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Hindi Section (01 Oct 2018 NewAgeIslam.Com)


Loyalists of Husain (RA): Dutt Husaini Brahmins हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के वफादार: दत्त हुसैनी ब्राह्मण

 

 

सुहैल अरशद, न्यू एज इस्लाम

कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैत की शहादत इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना और खूनी अध्याय हैl इस युद्ध के इतिहास से हर मुसलमान कम या अधिक परिचित हैl मगर कर्बला के युद्ध का एक अध्याय ऐसा भी है जिससे बहुत कम मुसलमान परिचित हैं क्योंकि इस्लामी इतिहास में इसका उल्लेख नहीं के बराबर हुआ है और कर्बला का इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों ने इस अध्याय को महत्वहीन समझ कर अनदेखा किया हैl

दत्त हुसैनी ब्राह्मण, हिन्दू ब्राह्मणों का एक ऐसा वर्ग है जिसने हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के साथ अपनी मुहब्बत और अकीदत का प्रमाण कर्बला के मैदान में दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद यज़ीद के विरुद्ध अभियानों में भाग लिया और यज़ीदियों को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया मगर उनकी बलिदानों को इस काबिल नहीं समझा गया कि उन्हें इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएl एक दत्त हुसैनी ब्राह्मण रेहाब दत्त ने अपने सात बेटों को कर्बला में कुर्बान कर दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद मुख्तार सकफ़ी के साथ यज़ीदियों के खात्मे में भाग लियाl

रेहाब सिंह दत्त भारत के उत्तरी क्षेत्र, (पंजाब हरियाणा) के जाट ब्राह्मण थे और अरब में व्यापार के उद्देश्य से रहते थेl उन जाट ब्राह्मणों को मोहियाल कहा जाता हैl यह लोग काफी पढ़े लिखे होते थे और भारत में राजाओं के सहायक या राज गुरु की हैसियत से सेवा देते थेl जाट ब्राह्मण इस्लाम से पहले भी और हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय भी अच्छी संख्या में अरब में मौजूद थेl वह अपनी बहादुरी और इल्म की वजह से अरब में सम्मान की निगाह से देखे जाते थेl रेहाब दत्त निःसंतान थे एक दिन वह हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु की सेवा में हाज़िर हुए और उनसे अनुरोध किया कि उनके लिए अल्लाह से दुआ फरमा दें कि उन्हें एक बेटा अता हो जाएl हज़रत हुसैन ने रेहाब दत्त से फरमाया कि उसकी किस्मत में अल्लाह ने बेटा नहीं लिखा हैl इस पर वह दुखी हो कर रोने लगा और बेहोश हो गयाl हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु को उस पर रहम आ गया और उन्होंने रेहाब दत्त को तसल्ली देते हुए फरमाया कि जाओ तुम्हें एक बेटा होगाl इस पर वहाँ मौजूद एक बुज़ुर्ग ने आपत्ति जताते हुए हुसैन से कहा कि आप अल्लाह की मर्ज़ी में दखल दे रहे हैंl उनके आपत्ति पर हज़रत हुसैन ने रेहाब से कहा कि तुम्हे एक और बेटा होगाl उस बुज़ुर्ग ने फिर एतेराज़ किया कि आप अल्लाह की मर्जी में दखल दे रहे हैं और इस प्रकार उन्होंने रेहाब दत्त को सात बेटों की बशारत दीl अल्लाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे की बात को कैसे रद्द कर सकता थाl रेहाब को एक के बाद एक सात बेटे हुए और वह हज़रत हुसैन के अकीदत मंद हो गएl

कर्बला के जंग के समय रेहाब के सातों बेटे जवान थेl जब रेहाब को पता चला कि हज़रत हुसैन कुफे के लिए अपने घर वालों के साथ रवाना हो चुके हैं तो वह भी अपने सातों बेटों और अपने कुछ साथियों के साथ कुफे के लिए रवाना हो गएl रिवायतों के अनुसार जब वह कर्बला पहुंचे तो उस समय हज़रत हुसैन शहीद किए जा चुके थेl एक दूसरी रिवायत के अनुसार रेहाब के सातों बेटे कर्बला में शहीद हुएl हुसैनी ब्राह्मणों की रिवायतों के अनुसार शहादत के बाद रेहाब दत्त हज़रत ज़ैनब रज़ीअल्लाहु अन्हा से मिला और उनसे अपनी दास्तान बयान की और अपने बेटों की शहादत के बारे में उन्हें बतायाl हज़रत ज़ैनब रज़ीअल्लाहु अन्हा इस बात को सुन कर आबदीदह हो गईं और रेहाब दत्त से फरमाया कि आज से तुम हुसैनी ब्राह्मण कहलाओगेl

