नास्तिक दुर्रानी, न्यु एज इस्लाम
4 जून, 2013
मालूम होता है कि तीसरी शताब्दी का आगमन मुसलमानों को दुनिया के सामने शर्मिंदा करने का एक अच्छा मौका था। इस साल कम से कम कोई हज़ार के क़रीब किताबें, पत्रिकाएं और शोध पत्र प्रकाशित हुए जिनमें पिछली शताब्दी में इंसानों की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख था। जिनमें अविष्कार, रचनाएं, व्यक्तित्व और घटनाएं शामिल हैं। इनमें से कोई एक भी प्रभावी या अछूती चीज़ नहीं थी जिसका सम्बंध अरब इस्लामी दुनिया से हो। जैसे वो इस दौरान इस भूखण्ड पर रहे ही न हों, या वो हाल ही में किसी पड़ोसी ग्रह की सामूहिक यात्रा से लौटे हों!
रूसी भाषा से अरबी में अनुवाद की गयी एक किताब नज़र से गुज़री जिसमें पिछली शताब्दी की दस महत्वपूर्ण किताबें, दस महत्वपूर्ण घटनाएं और दस प्रमुख व्यक्तियों का उल्लेख था। किताब ने जो दस महत्वपूर्ण किताबें करार दी, वो ये हैं: डिवाइन कॉमेडी द्वारा दांते, सम्मा थियोलोजिका द्वारा थॉमस एक्विनास, दस स्पोक ज़राथुस्ट्रा द्वारा फ्रेडरिक निशे, दि इंटरप्रिटेशन आफ ड्रीम्स द्वारा सेग्मंड फ्रायड, कबाला डीनोडाटा द्वारा क्रिस्टियन क्नार वान रोज़ेनराथ, दास कैपिटल द्वारा कार्ल मार्क्स, मैलियस मैलिफिकेरम द्वारा हेनरिकस इंस्टिटर और दि ब्रदर्स करामज़ोफ द्वारा फ्योदोर डोस्तोयवेस्की। जबकि अबुल अला अवमोअरी की रिसाला अलगुफ़्रान और अलिफ लैला व लैला को किताब ने शामिल करने से ये कह कर माफी माँग ली कि हालांकि उनका महत्व है लेकिन ये दूसरी शताब्दी से पहले प्रकाशित हुई थीं! रूसी किताब के अनुसार पिछली शताब्दी की प्रमुख घटनाओं में अमेरिका की खोज, जर्मनी की हार, कुस्तुन्तुनिया की बर्बादी, बास्टल की बर्बादी, बोल्शेविक क्रांति, 1045 में चर्च का अलग होना, वास्तावलिया का शांति समझौता, वियेना की स्वतंत्रता की लड़ाई, मंगोलों का बग़्दाद पर क़ब्ज़ा, अलटम्पेल नामी मंदिर का गिराया जाना और जैक मोलेट का जलाया जाना शामिल है। जबकि महत्वपूर्ण दस हस्तियों में चंगेज़ ख़ान, मार्टिन लूथर किंग, पोप जॉर्ज सातवें, लेनिन, जॉन आफ आर्क, ओलिवर क्रामवेल, नेपोलियन बोनापार्ट, प्रिंस व्लादिमीर, सम्राट पीटर प्रथन, और इमाम आयतुल्लाह खुमैनी शामिल हैं।
सभी सूचियों से ये स्पष्ट होता है कि इनमें सिर्फ पश्चिम के दृष्टिकोण की किताबें, घटनाएं और व्यक्ति शामिल हैं क्योंकि यूरोप की घटनाओं में उनका सीधा असर था। लेकिन इन सूचियों की मुसलमानों के यहां वो महत्व नहीं, क्योंकि पिछले हज़ार साल में उन पर बिल्कुल अलग विचारधारा, घटनाओं और हस्तियों ने प्रभाव डाला। अगर पूर्व में फैले शोध संस्थान केंद्रों में से किसी केंद्र ने दस महत्वपूर्ण किताबों, घटनाओं और हस्तियों की सूची तैयार करने की तकलीफ कर ली होती तो मुसलमानों के पास एक महत्वपूर्ण स्रोत उपलब्ध हो जाता जिससे वो अपने उद्देश्य को अपने तरीके से हासिल कर सकते। और विश्वभर की लाईब्रेरियों में केवल पश्चिम के हितों को लाभ पहुंचाने वाली विस्तृत रचनाओं का अंबार नहीं होता, मगर अफसोस कि पूर्व के अधिकांश लेखक पश्चिमी सभ्यता के आगे मंत्रमुग्ध हैं और उन्होंने सारा ज़ोर पुस्तकालयों को पूर्व की विभिन्न भाषाओं के ऐसे अनुवादों से भरने पर लगा दिया जो सारी की सारी वैश्विक घटनाओं के बारे में पश्चिमी देशों के दृष्टिकोण को पेश करती हैं। यहां तक कि कुछ मुसलमान लेखकों की रचनाओं में कभी कभी ऐसे संकेत मिल जाते हैं कि यूरोप की इस्लामी जीत क्रूर हमले थे!
