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Hindi Section (09 Mar 2017 NewAgeIslam.Com)


The Prophet Muhammad—A Great Humanitarian पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम – एक महानतम मानवता पसंद



गुलाम गौस सिद्दीकी, न्यु एज इस्लाम

24 जनवरी 2013

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम भूमि पर जन्म लेने वाले मानवता पसंदो में एक महानतम मानवता पसंद पैगम्बर का नाम है। दरअसल उन्हें मानवता का मुक्तिदाता कहा जाना चाहिए। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का कहना है कि " कल्पना कीजिये की अगर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की तरह आज कोई इंसान ऐसा होता जिस के पास आधुनिक दुनिया की तानाशाही होती तो वह सभी समस्याओं को हल करने में सफल हो जाता और ऐसी शांति और खुशी पैदा कर देता जिसकी आज सख्त जरूरत है। " [The Genuine Islam –वास्तविक इस्लाम] बर्नार्ड शॉ कहना चाहते हैं कि अगर पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आज की दुनिया पर हुकूमत करते तो पूरी दुनिया में शांति की स्थापना कर देते । इसी तरह, एक महान इतिहासकार, लीमरटाईन ने कहा कि “मानव गरिमा को मापने वाले तमाम मानकों के इस्तेमाल के बाद हम अच्छी तरह से ये कह सकते हैं कि क्या उनसे [मुहम्मद सल्लल्लाहु अलाही वसल्लम] महानतम कोइ इंसान है? "[Histoire de la Turquie]। मिशेल एच हार्ट के अनुसार, “वह इतिहास की अत्यधिक प्रभावी हस्तियों में शीर्ष हैं।“(The 100: A Ranking of the Most Influential Persons in History)

नि:संदेह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह पाक की तरफ़ से पथ भ्रष्ट तथा आश्चर्य चकित मानवता के लिए अनुकम्पा हैं इसलिए ना केवल यह कि मुस्लिम बल्कि गैर मुस्लिम भी पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का सम्मान एक निरंतर प्रेरणा स्त्रोत के रूप में करते हैं। उनके व्यक्तित्व का सबसे अच्छा हिस्सा है कि शुरू से ही एक कठिन जीवन जीने के बावजूद वह हमेशा मुस्कुराते रहे और कहते रहे कि “सभी प्रशंसा अल्लाह पाक के लिए है।“

 शायद इस दुनिया में किसी के भी जीवन पर इतना अधिक अनुसंधान और जांच नहीं किया गया जितना हुजुर मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के जीवन पर किया गया है। लेकिन उनके चरित्र में एक भी दोष आज तक मिल न सका। यही कारण है कि मक्का के काफिर भी  मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को "अल-सादिक" (सबसे सच्चा) और "अमीन" (अमानतदार) कहते थे।

 हुजुर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक अत्यंत उदार, शुभचिंतक और मिलनसार बन कर रहे और अपने अनुयायियों में महान गुणों को पैदा करने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे। किसी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से पूछा, "इस्लाम में कौन सा अमल [कार्य] बेहतर है?" उन्होंने जवाब दिया:

"(गरीब और जरूरतमंद को) खाना खिलाना और उन लोगों को सलाम करना जिन्हें तुम जानते हो और उन्हें भी जिन्हें तुम नहीं जानते।" [सहीह अल बुखारी] इसी तरह उन्होंने लोगों को ईर्ष्या और आपसी कदूरत जैसी बद आमालियों और बुरी आदतों से मना किया । उन्होंने फ़रमाया: “एक दूसरे से नफरत मत करो और एक दूसरे से ईर्ष्या मत करो, और एक दूसरे के साथ अपने संबंधों को खत्म मत करो, और ए खुदा की पूजा करने वालों! आपस में भाईचारे को बढ़ावा देना। बेशक! मुसलमानों के लिए तीन दिन से अधिक तक अपने (मुसलमान) भाइयों को सलाम व  कलाम ना करना उचित नहीं है।" [सहीह अल बुखारी]

