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Hindi Section (09 Aug 2018 NewAgeIslam.Com)


How Imran Khan Will Set Up Medina-Like Islamic Welfare State? इमरान खान मदीना की तरह इस्लामी कल्याणकारी राज्य कैसे स्थापित करेंगे?

 

 

 

गुलाम रसूल देहलवी, न्यू एज इस्लाम

2 अगस्त 2018

पाकिस्तान के उन्नीसवें प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के मुखिया इमारान खान का कहना है कि उनकी योजना पाकिस्तान को बिलकुल उसी तर्ज़ पर एक इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाने का है, जिस तर्ज़ पर इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मदीना को एक इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाया थाl

मुझे अंतिम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से प्रेरणा (inspiration) मिलती है जिन्होंने मदीना को एक आदर्श कल्याणकारी राज्य बनायाl जो कि हैवानियत पसंद नहीं बल्कि एक इंसानियत पसंद राज्य थाl बानी गाला से इस्लामाबाद में किए गए अपने भाषण में इमरान खान ने कहा कि “मैं आपके सामने वह पाकिस्तान रखना चाहता हूँ जिसका सपना मैंने देखा हैl एक ऐसा राज्य जो मदीना में स्थापित किया गया था जिसमें विधवा और ग़रीबों का ध्यान रखा जाता थाl

इस प्रकार पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा राजनीतिज्ञ इमरान खान ने एक ऐसा इस्लामी कल्याणकारी राज्य स्थापित करने का अपना इरादा व्यक्त किया है जिसके मार्गदर्शक सिद्धांत वही होंगे जिन्हें पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक महानतम सभ्यता का आधार रखने में प्रयोग किया थाl उन्होंने कहा कि मैं अपने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाम पर यह प्रतिज्ञा लेता हूँ कि “मैं एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करूँगा जो आम लोगों के लिए होगी, और मेरे शासन की सभी नीतियाँ किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं बल्कि आम लोगों के लिए होंगी”l उन्होंने कौम से यह वादा किया है कि मैं एक आम जीवन व्यतीत करूँगाl अब तक हम यही देखते आए हैं कि जो भी सत्ता की कुर्सी पर बैठा है उसकी ज़िन्दगी बदल जाती हैl लेकिन यह मेरे साथ नहीं होगाl

ध्यान देने योग्य बात यह है कि आम चुनाव से पहले पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने अपने मेनू फेस्टो में भी स्पष्ट रूप से अपना मिशन पाकिस्तान को एक ऐसा इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाना प्रदर्शित किया था जो मानवीय और न्यायप्रिय सिद्धांतों पर आधारित होगी जिस पर मीसाक़े मदीना का आधार थाl जो कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के राज्य में मानवाधिकार का एक लिखित घोषणापत्र थाl

दिलचस्पी की बात यह है कि इमरान खान ने उस मीसाक़े मदीना का हवाला दिया है जिसमें एक मुस्लिम बहुल राज्य में विशेष रूप से दुसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान किया गया थाl यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह अपने वादे पुरे करेंगेl लेकिन यहाँ मैं इस बात को स्पष्ट करना चाहूँगा कि इमरान खान की इस बात का क्या अर्थ है कि उनका हुकूमत करने का तर्ज़ मदनी इस्लाम पर आधारित होगाl और भारत व पाक के इस्लामी विद्वानों को इमरान खान के इस बयान को किस संदर्भ में देखना चाहिएl ख़ास तौर पर इस संबंध से भारत के कुछ बड़े विचारक और विद्वान बड़े आशान्वित दिख रहे हैंl मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के प्रेसिडेंट प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने रोजनाम राष्ट्रीय सहारा में एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने एक इस्लामी कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के इमरान खान के इरादों का स्वागत किया है और यह कहा है उनका यह इरादा अमन व सुकून और बहुलतावाद के लिए नेक नियती और खैर ख्वाही पर आधारित हैl इसी प्रकार दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन डाक्टर जफरुल इस्लाम का भी हाल ही में उर्दू रोजनामा इन्कलाब में एक बयान प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने ‘बात चीत का आरम्भ करने पर भारत सरकार की अनिच्छा’ पर पाकिस्तान की ओर से “तहरीक ए अमन” की हिमायत की हैl

