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Hindi Section (04 Aug 2018 NewAgeIslam.Com)


Indian Secularism: Non-Religious, Irreligious or Anti-Religious? भारतीय सेकुलरिज्म: गैर मज़हबी मज़हब बेज़ार या मज़हब विरोधी

 

 

 

गुलाम गौस सिद्दीकी, न्यू एज इस्लाम

14 जुलाई 2018

एक स्वयंभू सेकुलर बुनियाद परस्त मणिशंकर अय्यर लिखते हैं,

“सबसे पहली बात यह है कि भारतीय सेकुलरिज्म मज़हब विरोधी या मज़हब बेज़ार नहीं हो सकता क्योंकि हमारे नागरिक बड़े पैमाने पर मज़हबी हैंl शब्द सेकुलरिज्म जहां की उपज है, अर्थात ईसाई दुनिया के उलट, भारत में सेकुलरिज्म का अर्थ राज्य को मज़हबी अथारिटी के विरुद्ध खड़ा करने का नाम नहीं है बल्कि यहाँ सेकुलरिज्म का अर्थ मज़हबी मामलों को व्यक्तिगत दायरे में और राज्य संबंधी मामलों को सार्वजनिक दायरे में रखना हैl और दूसरी बात यह है कि एक ऐसे बहु धार्मिक देश में, जहां लोग अपने धर्म को गंभीरता से लेते हैं आवश्यक है कि सेकुलरिज्म सभी धर्मों के बराबर सम्मान के सिद्धांत पर आधारित हो (और जो किसी धर्म की पैरवी नहीं करते)l उनके लिए एक बार जवाहर लाल नेहरु ने कहा था, “[सेकुलरिज्म] का अर्थ धर्म और विवेक की स्वतन्त्रता है जिसमें उन लोगों की आज़ादी भी शामिल है जो किसी भी धर्म की पैरवी नहीं करतेl इसका अर्थ सभी धर्मों की स्वतन्त्रता है, मगर यह कि वह एक दुसरे के मामलों में हस्तक्षेप करें या राज्य के मूल अवधारणा में कोई खलल पैदा करेंl” (अय्यर 2004: एक सेकुलर बुनियाद परस्त का एतराफ़)l

वह आगे कहते हैं,

“तथापि, रियासती मामलों के संबंध में सेकुलरिज्म का अर्थ हर धर्म से संबंधित मामलों में राज्य का समानता वाला अमल दखल नहीं बल्कि सभी धर्मों से राज्य का अलगाव होl सेकुलर भारत में राज्य का कोई धर्म नहीं होताl एक भारतीय जिस भी धर्म का मानने वाला हो या जिस भी धर्म का प्रचार करता हो यह राज्य के लिए नागरिकों का एक व्यक्तिगत मामला रहना चाहिएl राज्य का धर्म के साथ कोई संबंध नहीं होना चाहिए बल्कि उसे हर नागरिक को सुरक्षा, समान अवसर और समान लाभ पर ध्यान देना चाहिएl किसी भी एक धार्मिक बिरादरी को लाभ नहीं पहुंचना चाहिएl और किसी भी धार्मिक बिरादरी को असमर्थता और हानि का जिम्मेदार नहीं बनाना चाहिएl” (अय्यर, एक सेकुलर बुनियाद परस्त के एतेराफ, पेंगुइन पुस्तकालय, नई दिल्ली, 2004)


सेकुलरिज्म की परिभाषा विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार से की गई हैl अधिकतर सेकुलरिज्म शब्द का प्रयोग सार्वजनिक जीवन और सरकारी मामलों से धर्म का अलगाव या धर्म और राजनीति के अलगाव के लिए बयान किया जाता हैl अधिकतर तथाकथि विकसित देश धर्मों को स्वीकार नहीं करते हैं इसी लिए किसी ख़ास धर्म को कोई ख़ास महत्व नहीं देतेl भारतीय सेकुलरिज्म की विशेषता यह है कि यह उन तथाकथित विकसित देशों के सेकुलरिज्म से बिलकुल अलग हैl भारतीय सेकुलरिज्म का अर्थ राज्य की ओर से सभी धर्मों के साथ बराबर व्यवहार हैl भारतीय संविधान के 42 वें संसोधन में जिसे 1976 ई० में लागू किया गया था, संविधान की प्रस्तावना में साफ़ तौर पर यह कहा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश हैl हालांकि ना तो भारतीय संविधान में और ना ही उसके नियमों में धर्म और राज्य के बीच संबंधों की व्याख्या की गई है, तथापि, भारत हर धर्म को स्वीकार करता है और इन सभी को समान सम्मान प्रदान करता हैl भारत के नागरिकों को हिन्दू मत, इस्लाम, ईसाइयत, जैन मत, बुद्ध मत, सिख मत आदि जैसे अपने अपने धर्म पर अमल करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त हैl

चूँकि भारतीय सेकुलरिज्म हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारियों को अदा करने का अधिकार प्रदान करता है इसी लिए इस सेकुलरिज्म को धर्म विरोधी बनाना गलत होगाl