रेहाब दत्त हज़रत हुसैन की शहादत से दुखी हो चुका थाl उसने हज़रत हुसैन की मुहब्बत में अपने सातों बेटे उन पर कुर्बान कर दिए थे जो उन्हीं की दुआओं के तुफैल में उसे मिले थेl हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु की शहादत के बाद उसने मुख्तार सकफ़ी के साथ अपने दुसरे हुसैनी ब्राह्मणों के साथ यज़ीदियों के खिलाफ मुहिम में हिस्सा लिया और उन्हें अंजाम तक पहुंचायाl इसके बाद रेहाब दत्त भारत वापस हो गया मगर सैंकड़ों हुसैनी ब्राह्मण एक दुसरे सरदार भौरिया दत्त के साथ ईराक में ही रह गए और वहीँ बस गएl ईराक में उस समय लगभग चौदह सौ हुसैनी ब्राह्मण थेl ईराक में हुसैनी ब्राह्मणों के लिए एक क्षेत्र विशेष कर दिया था जिसको दायरा अल हिन्द कहते थेl

भारत आने के बाद हुसैनी ब्राह्मण राजस्थान और सिंध के इलाकों में बस गए और खुद को उसी नाम से पुकारने लगेl आज हुसैनी ब्राह्मण खानदान पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बसे हुए हैं और हज़रत हुसैन अलैहिस्सलाम से अपने लगाव पर गर्व करते हैंl वह मुहर्रम के महीने में हज़रत हुसैन और अहले बैत की शहादत का मातम करते हैं और उनकी औरतें क्षेत्रीय भाषा में हज़रत हुसैन और अहले बैत की शहादत पर दर्द भरे गीत गाती हैंl

रेहाब दत्त को हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु ने सुलतान का ख़िताब अता किया थाl आज भी रेहाब दत्त के संबंध में एक कहावत राजस्थान के इलाकों में प्रसिद्ध हैं:

वाह दत्त सुलतान

हिन्दू का धर्म मुसलमान का ईमान

आधा हिन्दू आधा मुसलमान

भारत में आज भी हुसैनी ब्राह्मणों की एक बड़ी संख्या हैl और वह हर साल मुहर्रम के महीने में कर्बला के शहीदों को याद करते हैंl 2013 में हुसैनी ब्राह्मणों की पहली कान्फ्रेंस हरियाणा के पानीपत में आयोजित हुई जिसमें पंजाब के पूर्व गवर्नर जो एक हुसैनी ब्राह्मण में शरीक हुएl उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार व उपन्यासकार डाक्टर कश्मीरी लाल ज़ाकिर जो एक हुसैनी ब्राह्मण हैं वह भी शरीक हुएl अभिनेता सुनील दत्त का खानदान भी हुसैनी ब्राह्मण हैl अभिनेत्री नर्गिस के पिता मोहन बाबू भी हुसैनी ब्राह्मण थेl सुनील दत्त हुसैनी ब्राह्मणों की नस्ल से अपने जुड़े होने पर गर्व करते थे और कहते थे कि हमारे दादा ने हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के लिए सर कटाया थाl

मगर हुसैनी ब्राह्मणों के संबंध में इस्लामी इतहास के पुस्तकों में बहुत कम ज़िक्र आया हैl हुसैनी ब्राह्मणों की जुबानी रिवायतों में उनकी कुर्बानियों का ज़िक्र मिलता है और हुसैनी ब्राह्मण आज भी अपने दादा परदादा की कुर्बानियों और हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु से अपनी मुहब्बत और लगाव का ज़िक्र गर्व से करते हैंl

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/s-arshad,-new-age-islam/loyalists-of-husain-(ra)--dutt-husaini-brahmins--جاں-نثارانِ-حسین-رضی-اللہ-عنہ---دت-حسینی-برہمن/d/116509

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