New Age Islam
Tue Jun 09 2026, 11:35 AM

Hindi Section ( 21 May 2013, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Pakistan: New Governments, Prolonged Problems, Grave Concerns नई सरकारें, पुरानी समस्याएं और गहरी चिंताएं

 

मुजाहिद हुसैन, न्यु एज इस्लाम

20 मई, 2013

पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ और तहरीके इंसाफ आंशिक रूप से इस बात पर सहमत हैं कि उनकी केन्द्र और ख़ैबर पख्तूनख्वाह की सरकारें आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी उपाय करेंगीं और देश भर में फैले हुए आतंकवादियों और सांप्रदायिक ताकतों को बातचीत के माध्यम से आतंकवाद, उग्रवाद और सांप्रदायिकता से दूर रखने में कामयाबी हासिल कर लेंगी।

स्पष्ट रूप से ये एक समझ में आने वाला तर्क है कि चुनाव से पहले तालिबान ने ये पेशकश की थी कि अगर पाकिस्तान मुस्लिम लीग, जमीअत उलमाए इस्लाम और जमाते इस्लामी गारंटी प्रदान करें तो वो पाकिस्तान सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन ये बातचीत इस बुनियाद पर नहीं होगी कि पहले हमें निशस्त्रीकरण के लिए कहा जाए।

चुनाव के बाद मुस्लिम लीग नवाज़ केंद्र में सरकार बनाने के लिए आवश्यक सीटें हासिल कर चुकी है और बलूचिस्तान के अलावा खैबर पख्तूनख्वाह में भी उसके पास किसी सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के लिए सीटें हैं। तालिबान ने हालांकि तहरीके इंसाफ को उस वक्त ज़मानत के काबिल नहीं समझा था लेकिन ड्रोन हमलों के खिलाफ तहरीके इंसाफ के पक्ष और नाटो बलों के साथ अमेरिकी प्रशासन के बारे में इमरान खान के बेहद लचीले रुख के कारण उन्हें तालिबान की तरफ से किसी प्रकार के विरोध का सामना भी नहीं करना पड़ा। जमीअत उलमाए इस्लाम और जमाते इस्लामी खैबर पख्तूनख्वाह में तहरीके इंसाफ या मुस्लिम लीग नवाज़ किसी एक के साथ अंतिम गंठबंधन से परहेज़ नहीं करेंगी क्योंकि उन्हें इस सम्बंध में सूबे में ताक़त रखने वाले तालिबान के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।

केंद्र में जमाते इस्लामी के पास ऐसी कोई ताक़त नहीं कि मुस्लिम लीग नवाज़ को उसकी ज़रूरत पड़े लेकिन तहरीके इंसाफ केंद्र में मुस्लिम लीग नवाज़ के नेतृत्व को नज़र अंदाज नहीं करना चाहती। सबसे बड़ी चुनौती तहरीके इंसाफ के सामने है, क्योंकि खैबर पख्तूनख्वाह में सरकार बनाना हालांकि आसान होगा लेकिन बहुत उलझी हुई स्थिति में शासन चलाना मुश्किल होगा। जिसके बारे में अभी से तहरीके इंसाफ के पास कोई रणनीति नज़र नहीं आती। तहरीके इंसाफ के संभावित मुख्यमंत्री श्री परवेज़ ख़टक ने बीबीसी को इंटरव्यू देते हुए इस बात का संकेत दिया है कि उन्हें तालिबानाईज़ेशन से कोई ख़तरा नहीं है और न ही तालिबानाईज़ेशन उनकी नज़र में कोई समस्या है, जबकि उन्हें आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए बातचीत का सहारा लेना पड़ेगा।

