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Hindi Section (10 Dec 2016 NewAgeIslam.Com)



Eid-e-Milad-un-Nabi an Important Festival for Various Sects of Islam मीलाद उन-नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों के कई वर्गों में एक प्रमुख त्यौहार है।

 

 

 

सैयद इमतेयाज़ हुसैन

"मिलाद-उन-नबी 2016 - दिसंबर 11(रविवार) - दिसंबर 12(सोमवार)"

इस शब्द का मूल मौलिद (Mawlid) है जिसका अर्थ अरबी में "जन्म" है।

अरबी भाषा में 'मौलिद-उन-नबी' (مَولِد النَّبِي) का मतलब है हज़रत मुहम्मद का जन्म दिन है।

यह त्यौहार 12 रबी अल-अव्वल को मनाया जाता है। 1588 में उस्मानिया साम्राज्य में यह त्यौहार का प्रचलन जन मानस में सर्वाधिल प्रचलित हुआ।

नाम एवं ईद के अलग नाम

मवलिद का मूल अरबी भाशा का पद "वलद" है, जिस का अर्थ "जन्म देना", "गर्भ धारण" या "वारिस" (वंश) के हैं।

समकालीन उपयोग में, मवलीद या मौलीद या मौलूद, प्रेशित मुहम्मद के जन्मतिथी या जन्म दिन को कहा जाता है।

मौलीद का अर्थ ह.मुहम्मद के जन्म दिन का भी है, और इस शुभ अवसर पर संकीर्तन पठन या गायन को भी "मौलीद" कहा जाता है, जिस में सीरत और नात पढी जाती हैं।

इस पर्व को इन नामों से भी पुकारा और पहचाना जाता है:

ईद अल-मौलीद अन-नबी – मुहम्मद प्रवक्ता का जन्म दिन (अरबी)

ईद मीलाद-उन-नबी – ह.मुहम्मद की जन्म तिथी पर ईद (उर्दू)

ईद-ए-मीलादुन नबी – ह.मुहम्मद का जन्म (बंग्लादेशी, श्रीलंका, माल्दीव और दक्षिण भारत की भाशाओं में)

एल मूलेद (एन-नबवी)/मूलेद एन-नबी – जन्म/प्रेशित का जन्म (ईजिप्ट की अरबी भाशा)

एल-मूलेद - जन्म (तुनीश की अरबी भाशा)

गमोव – ? (वोलोफ़ भाशा)

मौलूद – प्रेषित का जन्म (अरबी)

मौलीद अन-नबी (ब.व. : अल-मवालिद) – प्रेषित का जन्म (अरबी)

मीलाद अन-नबी – पैगंबर का जन्म (उर्दू)

मौलीदुर-रसूल – अल्लाह के पैगंबर का जन्म (मलय भाशा)

मौलीदुर-नबी – प्रेषित का जन्म (इंडोनेशियन भाशा)

मौलूद नबी – प्रेशित का जन्म (मलेशियन भाशा)

मौलीदी – पैगंबर का जन्म (स्वाहिली और हौसा भाशाएं)

मौलूद-ए- शरीफ़ – शुभ जन्म (दारी भाशा (पर्शियन)/उर्दू)

मौलीद एन-नबोई एशरीफ़ – प्रेशित का शुभ जन्म दिन (अल्जीरियन भाशा)

मेवलीद-इ शरिफ़ – शुभ जन्म / मेवलूत – नाम (तुर्की भाशा)

मेवलूद/मेवलीद – शुभ जन्म (बोस्नियन)

मेवलैदी – शुभ जन्म (अल्बेनियन)

मीलाद-ए पयम्बर-ए अक्रम – महा/शुभ पैगंबर का जन्म (पर्शियन)

मूलूद – जन्म (जावनीस भाशा)

नबी/महानबी जयंती – महा प्रवक्ता का जन्म (संस्कृत / दक्षिण भारती भाशाएं).