जब से अल्लाह के फज़ल व करम से मुसलमानों ने पढ़ना सीखा है तब से वो अपने इतिहास को पूर्व के लोगों की क़लम और आँखों से पढ़ रहे हैं जैसा कि वो देखते हैं, जब ज़रा सा विकास किया तो खबरें और आंकड़े भी पश्चिमी समाचार एजेंसियों और सांख्यिकीय संस्थानों से हासिल करने लगे। कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि पश्चिम हर एक संभावित तरीके से अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए हर तरह से तैयार रहता है ताकि अपनी चौधराहट बरकरार रख सके और शायद किसी हद तक कुछ जानकारियों की निष्पक्षता के पीछे यही राज़ छिपा है।
और जिस तरह सभी रास्ते रूम की तरफ़ जाते हैं, उसी तरह वर्तमान दौर की बातचीत हमें सभ्यताओं के संघर्ष की ओर ले जाती है जो विकसित पश्चिम और पिछड़े पूर्व के बीच जारी है, हालांकि हम इस तुलना को सख्ती के साथ खारिज करते हैं, लेकिन हमारे मन में इस वजह के बारे सवाल ज़रूर उठता है जिसने मुसलमानों को दुनिया से गायब और उन्हें इंसानी कारनामों (उपलब्धियों) से वंचित रखा जो ऊर्जा को नष्ट करने, धन की लूट खसोट और लड़ाई की एक लंबी श्रृंखला में उलझाए रखने पर खत्म हुआ? कितने ही दिमाग और कौशल जो पश्चिमी उपनिवेशवाद और इसके परिणामस्वरूप देशों पर ज़बरदस्ती शासन करने सहित धार्मिक तत्व के कारण विस्थापित और कत्ल हुए? पिछले हज़ार साल में जहां पश्चिम शांत रहा और लूटी हुई दौलत और पलायन करने वाले दिमागों से लाभान्वित हुआ। पूर्व लड़ाईयों, हत्या, युद्ध, हमले और उपनिवेशवाद के घेरे में था जो कत्ले आम, गरीबी, अशिक्षा, कर्ज़े, पाबंदिया और लड़ाई और युद्ध में आज तक गंभीर थकान पर समापन हुआ। इसके बावजूद पश्चिम अपने कारनामों और उपलब्धियों पर किताबें और शोघ पत्र प्रकाशित करता चला जा रहा है और मुसलमान पश्चिम से, विवेकपूर्ण जिम्मेदारी से नकल करते चले आ रहे हैं। और इस संदर्भ में अच्छे और बुरे में बिल्कुल भी कोई भेद नहीं कर रहे, इसलिए पश्चिम की तुलना उन लोगों के बीच जारी है जो तीसरी शताब्दी में रॉकेट के ज़रिए उड़ कर चांद पर पहुंच गये और जो इसमें बैन्जो के असर से उड़ कर दाखिल हुए।
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