लेकिन पाकिस्तान के स्वयंभू निज़ाम ए मुस्तफा के मद्देनजर कि जिसका अब तक इस देश में बड़े पैमाने पर शोषण किया जा चुका है, कई प्रश्न पैदा होते हैंl बहुत अफ़सोस की बात है कि पाकिस्तान को निज़ाम ए मुस्तफा के आधार पर एक इस्लामी राज्य की हैसियत से स्थापित किया गया था, लेकिन पाकिस्तान का संविधान और उसके विभिन्न नगरीय नियमों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की ज़बरदस्त पामाली की गई हैl पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की बात तो छोड़ें, वहाँ तो मुस्लिम अल्पसंख्यक भी सुरक्षित नहीं हैंl वहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मीसाके मदीना में मौजूद बुनियादी इंसानी अधिकारों को भी बड़े पैमाने पर दिन रात पामाल किया जाता हैl इसलिए, इस स्थिति में बुनियादी प्रश्न यह पैदा होता है कि क्या वास्तव में पाकिस्तान में किसी कल्याणकारी राज्य का अस्तित्व है? और अगर इमरान खान मदीना राज्य को एक मुस्लिम बहुसंख्यक देश के लिए एक स्टैंडर्ड शासन प्रणाली मानते हैं तो उनकी यह कोशिश पाकिस्तान में सक्रिय उन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के अवधारणा से किन अर्थों में भिन्न होगी जो सारे के सारे इस्लामी राज्य स्थापित करने का दम भर रहे हैं?

इस प्रश्न पर बात चीत को आगे बढ़ाने के लिए अब हम बिलकुल स्पष्ट अंदाज़ में मीसाके मदीना के बुनियादी मामले की नए सिरे से समीक्षा करते हैंl

एक उम्मत की कल्पना: मदीना में रहने वाले सभी लोग चाहे वह यहूदी हों, ईसाई हों, मुशरिक हों, काफिर हों, आदिवासी हों, अमीर हों, गरीब हों, आका हों, गुलाम हों या कोई औरl सब एक उम्मत थेl इसमें मक्का के मुहाजेरीन भी शामिल थे मदीना के नागरिक भी शामिल थे, पड़ोसी आदिवासी लोग भी शामिल थे और वह भी शामिल थे जो मुसलामानों के लिए लड़ते थे और मुसलामानों के साथ लड़ते थेl

वफादारी में शोषण का रोकना (सद्देबाब): धनी और निर्धन, प्रभु और दास, निम्न और उच्च, सफेद और काला कानून की दृष्टि में सब समान हैंl मिसाके मदीना में कानून के उल्लंघन को रोकने के लिए आम नागरिकों के बीच संयुक्त रूप से एक सामूहिक सहयोग को निश्चित बनाया गया थाl मदीना की इस अनुच्छेद के तहत सभी नागरिक एक ही हार के मोती माने जाते थेl

संयुक्त रक्षा: इस संविधान के अनुसार मुसलामानों और गैर मुस्लिमों को एक दुसरे का बचाव करना अनिवार्य था और नियम व कानून नागरिकों और विभिन्न वर्गों के नेताओं के आपसी राय के साथ ही बनाए जाते थेl

जवाबदेही: जो मिसाके मदीना की किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन करेगा वह इस संविधान से प्रदत्त रियायतों से वंचित हो जाएगा और उसे इसके परिणाम भी भुगतने होंगेl

बहुलतावाद: बहुसांस्कृतिक और बहुलतावादी समाज के अन्दर इसके सारे घटकों के बीच पाए जाने वाले विशिष्ट धार्मिक, पारम्परिक और सांस्कृतिक पहलुओं को स्वीकार करनाl

यह मीसाके मदीना के कुछ महत्वपूर्ण संघटक हैं जिन्होंने मदीना को इस्लामी इतिहास में एक पवित्र राज्य बना कर पेश कियाl 52 प्रावधानों पर आधारित इस दस्तावेज़ में विशेष रूप से विभिन्न धार्मिक बिरादरियों के सात शांतिपूर्ण सह अस्तित्व पर ज़ोर दिया गया थाl और विशेष रूप से यह बात उल्लेखनीय है कि यह मीसाके मदीना केवल जंग के हालत के लिए ही नहीं था बल्कि हालते अमन के लिए भी थाl

मीसाके मदीना के रौशनी में एक उम्मत की अवधारणा यह स्पष्ट करती है कि मुस्लिम और गैर मुस्लिम चाहे मक्का से संबंध रखते हों या मदीने सेl एक ही उम्मत थेl इस प्रकार मीसाके मदीना में पेश किए गए सिद्धांत व नियम ने इतिहास में पहली बार एक वहदत के रूप में “उम्मत” को स्वीकार किया, और व्यक्तिगत या कबाइली जीवन की जगह केवल एक उम्मत की कल्पना पेश कीl और इस वाहिद उम्मत की पहचान ना तो कोई धर्म है, ना कोई नस्ल है और ना ही कोई कबीला हैl बल्कि उम्मते वाहिदा के इस कल्पना ने नस्ल परस्ती और धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार का रुझान समाप्त कियाl

