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Hindi Section (11 Sep 2019 NewAgeIslam.Com)



War Mongering is Not Jihad—Concluding Part— Sacredness of A Human Life cannot be Compromised बेगुनाह इंसानों का खून किसी भी स्थिति में जायज नहीं



मिसबाहुल हुदा क़ादरी, न्यू एज इस्लाम

३ अगस्त २०१९

जिहाद के नाम पर आतंकवाद का यह रुझान जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित है इसके कारणों का विश्लेषण करने से यह बात भी मालुम होती है कि इस नाम निहाद जिहाद का शिकार होने वाले युवा अक्सर एक ख़ास प्रकार की मानसिकता का शिकार होते हैं और वह मानसिकता है कि हमारे गुनाहों का कफ्फारा जिहाद से ही अदा हो सकता है इसलिए कि जिहाद ही अल्लाह की नज़र में एक अत्यंत पसंदीदा और मुक़द्दस कार्य हैl और उनकी इस बौद्धिक आवारगी में सहायक साबित होते हैं जिहाद फी सबिलिल्लाह के हवाले से एक विशेष संदर्भ वाली कुरआन की वह आयतें जिन्हें यह आतंकवादी सिद्धांत निर्माता तोड़ मरोड़ कर उनके सामने पेश करते हैंl ऐसा करने वाले याद रखें कि वह कुरआन की मानवी तहरीफ़ के मुर्तकिब हो रहे हैं जिसके लिए वह अल्लाह की बारगाह में जिम्मेदार ठहराए जाएंगेl अगर वह कौम मुस्लिम के सच्चे खैर ख्वाह हैं तो उन्हें ऐसे कामों से बाज़ आ जाना चाहिए जो वैश्विक स्तर पर इस्लाम और मुसलमानों के लिए अपमान का कारण बन रहे हैं और मुस्लिम युवकों को यह बताना चाहिए कि गुनाहों से निजात हासिल करने का सीधा रास्ता सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह में तौबा करना और रुजूअ लाना हैl

लेकिन वह ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकते कि लोगों के सामने दीन की सही तस्वीर पेश कर दें कि इससे उनके हितों पर ज़द लगने लगे गी और जंग व जिदाल और क़त्ल व किताल पर आधारित उनका पूरा कारोबार ख़त्म हो जाएगाl बल्कि वह मस्जिदों को अपनी शर अन्गेज़ियों का निशाना बनाएंगे और कहेंगे कि यह जिहाद है, वह नमाज़ की हालत में मुसलमानों का खून बहाएंगे और कहेंगे कि हम दीन का परचम बुलंद कर रहे हैंl वह बेगुनाहों का खून नाहक बहाएंगे और कहेंगे कि हम दीन का एक अहम फर्ज़ अदा कर रहे हैंl

वह यह कभी नहीं बताएंगे कि इबादतगाहों को इतनी शरअन्गेज़ियों का निशाना बनाना कि लोग वहाँ जाने से डर जाएं सख्त तरीन अत्याचार है और इसका प्रतिबद्ध करने वालों के लिए दुनिया की ज़िल्लत व रुसवाई और आख़िरत का दर्दनाक अज़ाब हैl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن مَّنَعَ مَسَاجِدَ اللَّهِ أَن يُذْكَرَ فِيهَا اسْمُهُ وَسَعَىٰ فِي خَرَابِهَا ۚ أُولَٰئِكَ مَا كَانَ لَهُمْ أَن يَدْخُلُوهَا إِلَّا خَائِفِينَ ۚ لَهُمْ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ (2:114)

अनुवाद: और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खुदा की मसजिदों में उसका नाम लिए जाने से (लोगों को) रोके और उनकी बरबादी के दर पे हो, ऐसों ही को उसमें जाना मुनासिब नहीं मगर सहमे हुए ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया में रूसवाई है और ऐसे ही लोगों के लिए आख़ेरत में बड़ा भारी अज़ाब हैl (२:११४)

