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Hindi Section (03 Jul 2018 NewAgeIslam.Com)


Kashmir Is Too Diverse, Too Multicultural A Land To Turn Into A Radical Islamist State कश्मीर एक बहुत ही विविध और बहु सांस्कृतिक राज्य है और आसानी से एक कट्टरपंथी इस्लामी राज्य में बदल सकता है

 

 

 

गुलाम रसूल देहलवी, न्यू एज इस्लाम

9 जून 2018

रमजान संघर्ष विराम के दौरान सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए कश्मीर के अपने दो दिवसीय दौरे पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर का "चेहरा और भाग्य" दोनों बदल देगी।

इस संदर्भ में इस बात पर चर्चा जरूरी है कि राजनाथ सिंह का कश्मीर घाटी का यह दौरा जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक उथल-पुथल का एक महत्वपूर्ण कारण साबित होगा। विशेष रूप से रमजान के दौरान, गृह मंत्री के युद्धविराम की घोषणा के विस्तार के बाद उनकी यात्रा बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। उनकी जम्मू-कश्मीर की यह दो दिवसीय यात्रा कथित तौर पर रमजान के महीने के दौरान 16 मई को गृह मंत्री की ओर से घोषित सशर्त संघर्ष विराम पर केंद्रित था।

यहां यह उल्लेख करना दिलचस्प है कि राजनाथ सिंह ने हाल ही में इस बात को स्वीकार किया था कि सरकार ने सुरक्षा बलों के हाथों को बाँधा नहीं है। टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने कहा था कि, "यह कोई संघर्ष विराम नहीं है रमजान के मद्देनजर ऑपरेशन कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है"। उन्होंने इसे संघर्ष विराम कहना पसंद नहीं किया बल्कि उसे 'आपरेशन छुट्टी' करार दिया। इसके लिए तकनीकी शब्द एनआईसी ओ (Non-Initiation of Combat Operations) है। इसलिए, इसका स्पष्ट रूप से मतलब था कि अगर घाटी में उग्रवादियों की ओर से हमले शुरू होते हैं तो यह संचालन फिर से शुरू हो जाएगा।

अब यह पवित्र महीना समाप्त होने को है। और इस साल कश्मीर के लिए रमजान अपेक्षाकृत सुलह, अहिंसा और युद्ध जैसे उपहारों से भरा था, जिसे रमजान की शुरुआत में केंद्र सरकार की ओर शुरू किया गया था। हालांकि संघर्ष विराम में अधिक विस्तार किया जाए या विस्तार न किया जाए यह निर्भर करता है संघर्ष विराम के बाद स्थिति पर जो विवरण राजनाथ सिंह सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से प्राप्त करेंगे उन पर होगा, और घाटी में घावों को भरने और विद्रोह की वजह से उत्पन्न होने वाले मतभेद और अराजकता के माहौल को कम करने के लिए इस तरह के सकारात्मक संभावना का स्वागत है। अगरचे रमजान में युद्ध बंद करने से जम्मू-कश्मीर के परेशान हाल लोगों को काफी राहत मिली है, लेकिन उग्रवादी और विद्रोही तत्व अभी भी हिंसा के रास्ते पर जमे हुए हुए हैं और शांति के इस प्रक्रिया को तोड़ने फोड़ने के अथक प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आशावादी होकर यह ट्वीट किया है कि उग्रवादियों को जल्द ही पता चल जाएगा कि '' उनकी गतिविधियां व्यर्थ हैं '' और दोनों महानिदेशक एम ओ की ओर से सीमा पर संघर्ष विराम के निर्णय को बनाए रखे जाने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि। "इससे आस पास में रहने वालों को काफी राहत मिली है। हमारी सीमाओं पर शांति एक बड़े पैमाने पर सुलह के लिए पहला और अनिवार्य कदम है और मुझे विश्वास है कि यह लगातार जारी रहेगा ......"