देखना ये है कि तालिबान जो आतंक के प्रतीक हैं और आतंकवाद के बिना उनकी कोई रणनीति आगे नहीं बढ़ती, वो तहरीके इंसाफ और जमाते इस्लामी की गठबंधन सरकार के साथ किस तरह का ''सहयोग'' करते हैं। विपक्ष में या सरकार से बाहर होते हुए शायद इस तरह की ज़िम्मेदारियों के बोझ का एहसास नहीं होता लेकिन जब आप सरकार में हों तो न चाहते हुए भी ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ती है। मिसाल के तौर पर ड्रोन हमलों की दुश्मन तहरीके इंसाफ प्रांतीय शासक के रूप में क़बायली (आदिवासी) क्षेत्रों में ड्रोन हमले रुकवाने का जनादेश नहीं रखती और न ही केंद्र में संभावित मुस्लिम लीग सरकार से ऐसा महसूस होता है कि वो गंभीरता के साथ ड्रोन हमलों का विरोध करेगी या ऐसा कोई इंतेज़ाम कर पाएगी कि ड्रोन हमले बंद हो जाएं। ताज़ा सूचना ये है कि अमेरिका ड्रोन हमले और आदिवासी क्षेत्रों के लिए अपनी पूर्व नीति को जारी रखेगा। अगर अमेरिकी नीति और ड्रोन हमले जारी रहते हैं और केन्द्र से लेकर प्रभावित प्रांत तक तालिबान की समर्थक राजनीतिक पार्टियाँ सरकार में रहती हैं तो जो स्थिति होगी उसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।

सिर्फ एक स्थिति दिखाई देती है कि तहरीके इंसाफ, जमाते इस्लामी और तालिबान प्रवक्ता एहसानुल्लाह एहसान संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करके दुनिया को ये संदेश देंगे कि ड्रोन हमले इस्लामी दुनिया के खिलाफ आक्रामकता हैं जिन्हें तुरंत बंद होना चाहिए और हम उनकी निंदा करते हैं। दूसरी ओर नवाज़ शरीफ़ ये धारणा स्थापित करने में सफल हुए हैं कि वो एक वास्तविक लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हैं , जो बतौर प्रधानमंत्री पाकिस्तान को पेश समस्याओं का काफी हद तक निराकरण करेंगे। लेकिन मियां साहब और उनके साथियों का तत्काल ध्यान पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं के समाधान की ओर है जो अनिवार्य रूप से एक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य आवश्यकता है, लेकिन इसमें भी कोई दुविधा नहीं कि पाकिस्तान को दरपेश आर्थिक समस्याओं का सीधा सम्बंध आतंकवाद और शांति के साथ है। ये सम्भव नहीं है कि शांति की स्थिति बेहतर बनाए बिना पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता प्रदान की जा सके।

पंजाब में मुस्लिम लीग नवाज़ की पूर्व सरकार ने आतंकवाद और साम्प्रदायिकता के गंभीर मुद्दे को कुछ हद तक नज़र अंदाज़ किया है और आतंकवादियों की केंद्रीय सरकार की तरफ ध्यान आकर्षित होने के कारण इसको अधिक समस्याओं का सामना करना नहीं पड़ा। यहां तक ​​कि एक मौके पर मुख्यमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ के मुंह से निकल गया कि तालिबान और हमारी नीति में कोई अंतर नहीं है और उन्होंने तालिबान से ये भी मांग की कि वो पंजाब को अपनी कार्रवाईयों से सुरक्षित रखें। इसके अलावा सभी लोग जानते हैं कि सांप्रदायिकता के लिए सबसे अधिक कार्यबल प्रदान करने वाला पंजाब है और राज्य की पूर्व सरकार को खुले तौर पर सांप्रदायिक और तालिबान की साथी लश्करे झंगवी के प्रमुख मलिक  इस्हाक़ को माली मदद पेश की और उसकी अदालतों से रिहाई के मामलों में सहायता की।

पिछले चुनावों में पंजाब में सिपाहे सहाबा और लश्करे झंगवी के सशस्त्र गुटों ने मुस्लिम लीग नवाज़ के उम्मीदवारों को सफल बनाने के लिए अपनी सेवाएं प्रदान की थीं और इस बार प्रतिबंधित सिपाहे सहाबा के कई पूर्व नेता मुस्लिम लीग नवाज़ के मंच से चुने गए हैं। इस तरह की एक स्पष्ट मिसाल गुजरात का पारंपरिक दुश्मनी से ग्रस्त परिवार अब्दुल मालिक कोटला परिवार के कुल दीपक आबिद रज़ा कोटला की है जो मुस्लिम लीग नवाज़ के टिकट पर नेशनल असेंबली के सदस्य चुने गए हैं। उल्लेखनीय है कि आबिद रज़ा कोटला सांप्रदायिक हत्या के कई मामलों का सामना करता रहा है और इसके अलावा मुशर्रफ पर हुए एक आत्मघाती हमले में कथित तौर पर शामिल था, लेकिन चूंकि उस समय उसका सम्बन्ध गुजरात के चौधरी शुजाअत खानदान से था इसलिए कोशिश के बाद उसको बचा लिया गया। अब ये नौजवान मुस्लिम लीग नवाज़ के नेशनल असेम्बली का सदस्य है और पहले से कई गुना ताक़तवर है।