“यहूदी अपने खर्चों के स्वयं जिम्मेदार होंगे और मुसलमान भी अपने खर्च के जिम्मेदार होंगे......यहूदी अपने धर्म पर अमल करेंगे और मुसलमान अपने धर्म परl वफादारी गद्दारी के खिलाफ सुरक्षा है...... बनू नजार, बनू हारिस, बनू सईदा, बनू जशाम, बनू सअलबा, जफना, बनू शुतैबा के यहूदियों को वही अधिकार प्राप्त थे जो बनू औस के यहूदियों को प्राप्त थेl

(हवाला: सुनन बेहकी, हदीस नंबर 16808- और मुकम्मल मीसाके मदीना तारीख इब्ने कसीर में देखें, भाग 2, पृष्ठ 321, और इब्ने हश्शाम, भाग 1, पृष्ठ 501)

नतीजे में, मुसलमानों के लिए एक बहुलतावादी समाज के अन्दर गैर मुस्लिमों के साथ रहने और ख़ास तौर पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को अपनाने का फिकही जवाज़ मिसाके मदीना से साबित होता हैl

साउथ एशिया में इस्लाम के इतिहास के विशेषज्ञ बरबरा डले मेटकाल्फ (Barbara Daly Metcalf) ने लिखा है कि संयुक्त राष्ट्रीयता के संस्थापक और एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना हुसैन अहमद मदनी ने मिसाके मदीना की बुनियाद पर लोकतंत्र और राष्ट्रीय अखंडता का आन्दोलन चलाया थाl वह लिखते हैं कि “नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी नबूवत के चालीसवें साल इस लिखित संविधान के आधार पर मदीना के यहूदी नागरिकों और अपने सहाबा के बीच एक संयुक्त मोर्चा स्थापित किया थाl जिसने उन्हें एक साथ ला कर खड़ा कर दिया थाl (मौलाना की किताब इस्लाम एंड कम्पोजिट नेशनलिज्म देखें)

अब इमरान खान के इस्लामी कल्याणकारी राज्य के अवधारणा पर गौर करेंl उन्होंने कहा है कि आज यूरोप में कल्याणकारी राज्य का अस्तित्व है, लेकिन उन्होंने जंग की चक्की में पिस रहे पाकिस्तान को एक “इस्लामी कल्याणकारी राज्य” में परिवर्तित करने का कोई खाका नहीं पेश किया हैl उन्होंने केवल इसी बात पर संतोष किया कि उनकी सरकार के रहनुमा उसूल वही हैं जिन्हें पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक “महानतम सभ्यता” का आधार रखने में प्रयोग किया थाl इसलिए उन्होंने अपने भाषण में केवल मिसाके मदीना से प्राप्त होने वाले अपने प्रेरणा स्त्रोत का उल्लेख किया हैl इमरान खान ने समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार कहा कि “हालांकि हमारा समाज पुर्णतः इसके विरुद्ध है लेकिन हम पाकिस्तान को उन्हीं सिद्धांतों पर चलाएंगे जिन पर मदीना राज्य चला करती थीl”

लेकिन इस प्रकार के बड़े बड़े बयानों में कई निहितार्थ छुपे होते हैंl जैसे कुछ लोग यह कह सकते हैं कि मदनी दौर के मुकाबले में मक्की इस्लामी उसूल अधिक बहुलतावादी, शांतिप्रिय और व्यापक थे, हालांकि यह मजबूरी की हालत में थाl तथापि मदनी दौर में इस्लामी राज्य की एक आक्रामक तस्वीर हमें देखने को मिलती है जिसमें गज्वात, तौहीने रिसालत का कानून, यहूदियों और ईसाईयों का राज्य से निकाला जाना और “لا اکراہ فی الدین” जैसे कुरआन के शांतिपूर्ण आयतों का मंसूख किया जाना भी पाया जाता हैl पाकिस्तान में लगभग सभी इस्लाम परस्त राजनीतिक पार्टियों का दृष्टिकोण यही है, अब देखना यह है क्या इमरान खान मदीना जैसे कल्याणकारी राज्य का वास्तविक माडल विकल्प करते हैं जिसकी बुनियाद नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद राखी थी या फिर उस रास्ते पर चल पड़ते हैं जिसे पाकिस्तान में चरमपंथी सिद्धांत निर्माताओं ने अग़वा कर रखा हैl

URL for English article: http://www.newageislam.com/the-war-within-islam/ghulam-rasool-dehlvi,-new-age-islam/how-imran-khan-will-set-up-medina-like-islamic-welfare-state?/d/116014

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/how-imran-khan-will-set-up-medina-like-islamic-welfare-state?--عمران-خان-کس-طرح-مدینہ-جیسا-ایک--اسلامی-ویلفیئر-اسٹیٹ--قائم-کریں-گے/d/116055

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/ghulam-rasool-dehlvi,-new-age-islam/how-imran-khan-will-set-up-medina-like-islamic-welfare-state?--इमरान-खान-मदीना-की-तरह-इस्लामी-कल्याणकारी-राज्य-कैसे-स्थापित-करेंगे?/d/116077

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