इसमें कोई संदेह नहीं है कि रमजान के दौरान एक एकतरफा संघर्ष विराम के केंद्र के घोषणा ने आमतौर पर कश्मीरियों को और विशेष रूप से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए एक वातावरण प्रदान किया है। इसलिए, घाटी में अक्सर शांतिप्रिय युवा कड़ाई से इसमें विस्तार का समर्थन कर रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने बजा तौर पर यह संकेत दिया है कि "यह बच्चे जीवित रहना चाहते हैं, खेलना चाहते हैं, और मुस्कुराना चाहते हैं ..... जैसे इस देश के अन्य भागों में लोग रहते हैं"।

राजनाथ सिंह के कश्मीर के इस दौरे से ऐसी अटकलें एक नए सिरे से शुरू हो चुकी हैं कि केंद्र सरकार रमजान संघर्ष विराम का विस्तार कर सकता है। लेकिन संघर्ष विराम ने कई कश्मीरी बुद्धिजीवियों को ऐसे सवालों में उलझा दिया है कि: क्या कश्मीर की स्वतंत्रता हिंसा को दावत देना है? क्यों कश्मीर समस्या कभी हल नहीं होने दिया गया ताकि वे हिंसा से निकलकर राहत की सांस ले सके? जो लोग घाटी की स्थिति और वातावरण में पैदा होने वाले उतार-चढ़ाव की समीक्षा करते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं वह अब तेजी के साथ बढ़ने वाली हिंसा की विचारधारा से काफी चिंतित हैं।

श्रीनगर में रहने वाले एक युवा कश्मीरी कलमकार और कार्यकर्ता एम एच ए सिकंदर ने महत्वपूर्ण जानकारी पर आधारित एक शानदार लेख लिखा जिसमें उन्होंने यह सवाल उठाया है कि क्या हिंसा ही अंतिम रास्ता है? वो न्यु एज इस्लाम पर लिखते हैं: "पिछले एक दशक के दौरान कश्मीर में विरोध के एक आलाकार के तौर पर बंदूक के उपयोग की परंपरा को एक नई प्रवृत्ति मिली है ...... मौत और हिंसा का यह शैतानी श्रृंखला टूटना आवश्यक है। "

क्या हिंसा ही एक अंतिम रास्ता है?

http://www.newageislam.com/urdu-section/mushtaq-ul-haq-ahmad-sikander,-new-age-islam/is-violence-the-only-way-out--کیا-تشدد-ہی-آخری-راستہ-ہے؟/d/115469

श्रीनगर के इस कलमकार और कार्यकर्ता ने एक ऐतिहासिक अध्ययन पेश किया है कि घाटी में कैसे इस्लामी राज्य के एक गलत धारणा के साथ हिंसा को बढ़ावा मिला है। वे आगे लिखते हैं: "अब इस्लामी राज्य के सिद्धांत कोई नया नहीं रहा। 1990 में अक्सर पाकिस्तान समर्थक आतंकवादी संगठनों ने पाकिस्तान के साथ कश्मीर के विलय के बाद अपना उद्देश्य इस्लामी राज्य स्थापित करना प्रदर्शित कर दिया है। ..... आइएस आइएस और अलकायदा जैसे इस्लाम परस्त उग्रवादी आंदोलनों के उदय के बाद कश्मीर में इस्लामी राज्य स्थापित करने की बात एक बार फिर केंद्रीय स्थिति धारण कर चुकी है। और इसका प्रतिनिधित्व अंसार गज्वतुल हिंद नामक आंदोलन कर रही है जिसका नेतृत्व जाकिर मूसा कर रहा है। "

अंसार गज्वतुल हिंद की उपस्थिति ने कई उग्रवादियों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कश्मीर एक क्षेत्रीय युद्ध या एक धार्मिक युद्ध लड़ रहा है? कश्मीर के सभी विद्रोही दल अब इस पत्र पर विभाजित हो चुके हैं। आम कश्मीरियों के पास अब दो ही रास्ते हैं: या तो वह स्वयंभू 'इस्लामी राज्य' के इस आंदोलन को अपना समर्थन दें या युद्ध विराम की घोषणा के बारे में सेना को झूठ बोलने के लिए जिम्मेदार ठहराएं। हम बतौर एक आबादी इस संघर्ष के बारे में अब काफी उलझन का शिकार हैं कि इन सबके पीछे कौन है।

दूसरी ओर पाकिस्तान एस ए एस जिलानी जैसे नेताओं को बढ़ावा दे रहा है जो 'स्वतंत्रता बराए इस्लाम' के लक्ष्य को प्राप्त करने का नारा लगाते हैं। कश्मीर में उनके धार्मिक और राजनीतिक नेताओं को यह बात समझ नहीं आती कि सदियों से मुसलमान सभी धार्मिक समुदायों के साथ शांति से रहते और विकास करते आए हैं। लेकिन इस्लामी शासन (निज़ाम ए मुस्तफा) के नाम पर पाकिस्तान अपनी सीमाओं में वृद्धि करना और दोनों तरफ अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, चाहे वह तालिबान पैदा करना हो चाहे कश्मीर में घुसपैठ करना हो। अपरिहार्य रूप में अपनी सीमाओं पर पाकिस्तान से राहत प्राप्त उग्रवादी और अतिवादी इस्लामी राज्य का प्रचार करने वाले दुनिया भर में इस्लामोफोबिया की आग को हवा दे रहे हैं।

क्या वह स्वतंत्रता है जो कश्मीरी मुसलमानों का एक वर्ग हिंसा, बंदूक और पत्थर से प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है? और स्वयंभू इस्लामी राज्य की इस विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं का सहारा ले रहे हैं तो आज भी 1947 में पाकिस्तान स्थानांतरित होने वालों को प्रवासी?

