुम को बदनाम किया है:

 

1। शादी अथवा निकाह के बाहर शुद्धता (पाकी) तथा संयम को प्रदर्शित किया गया है।

2। शादी अथवा निकाह के बिना यौन संबंध स्थापित करना गुनाह है

3। कोई बुरा व्यक्ति मोमीन नही हो सकता।

4। एक साथ कोई व्यभिचारी और मोमीन नही हो सकता।   

5। दासी तथा गुलाम की परवरिश इसी तरह करो जैसे अपने बच्चों की करते हो।

6। लौंडी और गुलामों के साथ बदकारी करने या बांदी बनाने के बजाये उनसे निकाह कर लो।

7। महर देने की क्षमता (हैसियात) न हो तो कुंवारे ही रहो।

8। मोमीन जीस्म फरोशी को न तो मंजूरी दे सकता है और न ही इस पर अमल कर सकता है।

 

1 संयम और पाक्बाज़ी ही मोमीन पुरुष व् महिला की विशेषता है

“निसंदेह मुसलमान मर्द और औरतें और मोमीन मर्द और औरतें तथा आज्ञाकारी मर्द और औरतें और ईमानदार मर्द और औरतें, धैर्य वाले मर्द तथा औरतें, विनम्रता वाले पुरुष तथा औरतें, सद्क्ह (दान) वाले मर्द तथा औरतें, सब्र वाले मर्द तथा औरतें, रोज़ेदार मर्द तथा औरतें, अपनी शर्मगाहों की रक्षा करने वाले पुरुष और औरतें, और अक्सर अल्लाह को याद करने करने वाले पुरुष और औरतें,  अल्लाह ने इन सब के लिए माफी (क्षमा) और बहुत इनाम तैयार कर रखा है "(33:35)

 

2 शादी अथवा निकाह के बिना सम्भोग करना गुनाह है (कुरान 17:32)

“और तुम अवैध सम्भोग (बद्कारी) के पास भी मत जाना, बेशक यह बेहयाई का काम है और बहुत ही बुरी राह है (यानी जो कोई भी अपनी सीमाओं को पार कर इस पाप और बुरे रस्ते को अपनाता है तो वह इंसान अपने आप को नरक में ले जाता है यहाँ तक की अल्लाह भी इसे माफ नही करेंगे”।

 

(कुरान 24: 2-3): व्यभिचारिणी और व्यभिचारी (अविवाहित बद्कार औरत और अविवाहित बद्कार मर्द)- इन दोनों में से प्रत्येक को सौ कोड़े मारो और अल्लाह के धर्म (क़ानून) के विषय में तुम्हें उनपर तरस न आए, यदि तुम अल्लाह औऱ अन्तिम दिन को मानते हो। और उन्हें दंड देते समय मोमिनों में से कुछ लोगों को उपस्थित रहना चाहिए (2) व्यभिचारी किसी व्यभिचारिणी या मुशरिक (बहुदेववादी) स्त्री से ही निकाह करता है। और (इसी प्रकार) व्यभिचारिणी, किसी व्यभिचारी या बहुदेववादी से ही निकाह करते है। और ये (जिना) मुसलमानों पर हराम कर दिया गया है।

 

बुखारी (2475) और मुस्लिम (57) ने रिवायत की है: " पैगम्बर मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया:" कोई भी व्यभिचारी मुसलमान नही होता है जब वो जिना करता है।” 

  3 मोमीन बन्दे कभी व्यभिचारी नही हो सकते

“बदकार मर्द सिवाए बदकार औरत या मुशरिक औरत के (किसी पवित्र औरत) से निकाह नही करता और बदकार औरत से भी सिवाए बदकार मर्द या मुशरिक के कोई (पाक शख्स) निकाह नही करता और ये (ज़िना) मुसलमानों पर हराम कर दिया गया है”। "(3 -2: 24۔

4 मोमीन व्यक्ति कभी भी व्यभिचारी नही हो सकता (कुरान 4 -83: 1)

“बर्बादी है नापतौल में कमी करने वाले लोगों के लिए ये लोग जब दुसरे लोगों से नाप लेते है (उनसे) पूरा लेते हैं, और जब उन्हें (खुद) नाप कर या तौल कर देते हैं तो घटा कर देते हैं, क्या यह लोग यकीन नहीं रखते कि वह (मरने के बाद फिर से) उठाए जाएंगे" (पुस्तक # 2,हदीस # 12)

