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Hindi Section (07 Sep 2013 NewAgeIslam.Com)


Islam and Hinduism इस्लाम और हिंदू धर्म

 

मौलाना वहीदुद्दीन खान

21 अगस्त, 2013

(उर्दू से अनुवाद: मोहम्मद अंजुम, न्यु एज इस्लाम)

दो महान परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले इस्लाम और हिंदू धर्म दोनों एक हज़ार से अधिक बरसों से मौजूद हैं। इन दोनों धर्मों के बीच के सम्बंधों को समझना बहुत अहम है। इन दोनों के सम्बंधों के विषय पर दो अलग अलग राय पाई जाती हैं। एक राय ये है कि ये दोनों परंपराएं एक दूसरे से बहुत समान हैं। एक बार मुझे एक हिंदू विद्वान से मिलने का मौक़ा मिला जिन्होंने बड़े उत्साह के साथ कहा, "मैं इन दोनों धर्मों के बीच कोई अंतर नहीं पाता, क्योंकि जब मैं कुरान पढ़ता हूँ तो ऐसा लगता है कि गीता पढ़ रहा हूँ और जब गीता पढ़ता हूँ तो ऐसा लगता है कि कुरान पढ़ रहा हूँ।" लेकिन ये समस्या का अत्यधिक सरलीकरण है। और मुझे नहीं लगता कि ये धारणा शैक्षिक जांच पर खरी उतरेगी।

और इस मुद्दे पर दूसरी राय ये है कि इस्लाम और हिंदू धर्म दोनों एक दूसरे से बहुत अलग हैं और दोनों एक दूरसे को लेकर ज़बरदस्त बहस करते हैं। ये धारणा खासकर ब्रिटिश कार्यकाल के दौरान भारत में आम थी और उस समय अपने चरम पर पहुंच गई।

बौद्धिक विकास के संदर्भ में दोनों धर्मों की खूबियों की समीक्षा बौद्धिक और अकादमिक रूप से अधिक उपयोगी होगी। इस तरह का विकास सामाजिक सम्पर्क और बौद्धिक आदान प्रदान के परिणाम स्वरूप ही हो सकता है। इस बिंदु को स्पष्ट करने के लिए मैं कुछ ऐतिहासिक उदाहरणों की चर्चा करना चाहूंगा। जवाहर लाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध किताब 'The Discovery of India' में लिखा है कि जब अरब हिंदुस्तान आए तो वो अपने साथ एक शानदार संस्कृति लेकर आए। इतिहास उनके इस बयान की पुष्टि करता है।

अरब 7वीं और 8वीं सदी में हिंदुस्तान आये थे। उस समय भारत में अंधविश्वास का वर्चस्व था। ज़्यादातर हिंदुस्तानी प्रकृति की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि सितारों से लेकर ग्रहों तक, नदी और पेड़ तक प्रकृति में दिव्य हैं। इस्लामी आस्था के अनुसार सृष्टिकर्ता केवल खुदा है और पूरा ब्रह्मांड उसकी रचना है। ये विचारधारा उस समय के हालात के लिए क्रांतिकारी थी। इसने भारतीय समाज को वैज्ञानिक सोच से परिचित कराया और भारतीयों की मानसिकता में बदलाव पैदा किया। इस विचारधारा से परिचय के बाद भारतीयों ने प्रकृति की पूजा करने और इसे दिव्य समझने के बजाए प्रकृति का अध्ययन करने की कोशिश की।

भारत में इस्लाम के आगमन का दूसरा प्रभाव वैश्विक भाईचारे से परिचित होना था। उस समय भारतीय समाज में जाति व्यवस्था का वर्चस्व था। समानता की इस्लामी अवधारणा ने काफी हद तक इस व्यवस्था में परिवर्तन पैदा किया। इस इस्लामी अवधारणा के योगदान की समझ को डॉ. तारा चंद की 1946 में लिखी किताब "The Influence of Islam on Indian Culture" से प्राप्त किया जा सकता है।