ये कहना मुश्किल है कि नई सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद और सांप्रदायिकता का निराकरण कर सकेगी लेकिन इसके स्वाभाव में कुछ स्पष्ट परिवर्तन ज़रूर आएंगे। पाकिस्तान में सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा और नेशनल असेंबली में इस सम्बंध में कानून बनाने के लिए कुछ विवादास्पद बिल भी पेश किए जाएंगे। सांप्रदायिक ताकतों के पास चूंकि वक्त बीतने के साथ साथ राजनीतिक शक्ति आती जा रही है इसलिए उन्हें रोक पाना बहुत मुश्किल होगा। ख़ैबर पख्तूनख्वाह में आतंकवादियों को विशेष रिआयत दी जाएगी और पंजाब में उन्हें पहले की तुलना में सांप्रदायिक गतिविधियां जारी रखने में अधिक आसानी होगी क्योंकि इनके साथी अब सीधे सत्ता में होंगे और उनके लिए अदालतों और पुलिस को प्रभावित करना आसान होगा। विडम्बना ये है कि किसी भी राजनीतिक दल के पास उग्रवाद और सान्प्रदायिकता के खात्मे का कोई प्रोग्राम नहीं और ज्यादातर राजनीतिक दल इसे स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय सरकारों के कदमों की प्रतिक्रिया करार देती हैं।

उग्रवाद और सांप्रदायिकता के स्थानीय कारणों को नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है। मिसाल के तौर पर कोई भी राजनीतिक पार्टी दीनी मदरसों के अतिवादी और सांप्रदायिक पाठ्यक्रम को बदलने जैसी मांग नहीं कर सकती और न ही ऐसे लोगों को लगाम दे सकती है जो जबान और बयान से सांप्रदायिक काम जारी रखते हैं। सांप्रदायिक ताकतों और अतिवादियों को कार्रवाईयों के लिए धन इकट्ठा करने से नहीं रोका जा सकता और न ही स्थानीय स्तर के अपराधों में शामिल तत्वों पर काबू पाया जा सकता है। ये एक मुश्किल घड़ी है जिसमें पाकिस्तान में निर्वाचित होने वाली नई सरकार पाकिस्तान की कठिन और जटिल समस्याओं का सामना करेगी। देखना ये है कि क्या ये वचनबद्ध प्रतीत होने वाली पार्टियाँ कुछ बदल पाएंगी कि नहीं?

मुजाहिद हुसैन ब्रसेल्स में न्यु एज इस्लाम के ब्युरो चीफ हैं। वो हाल ही में लिखी "पंजाबी तालिबान" सहित नौ पुस्तकों के लेखक हैं। वो लगभग दो दशकों से इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर मशहूर अखबारों में लिख रहे हैं। उनके लेख पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक अस्तित्व, और इसके अपने गठन के फौरन बाद से ही मुश्किल दौर से गुजरने से सम्बंधित क्षेत्रों को व्यापक रुप से शामिल करते हैं। हाल के वर्षों में स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद और सुरक्षा से संबंधित मुद्दे इनके अध्ययन के विशेष क्षेत्र रहे है। मुजाहिद हुसैन के पाकिस्तान और विदेशों के संजीदा हल्कों में काफी पाठक हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग की सोच में विश्वास रखने वाले लेखक मुजाहिद हुसैन, बड़े पैमाने पर तब्कों, देशों और इंसानियत को पेश चुनौतियों का ईमानदाराना तौर पर विश्लेषण पेश करते हैं।

URL for English article: https://newageislam.com/islam-politics/pakistan-new-governments,-prolonged-problems,/d/11655

URL for Urdu article: https://newageislam.com/urdu-section/pakistan-new-governments,-prolonged-problems,/d/11654

URL for this article: https://newageislam.com/hindi-section/pakistan-new-governments,-prolonged-problems,/d/11669 

Loading..

Loading..