"तुममें से कोई भी [सही मायने में] तब तक मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए वह पसंद न करे जो अपने लिए चाहता है।" पैगम्बर मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम ने कहा, “तुम में से कोई भी मोमीन नही हो सकता है जब तक कि वह अपने भाइयों के लिए वह पसंद न करे जो खुद अपने लिए चाहता है”

 

लिहाज़ा ऐसा नही हो सकता कि कोई भी मोमीन या मोमिना अपने शौहर या बीवी या बच्चों के लिए जो चाहे उसका विपरीत अन्य परिवार वालों के लिए चाहे।

 

5 गुलाम मर्द या औरत के साथ मोमीन का व्यवहार (सुलूक) (बुखारी किताब 46हदीस 720)

“अबू मूसा रिवायत करते हैं कि अल्लाह के पैगम्बर मुहम्मद सल्लालाहू अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जिसके पास कोई बांदी (गुलाम) हो और उसके साथ अच्छा व्यवहार (सुलूक) करे और फिर इसे मुक्त (आज़ाद) करे और फिर उसकी शादी कर दे तो उसे इसका दोगुना ईनाम (अजर) मिलेगा " ।

6 गुलामों के साथ शादीशुदा संबंध कायम करो न कि रखैल के साथ

“और तुम अपने मर्दों और औरतों में से उनका निकाह कर दिया करो जो गुलाम मर्दों या गुलाम औरतों में से नेक हों” (24:32)

7। अगर माली साधन न हो तो मोमीनों को ब्रह्मचारी (अविवाहित) रहना चाहिए तथा गुलामों को सम्भोग के लिए विवश नही करना चाहिए (कुरान 24:33)

 

“और जो लोग निकाह करने का साधन नहीं रखते उनको चाहिए कि पाक दामिनी एख्तियार करें यहाँ तक कि ख़ुदा उनको अपने फज़ल व करम से मालदार बना दे और तुम्हारी लौन्डी ग़ुलामों में से जो मकातबत होने (कुछ रुपए की शर्त पर आज़ादी लेने) की ख्वाहिश करें तो तुम अगर उनमें कुछ सलाहियत देखो तो उनको मकातिब कर दो और ख़ुदा के माल से जो उसने तुम्हें अता किया है उनका भी दो और तुम्हारी लौन्डियाँ जो पाक दामन ही रहना चाहती हैं उनको दुनियावी ज़िन्दगी के फायदे हासिल करने की ग़रज़ से हराम कारी पर मजबूर न करो और जो शख्स उनको मजबूर करेगा तो इसमें शक नहीं कि ख़ुदा उसकी बेबसी के बाद बड़ा बख्शने वाले मेहरबान है” ।

 

8 मोमीन जिस्म-फरोशी नही कर सकता

“और तुम अपनी बांदियों को वेश्यावृत्ति (सांसारिक जीवन का लाभ प्राप्त करने के लिए) बदकारी पर मजबूर न करो, लेकिन जब वह पाक दामन हों और (निकाह में) रहना चाहती हों और जो व्यक्ति उन्हें वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करेगा तो अल्लाह इनके मजबूर हो जाने के बाद भी बड़ा क्षमाशील (बख्शने वाला) और दयावान (मेहरबान) है” (कुरान 24:33)

 

Dr. T.O. Shanavas is a native of Kerala, India, but is now based in the USA. He is an MD. He is the author of “Islamic Theory of evolution of Evolution the Missing Link between Darwin and The Origin of Species.” Co-author of the book, And God Said, "Let There Be Evolution!": Reconciling The Book Of Genesis, The Qur'an, And The Theory Of Evolution. Edited by Prof. Charles M. Wynn and Prof. Arthur W. Wiggins.


URL for English Article: http://www.newageislam.com/islamic-ideology/to-shanavas,-new-age-islam/compassionate-islam-and-ma-malakat-aymanukum-(right-hand-holds)/d/108217

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/to-shanavas/compassionate-islam-and-ma-malakat-aymanukum-दया-और-सहानुभूति-का-धर्म-इस्लाम-और-“मा-मलकत-अय्मानुकुम”-का-अर्थ/d/108322





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