इन मिसालों से हम भारतीय समाज पर इस्लाम के सकारात्मक और स्वस्थ्य प्रभाव को समझ सकते हैं। आइए अब हम भारतीय मुसलमानों के लिए हिंदू धर्म के योगदान पर एक मिसाल पर नज़र डालते हैं। खुद को उकसाये जाने के बावजूद खुद को उकसाने की इजाज़त न देना इस्लाम की एक ऐसी शिक्षा है जो भुला दी गयी है। मैंने इस शिक्षा की एक खूबसूरत मिसाल भारत की महान आत्मा स्वामी विवेकानन्द के जीवन में पाई है।

उनके दोस्तों में से एक उन्हें आज़माना चाहते थे। इसलिए उसने स्वामी जी को अपने घर पर आमंत्रित किया। जब स्वामी जी उसके घर पहुंचे तो उन्हें एक कमरे में बैठने के लिए कहा गया, जहाँ एक मेज़ के पास विभिन्न धर्मों की पवित्र किताबें एक पर एक करके रखी गईं थीं। हिंदू धर्म की पवित्र पुस्तक भगवत गीता को सबसे नीचे रखा गया था। और अन्य धार्मिक किताबें इसके ऊपर रखी गई थीं। स्वामी जी के दोस्त ने उनसे पूछा कि वो इस पर क्या कहेंगे।

ये स्पष्ट रूप से स्वामी जी के लिए अपमानित करने वाला होना चाहिए था लेकिन चिढ़ने के बजाय वो सिर्फ मुस्कुराए और कहा "वास्तव में नींव बहुत अच्छी है" ये घटना इस बात की खूबसूरत मिसाल है कि अगर कोई व्यक्ति चिढ़ने से इंकार कर दे तो वो इतना ताक़तवर हो जाता है कि किसी भी नकारात्मक स्थिति को सकारात्मक स्थिति में बदल सकता है। इसके अलावा बुखारी में एक हदीस है, जो हमें नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की सामान्य नीति के बारे में बताती है। पैगम्बर सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की बीवी आएशा सिद्दीक़ा कहती हैं कि "जब कभी नबी सल्लल्लाहुब अलैहि वसल्लम को ऐसी किसी स्थिति का सामना करना पड़ा और उन्हें दो रास्तों में से किसी एक का चयन करना पड़ा तो उन्होंने हमेशा कठिन रास्ते के बजाय आसान रास्ते को चुना।"

इस सिद्धांत के सफलतापूर्वक पालन की एक मिसाल महात्मा गांधी के जीवन में भी देखी जा सकती है।1947 से पहले के समय में भारत ब्रिटिश सरकार से अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहा था। उस समय भारतीय लीडरों के पास हिंसक गतिविधियों और शांतिपूर्ण विरोध के दो रास्ते मौजूद थे। गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार के साथ हिंसक संघर्ष से परहेज़ किया और शांतिपूर्वक विरोध का रास्ता चुना। वो बिना खून खराबे के बड़ी सफलता प्राप्त करने में सक्षम थे।

महात्मा गांधी द्वारा पेश की गई ये मिसाल इस्लामी सिद्धांतों का एक बहुत अच्छा उदाहरण है। मेरे मुताबिक़ धर्मों में मतभेद बुराई नहीं बल्कि अच्छाई है। हमें सिर्फ सकारात्मक मन के साथ मतभेद को स्वीकार करने की ज़रूरत है ताकि हम एक दूसरे से सीख सकें और दुश्मन के बजाय दोस्त की तरह जीवन बिता सकें। जीवन सहयोग और सहअस्तित्व का नाम है, और विभिन्न धर्मों के बीच सम्बंध इस सिद्धांत की मान्यता पर आधारित होने चाहिए।

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 http://www.newageislam.com/spiritual-meditations/maulana-wahiduddin-khan/islam-and-hinduism/d/13125

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TOTAL COMMENTS:-   37


  • Islam Bharat me na hi aata to shi Tha.
    By Parveen - 4/20/2018 7:35:51 AM



  • Hindu dharma was best
    By Bnsi - 4/6/2018 9:17:06 AM



  • Saare Muslims ke poorwaj hindu hi the..jai Shree Ram...
    By Jon - 3/29/2018 11:18:25 AM