मुसलामानों के अकीदे के संदर्भ में भारतीय सेकुलरिज्म मुसलामानों को उनकी बुनियादी धार्मिक जिम्मेदारियों को पूरा करने से नहीं रोकता जैसा कि कुरआन की इस आयत में उल्लेखित है,

“और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें” (51:56)

भारतीय सेकुलरिज्म में मुसलामानों को अपने अल्लाह पाक की इबादत करने की पूर्ण स्वतन्त्रता हासिल हैl वह तक़वा प्राप्त करने और रूहानी तरक्की के प्राप्ति के लिए अपनी सभी धार्मिक जिम्मेदारियां अदा कर सकते हैंl मुसलमानों को पांच वक्त की नमाज़ अदा करने, रोज़े रखने, हज करने, ज़कात देने, मुराकबा करने, अल्लाह का ज़िक्र करने और दुसरे रूहानी कमालात हासिल करने से रोकने की बात करना सरासर हिंदुस्तान के संविधान के खिलाफ हैl

कई इस्लामिक इस्कालर ने सेकुलरिज्म को इस्लाम के साथ संगत माना हैl जैसे कि एमोरी यूनिवर्सिटी में कानून के एक प्रोफ़ेसर और ‘Islam and the secular state: negotiating the Future of Sharia’ नामक किताब के लेखक अब्दुल्लाह अहमद नईम कहते हैं, “शरीअत की ताकत के बल बूते पर नाफ़िज़ करने से इसकी धार्मिक हैसियत खत्म हो जाती है इसलिए कि इस स्थिति में मुसलमान रियासती कानून पर अमल करने लगेंगे और यह आज़ादाना तौर पर मुसलमान की हैसियत से उनकी ज़िम्मेदारी नहीं होगीl” [Islam and the secular state---- कैम्ब्रिज हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 2008]

“सर्व धर्म संभाव” या “सभी धर्मों का समान सम्मान” को आम तौर पर एक हिन्दू कल्पना माना जाता है जिसे राम कृष्ण, विवेकानन्द और गांधी ने विकल्प किया हैl तथापि कुछ हिन्दू इसे हिन्दू परम्परा का एक भाग स्वीकार नहीं करते हैंl वह इस कथन को गांधी से जोड़ते हैं और यह कहते हैं कि यह गांधी ने पहली बार सितंबर 1930 में उस समय कहा था जब वह अपने अनुयायियों से हिंदुओं और मुसलामानों के बीच बटवारा समाप्त करने की बात कर रहे थेl तथापि, हिंदुओं की एक बहुमत इस वाक्य को हिंदुस्तानी सेकुलरिज्म के महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक मानती है, जहां राज्य सभी धर्मों को बराबर सम्मान प्रदान करता हैl

(पारसी लोगों के एक सांस्कृतिक त्यौहार) “ईरान शाह अदोदा अतसु 2017 के दौरान अपनी तकरीर में भारतीय उप राष्ट्रपति एम वैंकैया नायडू ने कहा था कि, “मैं यह कह रहा हूँ कि हकीकत में सेकुलरिज्म भारतीय संविधान में पेश किए जाने से बहुत पहले भारतीय नागरिक के डीएनए में शामिल थाl ‘सर्व धर्म संभाव’ भारत के सेकुलर नैतिकता का आईना दार हैl उन्होंने अधिक कहा कि “भारत विभिन्न सभ्यताओं और धर्मों का देश है, देश की सेकुलर बुनियादों को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए और धार्मिक अतिवादियों के तुच्छ हितों के पेशे नज़र धर्म के नाम पर मतभेद पैदा करने के प्रयासों का सिर कुचला जाना चाहिएl”

बेशक भारत जैसे एक बहु सांस्कृतिक और बहु धार्मिक देश में सेकुलरिज्म एक आवश्यक भाग बन चुका हैl सेकुलरिज्म भारत की विशेषता बन चुकी है, और इसकी बुनियादी वजह यह है कि यह सभी धर्मों को बराबर सम्मान प्रदान करता है और इसके संविधान में सभी देशवासियों को अपने अपने धर्मों के अनुसार गुज़र बसर करने की अनुमति हैl इसलिए सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए आवश्यक है कि वह भारतीय सेकुलरिज्म के इस बुनियादी कल्पना को दिमाग में रखें और देश में अमन व शांति कायम रखें, इसके लिए उन्हें सामूहिक रूप में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के प्वाइंट को मजबूत करना होगाl इसके अलावा, भारतीयों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने छात्रों, बच्चों और नागरिकों को इसके बारे में बताएं ताकि वह देश में पनपने वाली किसी भी नकारात्मक मानसिकता का शिकार ना हो सकेंl

URL for English article: http://www.newageislam.com/islam-and-politics/ghulam-ghaus-siddiqi,-new-age-islam/indian-secularism--non-religious,-irreligious-or-anti-religious?/d/115832

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