अपने आतंकवादी कार्यवाहियों से मस्जिदों को वीरान करने वालों सुन लो! तुम्हारा ना तो अल्लाह पर ईमान है और ना ही यौमे आख़िरत पर यकीन, तुम्हे अल्लाह के अज़ाब से पनाह तलब करना चाहिए और अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिएl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

إِنَّمَا يَعْمُرُ مَسَاجِدَ اللَّهِ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَقَامَ الصَّلَاةَ وَآتَى الزَّكَاةَ وَلَمْ يَخْشَ إِلَّا اللَّهَ ۖ فَعَسَىٰ أُولَٰئِكَ أَن يَكُونُوا مِنَ الْمُهْتَدِينَ (9:18)

अनुवाद: ख़ुदा की मस्जिदों को बस सिर्फ वहीं शख़्स (जाकर) आबाद कर सकता है जो ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान लाए और नमाज़ पढ़ा करे और ज़कात देता रहे और ख़ुदा के सिवा (और) किसी से न डरो तो अनक़रीब यही लोग हिदायत याफ्ता लोगों मे से हो जाऎंगेl (९:१८)

अपनी आतंकवादी कार्यवाहियों से मुसलमानों को फितना व फसाद में मुब्तिला करने वालों और उन्हें दर्दनाक तकलीफों से दो चार करने वालों सुन लो! तुम्हें बिना देर किये अपने कर्मों से तौबा करना और शर्मिंदा होना चहिये, वरना बहोत जल्द जहन्नम का इंधन बना दिए जाओ गेl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

إِنَّ الَّذِينَ فَتَنُوا الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ الْحَرِيقِ (85:10)

अनुवाद: बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगाl (८५:१०)

अपनी आतंकवादी कार्यवाहियों से मोमिनीन की जानों को तल्फ़ करने वालों सुन लो! तुम्हारा ठिकाना जहन्नम है, तुम्हारा सामना अल्लाह के गेज़ व गज़ब से होने वाला है और क़यामत तक तुम्हारे उपर अल्लाह की लानत हैl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

وَمَن يَقْتُلْ مُؤْمِنًا مُّتَعَمِّدًا فَجَزَاؤُهُ جَهَنَّمُ خَالِدًا فِيهَا وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِ وَلَعَنَهُ وَأَعَدَّ لَهُ عَذَابًا عَظِيمًا (4:93)

अनुवाद: और जो शख्स किसी मोमिन को जानबूझ के मार डाले (ग़ुलाम की आज़ादी वगैरह उसका कुफ्फ़ारा नहीं बल्कि) उसकी सज़ा दोज़क है और वह उसमें हमेशा रहेगा उसपर ख़ुदा ने (अपना) ग़ज़ब ढाया है और उसपर लानत की है और उसके लिए बड़ा सख्त अज़ाब तैयार कर रखा हैl (४:९३)

आतंकवादी कार्यवाहियों में लिप्त होने वालों सुन लो! तुम अपनी इन अमानवीय कार्यवाहियों और बेगुनाहों के क़त्ल को जो चाहो नाम दो लेकिन तै है कि तुम अल्लाह के अज़ाब से निजात नहीं पा सकतेl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

وَالَّذِينَ لَا يَدْعُونَ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ وَلَا يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَا يَزْنُونَ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ يَلْقَ أَثَامًا (25:68)

अनुवाद: और वह लोग जो ख़ुदा के साथ दूसरे माबूदों की परसतिश नही करते और जिस जान के मारने को ख़ुदा ने हराम कर दिया है उसे नाहक़ क़त्ल नहीं करते और न ज़िना करते हैं और जो शख्स ऐसा करेगा वह आप अपने गुनाह की सज़ा भुगतेगाl (२५:६८)