  • All the progress of India is due to Britishers.They helped to create scientific atmosphete in India.
    By IKRAM ALI KHAN - 1/26/2018 11:20:02 AM



  • jub hum musalman hi islam ke rastea se hut kr chal rhe hein to islam ki achhiyan kesea dikhi dengi. Agr kisi ko islam ki vastvikta janna hei to skaratmuk drustikon se Quran ko pden.
    By abdul gani shaikh - 1/10/2018 8:52:04 PM



  • मौलाना वहीदुद्दीन
     लिखते हैं कि नेहरू ने ये लिखा है discovery of india में कि अरब देशों से आये लोग ही यहां एक शानदार संस्कृति लेकर आये हिन्दू तो बहुत अन्धविश्वाशी और पृकृति को पूजने वाले थे।यहां सबसे पहले ये बताना जरूरी है कि नेहरू तो एक विवादास्पद ब्यक्ति है उसके तो पूर्वज मुसलमान ही बताये जाते हैं और ये इस देश का दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के बाद इस देश की बागडोर उस जैसे आदमी के हाथ में आई।खैर अब बात करते हैं कि मुस्लिम धर्म क्या है और हिन्दू धर्म क्या है, इस्लाम में(कुरान)में ये लिखा है कि जो इस्लाम को नहीं मानता वो काफिर है और उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है।और दूसरी तरफ हमारे वेद कहते हैं कि "वसुधैव कुटुम्बकम"यानी कि पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है।अब ये जो भाईचारे का धर्म बताने वाले बतायेंग कि आज दुनिया में 56 या 57 देश मुस्लिम हैं और सबसे ज्यादा झगड़ा वहीं पर है, सब एक दूसरे को ही मारने में लगे हैं ये कैसा भाईचारा है कोई अगर समझा सके तो समझाये।
    1947 में हमारे देश के दो टुकड़े हो गए आज तो वो तीन हो गए हैं लेकिन कोई बतायेगा कि आज पाकिस्तान और भारत में क्या फर्क है वहाँ आज सिर्फ आतंकवाद का ही राज है और हम कहाँ पहुंच गए हैं और इसके साथ ही हमारे यहां के ये शांतिप्रिय लोग रात दिन सिर्फ आतंकवाद फैलाने में ही लगे हैं।
    अब करते हैं पृकृति की पूजा की तो आज पूरी दुनिया global warming से परेशान हैं और इसका कारण सिर्फ पृकृति का दोहन है अगर हमारी संस्कृति को समझते तो आज ये स्तिथि नहीं होती।

    By Patanjali mishra - 12/20/2017 3:45:59 AM



  • i have some doubts to give a muslim boy  give your cellphone no.pls
    By pawan kumar - 12/6/2017 10:07:52 AM



  • It's a time of thought!!!
    If God is one,Then Religion is one....
    Allah says in the Glorious Quran their is only one Religion acceptable in the sight of Allah that is Islam

    By Md salim - 11/13/2017 1:32:53 AM



  • I proudly because I m indian muslim I sea jio or jine do thanks 
    By Shahid Ahmad - 10/20/2017 8:27:15 AM



  • Jai Shree Ram
    By Rajkumar - 10/18/2017 2:52:22 AM



  • Bharat me kuritya angrejo be khatam ki na ki Muslim Dharam be parda Partha Val vivah sab badshahon ki den hai
    By Skk - 10/1/2017 8:25:05 AM



  • क. विज्ञान न केवल हिंदुओं की पुस्तकों में है बल्कि उनकी संस्कृति के आधार में भी ओतप्रोत है. यहाँ तक कि सामान्य से सामान्य रीति रिवाज, जो अंधविश्वासों और विदेशी प्रभाव में पुते हुए हैं, भी वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित हैं. हाथ जोड़कर नमस्ते, स्त्रियों की चूड़ी और कुंडल, प्रातःकाल अधिक जल पीना जिसे उषापान कहते हैं, माँस का त्याग, एक पत्नी/पति वाद, प्राणायाम, ध्यान, व्यायाम, झूठा न खाना, कई बार हाथ धोना, और अंगों को भली प्रकार से धोकर स्वच्छ रखना जिससे खतना आदि कराने की आवश्यकता ही न पड़े, इत्यादि सब बातें वैज्ञानिक हैं.