यह राज्य का एक बहुत दुखद स्थिति है जहां जो कोई इस्लाम के बारे में बात करने का दावा करता है और उसके हाथ में बंदूक या पत्थर है वह '' अमीरुल मोमिनीन '' है। सिविल सोसाइटी को तैयार होने की जरूरत है क्योंकि अब कश्मीरी मुसलमानों को इस बात का कोई अनुमान नहीं है कि वे बंदूक और हिंसा के इस हास्यास्पद संस्कृति में अपना क्या गनवां रहे हैं।

आज घाटी के अंदर समाज के एक बड़े वर्ग में समझ का पूरा अभाव हो गया है यहाँ तक कि उनकी भावनाएं भी कुछ इस तरह भटक चुकी हैं कि एक भावनात्मक व्यक्ति भी इस प्रक्रिया को अमानवीय और कश्मीरियत विरोधी करार देगा। अब कश्मीर की स्थिति यह है कि यहां भोले युवाओं के मन में नफरत और दुश्मनी पर आधारित कट्टर धार्मिक दृष्टिकोण घर कर चुका है।

इससे भी अधिक कष्टप्रद स्थिति यह है कि घाटी में पाक द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे घृणा और हिंसा ने कश्मीरी समाज के भीतर एक यह आदिवासी दृष्टिकोण पैदा कर दिया है लोकतांत्रिक व्यवस्था उनके लिए उपयुक्त नहीं है और उन्हें सभ्य होने के लिए उग्रवाद आवश्यक है। यह कोई आरोप नहीं बल्कि एक भविष्यवाणी जो दिन ब दिन सच साबित होती जा रही है। पिछले तीस वर्षों में उनकी योजनाएं कभी सामने नहीं आई थीं और उनकी पूर्ति के लिए कभी राहें हमवार नहीं की गई थीं।

लेकिन अब चूंकि युद्ध विराम की स्थिति में शांति और सुलह की संभावना उत्पन्न होने लगे हैं जिनकी उम्मीद एक लंबे समय से की जा रही थी, तो उसके खिलाफ कुछ तो होना ही था। अब वह समय आ गया है कि मुख्यधारा कश्मीरी जनता अपनी खोई परंपरा कश्मीरियत की प्राप्ती पर ध्यान केंद्रित करें जो कि सूफियों की इस धरती पर ऋषियों और सूफियों की परंपरा का सबसे बड़ा उपहार है। दरअसल कश्मीर काफी विविध और बहुसांस्कृतिक राज्य है और आसानी से अतिवादी इस्लामी राज्य में बदल सकता है। इसलिए, ऐसा मालूम होता है कि घाटी में एक लंबी और कठिन राजनीतिक संकट के बाद गृहमंत्री के इस दौरे से हालात सामान्य हो जाएंगे।

URL for English article: http://www.newageislam.com/radical-islamism-and-jihad/ghulam-rasool-dehlvi,-new-age-islam/kashmir-is-too-diverse,-too-multicultural-a-land-to-turn-into-a-radical-islamist-state/d/115497

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/ghulam-rasool-dehlvi,-new-age-islam/kashmir-is-too-diverse,-too-multicultural-a-land-to-turn-into-a-radical-islamist-state--کشمیر-ایک-کافی-متنوع-اور-کثیر-ثقافتی-ریاست-ہے-اور-آسانی-کے-ساتھ-انتہا-پسند-اسلامی-ریاست-میں-تبدیل-ہو-سکتا-ہے/d/115547

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/ghulam-rasool-dehlvi,-new-age-islam/kashmir-is-too-diverse,-too-multicultural-a-land-to-turn-into-a-radical-islamist-state--कश्मीर-एक-बहुत-ही-विविध-और-बहु-सांस्कृतिक-राज्य-है-और-आसानी-से-एक-कट्टरपंथी-इस्लामी-राज्य-में-बदल-सकता-है/d/115709

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