और

قُلْ تَعَالَوْا أَتْلُ مَا حَرَّمَ رَبُّكُمْ عَلَيْكُمْ ۖ أَلَّا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا ۖ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا ۖ وَلَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُم مِّنْ إِمْلَاقٍ ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكُمْ وَإِيَّاهُمْ ۖ وَلَا تَقْرَبُوا الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ ۖ وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ (6:151)

अनुवाद: (ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि (बेबस) आओ जो चीज़ें ख़ुदा ने तुम पर हराम की हैं वह मैं तुम्हें पढ़ कर सुनाऊँ (वह) यह कि किसी चीज़ को ख़ुदा का शरीक़ न बनाओ और माँ बाप के साथ नेक सुलूक़ करो और मुफ़लिसी के ख़ौफ से अपनी औलाद को मार न डालना (क्योंकि) उनको और तुमको रिज़क देने वाले तो हम हैं और बदकारियों के क़रीब भी न जाओ ख्वाह (चाहे) वह ज़ाहिर हो या पोशीदा और किसी जान वाले को जिस के क़त्ल को ख़ुदा ने हराम किया है न मार डालना मगर (किसी) हक़ के ऐवज़ में वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हें हुक्म दिया है ताकि तुम लोग समझो और यतीम के माल के करीब भी न जाओl (६:१५१)

रिवायतों से यह साबित है कि वास्तविक जिहाद फी सबिलिल्लाह जो अल्लाह के आदेश से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सोहबत में होता था उसमें भी शामिल होने वाले मुजाहेदीन ए इस्लाम को ज़ख्म की सख्तियों से निजात हासिल करने के लिए खुद कुशी की कोई इजाज़त नहीं थी बल्कि एक मौके पर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऐसा करने वाले को जहन्नमी भी कहाl इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस्लाम में आत्महत्या कितना बुरा कार्य है और किसी भी हिले और बहाने के तहत इस्लाम कतई इसकी अनुमति नहीं देता हैl

अल्लाह पाक का इरशाद है:

وَأَنفِقُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَا تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ إِلَى التَّهْلُكَةِ ۛ وَأَحْسِنُوا ۛ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ (2:195)

अनुवाद: और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता हैl (२:१९५)

और

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا (29) وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا (4:30)

अनुवाद: और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान हैl (४:३०)

इसलिए, जो बेगुनाह इंसानों का खून नाहक बहाने के लिए तरह तरह के तरीके बयान करते हैं और आत्मघाती हमलों की वकालत करते हैं उन्हें होश के नाख़ून लेना चाहिए और यह याद रखना चाहिए कि इस प्रकार की गतिविधियाँ अल्लाह के निश्चित किये हुए सीमाओं के खिलाफ हैं और जो अल्लाह के सीमाओं की अवहेलना करते हैं उन्हें सज़ा देना अल्लाह के लिए कोई कठिन कार्य नहीं हैl

(و اللہ اعلم بالصواب—وما توفیقی الا باللہ)

URL for Part-1: http://www.newageislam.com/urdu-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad--part-1--جہاد-کے-نام-پر-دہشت-گردی-کا-شکار-نہ-بنیں-مسلم-نوجوان/d/119593

URL for Part-2: http://www.newageislam.com/urdu-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad--part-2,-in-islam-paradiseis-not-awarded-on-killing-innocent-human-beings--جنت-دہشت-گردی-مچانے-پر-نہیں-بلکہ-صدق-دل-سے-توبہ-کرنے-پر-عطا-کی-جاتی-ہے/d/119615

URL for Part-3:  http://www.newageislam.com/urdu-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad—concluding-part,-sacredness-of-a-human-life-cannot-be-compromised-بے-گناہ-انسانوں-کا-خون-کسی-بھی-صورت-میں-جائز-نہیں/d/119667

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad—concluding-part,-sacredness-of-a-human-life-cannot-be-compromised--बेगुनाह-इंसानों-का-खून-किसी-भी-स्थिति-में-जायज-नहीं/d/119707

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