    ख. इसीलिये एक आम पढ़ा लिखा हिंदू वैज्ञानिक और बौद्धिक माहौल में अच्छे से सामंजस्य बैठाकर आगे बढ़ जाता है.

    ग. अब जरा इस्लाम का हाल देखें. पूरी दुनिया में आज पचास से अधिक इस्लामिक देश हैं. क्या किसी एक ने भी कोई बड़ा वैज्ञानिक, शोधकर्ता या व्यवसायी पैदा किया? आज तक केवल एक मुस्लिम वैज्ञानिक हुआ है जिसका नाम यहाँ लिया जा सकता है- पाकिस्तान के नोबल पुरस्कार विजेता डॉ अब्दुस सलाम. परन्तु उन्हें भी पाकिस्तान से काफ़िर कह कर बाहर खदेड़ दिया गया क्योंकि वो एक कादियानी थे. आज कोई भी ज़ाकिर नाइक कभी अब्दुस सलाम का नाम भी नहीं लेगा भले ही वह इस्लाम को विज्ञान का आधार बताता रहे! जब अब्दुस सलाम मरे तो उनकी कब्र पर “पहला मुस्लिम नोबेल पुरस्कार विजेता” लिखा गया. पर मुल्लाईयत के दबाव में पाकिस्तानी सरकार ने “मुस्लिम” शब्द हटा दिया. अब वहाँ “पहला नोबेल पुरस्कार विजेता” लिखा है!

    अब हिंदुओं से इसकी तुलना कीजिये. बहुत कमियों के बाद भी आज वो हर जगह पर अच्छे स्थान और पदों पर होते हैं. मानव सभ्यता के आरम्भ से इस संस्कृति ने एक से बढ़कर एक हीरे मानवता को दिए हैं और आज भी दे रही है. इसका एकमात्र कारण यहाँ की सभ्यता का आधार वैज्ञानिक होना है. यह प्रकट है कि जहाँ स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान अपने ही बोझ से टूटा जा रहा है वहीँ भारत उसकी तुलना में बहुत आगे है बावजूद इसके कि यहाँ के धूर्त राजनेता केवल अपना स्वार्थ साधते हुए अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति को ही राजनीति समझते हैं.

    हम उन सबसे, जिन्हें गैर मुस्लिमों खासकर हिंदुओं से नफरत करना ही सिखाया गया है, कहेंगे कि एक बार ठन्डे दिमाग से इस पर विचार करें. अग्निवीर पर वेदों से सम्बंधित लेख पढ़ें. सबसे आवश्यक बात यह जान लें कि वे बाहर किसी देश से आये लुटेरों की संतान नहीं हैं. वे तो सदा से भारत देश में रहने वाले अपने हिंदू पूर्वजों का ही खून हैं. वेद किसी हिंदू की जागीर नहीं, तुम्हारे भी हैं क्योंकि तुम्हारे पूर्वज इन्ही वेदों का पाठ करके तृप्त होते थे. अब अपने ही खून के भाइयों से झगडा बंद करो और वापस अपने घर अर्थात वैदिक धर्म में आ जाओ, आपका स्वागत होगा.


    By Vijay - 9/28/2017 3:38:23 AM



  • ye vebkuf hai kya ya khagol ka gyan nahi hai... ye la line padne se pahle india ka itihas padhe... अरब 7वीं और 8वीं सदी में हिंदुस्तान आये थे। उस समय भारत में अंधविश्वास का वर्चस्व था। ज़्यादातर हिंदुस्तानी प्रकृति की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि सितारों से लेकर ग्रहों तक, नदी और पेड़ तक प्रकृति में दिव्य हैं।
    By vikas - 9/5/2017 8:48:25 AM



  • Jay jay shree RAM
    By Dilip hindu - 8/29/2017 5:16:09 AM



  • so.islam hi ek dharm hai jo logo.ko sacchi aor sahi rah dikhata hai.aap sab samjadar ho..
    By sk nasir - 8/25/2017 7:22:15 AM



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