यहां इस बात का अंदाज़ा होता है कि अल्लाह के प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने कितने व्यवस्थित रूप से और प्रभावी तरीके से अपने साथियों को प्रशिक्षित करने और उनके आचरण को सजाने की कोशिश की।

कमाल की बात यह है कि आप की मुहब्बत और दया केवल मानव मात्र तक ही सीमित नहीं थी बल्कि आपने पशुओं, पक्षियों और वृक्षों का भी ध्यान रखा । आपने अख़लाक़, व्यवहार से लोगों के दिलों पर हुकूमत की । फिर इसी समाज के लोग जो आपके जानी दुश्मन थे, आप पर फ़रेफ़ता हो गए । आप पर जान निछावर  करने लगे और क्यों न हो ? आप अपने साथियों, पड़ोसियों, अतिथियों और साधारण व्यक्तियों के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते। अतः आपने एक बार फ़रमाया कि यदि कोई मुसलमान मर जाए तो इसका छोड़ा हुआ माल इसके उत्तराधिकारियों का है और जो वह क़र्ज (ऋण) छोड़ा है इसकी अदायगी मेरे ज़िमा है। भला यह कौन कर सकता है ? वास्तव में आप सारी मानवता के लिए रहमतुललिल्आलमीन थे । आपने ऐसा मानवीय समाज गठित की जिसका इतिहास उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर सकती ।

पैगम्बरे इस्लाम मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने जिस मानव स्वभाव को अधिक नापसंद किया वह गुस्सा है। क्रोध के खतरों की खबर देते हुए अपने साथीयो से फ़रमाया: “शक्तिशाली वह व्यक्ति नहीं है जो अपनी शक्ति के माध्यम से लोगों को नीचे करे, बल्कि शक्तिशाली वह व्यक्ति है जो गुस्से की हालत में खुद को काबू में रखे।"[सहीह अल बुखारी]

इसके अलावा, पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने एक बार फ़रमाया, “सच्चा मोमिन वह है जिसके साथ से दूसरे लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। सच्चा मोमिन नफरत का बदला भी प्यार से देता है।“ पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहो तआ़ला अलैहि वसल्लम ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि जो व्यक्ति केवल प्यार का बदला प्यार से दे वह नैतिकता के निचले पायदान पर है।

एक बार जब हुजुर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के विरोधियों ने उन्हें कड़ी यातनाएं दीं तो उनके साथियों ने उनहे विरोधियों पर लानत देने के लिए कहा। उस समय पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया "मैं मनुष्यों पर शाप भेजने के लिए नहीं बल्कि उनके लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूँ।" उनके विरोधियों ने पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम और उनके साथीयों के साथ ऐसा ही व्यवहार जारी रखा लेकिन उन्होंने हमेशा उनके लिए दुआ फ़रमाई। उन्होंने अपनी पूरी पाक ज़िंदगी इस तरह गुजारी कि वह किसी के लिए कभी भी मुसीबत या परेशानी का कारण नहीं बने।

पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के द्वारा सिखाए गए महत्वपूर्ण पाठ में से एक यह है कि हमें दूसरों के बीच फूलों की तरह रहना चाहिए कांटों की तरह नहीं। यहूदी और मुसलमान मदीना में एक साथ शांति से रहते थे। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने स्वतंत्र रूप से उन्हें अपने धर्म का पालन करने की अनुमति दे रखी थी। इसके अलावा पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अपने अनुयायियों को बताया कि अगर किसी ने किसी भी तरह किसी गैर मुस्लिम [जिम्मी] की हत्या या उनके साथ बुरा व्यवहार किया तो वह जन्नत की खुशबू नहीं सूंघ सकेगा और नबी सल्लाल्ल्हू अलैहि वसल्लम क़यामत के दिन खुद उस जिम्मी (गैर मुस्लिम) का पक्ष लेंगे। [10] हुजुर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा ईसाइयों, यहूदियों और मुशरिकों के साथ शांति की इच्छा व्यक्त की, और उन्होंने अपने साथियों को तलवार म्यान से बाहर निकालने की उसी समय इजाज़त दी जब वह उनके जान व माल और इस्लाम की रक्षा,आक्रमण को पीछे हटाने, और ज़ुल्म को ख़त्म करने के लिए ऐसा करने पर मजबूर हुए।

पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इस दुनिया में शांति और एकता स्थापित करने के लिए आए। अपने अंतिम उपदेश में पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने सार्वभौमिक भाईचारे को स्थापित करते हुए असमानता के सभी रूपों को मिटा दिया। उन्होंने फ़रमाया:  “किसी अरब को किसी गैर अरब पर कोई फ़ज़ीलत नहीं है, और न ही किसी गैर अरब को किसी अरब पर कोई श्रेष्ठता प्राप्त है, और न ही किसी गोरे को किसी काले पर और न ही किसी काले को किसी गोरे पर कोई बढ़त है, श्रेष्ठता का मानदंड केवल तक़वा (यानी अल्लाह और उसके रसूल के आज्ञाओं का पालन करना) बेशक तुम में सबसे श्रेष्ठ वह है जो सबसे अधिक तक़वा वाला हो"

उनके महान भूमिकाओं में धैर्य और संयम है। वह अपने पीछे पूरी मानवता के लिए सही मानव व्यवहार का एक उत्तम उदाहरण छोड़ गए, न तो उन्होंने तपस्वी जीवन को अपनाया और ना ही सामग्री दुनिया की विलासिता की ओर आकर्षित हुए । बल्कि उन्होंने अपनी पूरी जीवन शैली में एक आश्चर्यजनक संतुलन बनाए रखा।

आप इतिहास के विभिन्न ऐतिहासिक आंकड़े पर एक सरसरी नज़र डालें तो आप उन्हें अपने जीवन के किसी विशिष्ट क्षेत्र में प्रमुख पाएंगे। लेकिन पैगम्बरे इस्लाम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सफलता सामाजिक, नैतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और अन्य पहलूओं सहित मानव जीवन के सभी पहलुओं को शामिल है। उनके जीवन का हर हिस्सा अत्यंत सुन्दरता के साथ संतुलित है और समग्र रूप से पूर्णता का एक नमूना है।

 [1] जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, [The Genuine Islam –वास्तविक इस्लाम]  सिंगापुर, जिल्द .1, नंबर 8, 1936

 [2] Lamartine, Histoire de la Turquie, पेरिस, 1854, जिल्द - द्वितीय, भाग 276 -277।

 [3] मिशेल एच हार्ट, The 100: A Ranking of the Most Influential Persons in History

न्यू यॉर्क: हार्ट प्रकाशन कंपनी इंक, 1978, भाग .33

 [4] कुरान 68: 4

 [5] सही अल बुखारी:  जिल्द -8 - हिस्सा -143 हदीस नंबर- 6236

 [6] सही अल बुखारी। पृष्ठ - 60 -हदीस नंबर- 6065

 [7] सही अल बुखारी- पृष्ठ -83 - हदीस नंबर- 6114

 [8] कुरान 21: 107

 [9] सही अल बुखारी। जिल्द -4 - पृष्ठ -475 - हदीस नंबर- 3584

 [10] अबू दाऊद जल्द -3 - पृष्ठ -170 हदीस संख्या -3052। इसके अलावा बुखारी। जिल्द - 3-हदीस

नंबर 2995

 [11] ऐ जे टाईन बी, Civilisation On Trial, न्यूयॉर्क, 1948 पृष्ठ -205

 [12] जिल्द 8 हदीस नंबर 628

 [13] कुरान 21: 107

 [14] सही अल बुखारी जिल्द- 9 हदीस नंबर 7439

 URL for English article: http://www.newageislam.com/islamic-personalities/ghulam-ghaus,-new-age-islam/the-prophet-muhammad-(saw),-a-great-humanitarian/d/10135

 

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URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/ghulam-ghaus-siddiqi,-new-age-islam/the-prophet-muhammad—a-great-humanitarian--पैगम्बर-मुहम्मद-सल्लल्लाहु-अलैहि-वसल्लम-–-एक-महानतम-मानवता-पसंद/d/110334

 

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