यौम अन-नबी – प्रेशित का दिन (यौम) (अरबी)

मोवलूद - माहा प्रेशित का जन्म (अज़ेरी भाशा)

मिलाद-उन-नबीमिलाद-उन-नबी, इस्लाम के मानने वालो के लिए सबसे पाक़ त्योहार माना जाता है| मिलाद-उन-नबी का अर्थ दरअसल इस्लाम के प्रमुख हज़रत मोहम्मद के जन्म का दिन होता है | मिलाद शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के 'मौलिद' शब्द से हुई है| मौलिद शब्द का अर्थ 'जन्म' होता है और नबी हज़रत मोहम्मद को कहा जाता है | इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मिलाद-उन-नबी का त्योहार 12 रबी अल-अव्वल के तीसरे महीने में आता है |

कहा जाता है कि हज़रत मोहम्मद का जन्म फतिमिद राजवंश के दौरान 11वीं शताब्दी को हुआ था | इस्लाम धर्म के ही सिया समुदाय इस त्योहार को इस्लामिक कैलेंडर के 17वें महीनें मे मनाते है |

 कुछ समय पहले तक यह त्योहार मुख्य रूप से सिया समुदाय के लोग ही मानते थे, किंतु 12वीं शताब्दी आते तक इसे सुन्नी समुदाय ने भी अपना लिया था और 15 शताब्दी तक इस्लाम

मानने वाले संभवतः सभी समुदाय अपना चुके थे | 20वीं शताब्दी में तो इस त्योहार को राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया गया पर इसे अब इस्लाम के लगभग सभी समुदाय मनाने लगे है |

मिलाद-उन-नबी और भारत

इस्लाम की सबसे पवित्र मानी जाने वाली किताब "क़ुरान" हज़रत मोहम्मद द्वारा ही पूरी दुनिया मे लाई गयी थी और इसी रोज़ हज़रत मोहम्मद के जन्म का दिन था |

 भारत और उसके आसपास के कई देशों मे मिलाद-उन-नबी को "बरवाफात" के नाम से जानते है | बरवाफात का मतलब "आफ़त के 12 दिन"|

 कहते है कि हज़रत मोहम्मद 12 दिनों के लिए बीमार हो गये थे |

मिलाद-उन-नबी के इस त्योहार को सिया,सुन्नी और इस्लाम के अन्य समुदाय मनाते है किंतु इस्लाम धर्म के दो समुदाय वहाबी और सलफी नही मानते है |

मिलाद-उन-नबी कैसे मनाया जाता है ?

मिलाद-उन-नबी के रोज़ इस त्योहार को मनाने वाले लोग उपवास करते है | साथ ही अपने समुदाय के सभी लोगो के साथ मिलकर जन उत्सव मनाते है |

इस दिन कई जगहों पर धार्मिक गान और सामाजिक सम्मेलन किए जाते है, साथ ही इस्लाम के अनुयायी अपने घर आदि की साफ-सफाई करते है|

मज़्ज़िद में जाकर नमाज़ अता करके, लोग ग़रीबो को भोजन बाँटते है | इसतरह से यह त्योहार पूरा होता है |

अन्य नाम          ईद अल-मौलीद अन-नबी (المولد النبوي), हावलिये, दोन्बा, गनी

मनाने वाले         सुन्नी इस्लाम, शिया इस्लाम और इत्यादी मुस्लिम समुदायों में मनाया जाता है। वहाबी और सलफ़ी नहीं मनाते.

प्रकार    इस्लामी संस्कृती - सांस्कृतिक

महत्त्व    ह.मुहम्मद की जन्म तिथी

तिथि     12 रबी अल-अव्वल (सुन्नी इस्लाम), 17 रबी अल-अव्वल (शिया इस्लाम)

पालन    उपवास, जन उत्सव, धार्मिक गान, कुटुंब और सामाजिक सम्मेलन, घर और गलियों का अलंकरण

अवधि    1 दिन

आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) वार्शिक

URL: http://newageislam.com/hindi-section/syed-imteyaz-hasan/eid-e-milad-un-nabi-an-important-festival-for-various-sects-of-islam--मीलाद-उन-नबी-इस्लाम-धर्म-के-मानने-वालों-के-कई-वर्गों-में-एक-प्रमुख-त्यौहार-है।/d/109334

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