certifired_img

Books and Documents

Hindi Section (15 Sep 2018 NewAgeIslam.Com)


Why Imran Khan’s Invocation of Medina is Deeply Regressive इमरान खान का मदीना को रोल मॉडल करार देना बहुत ही रुजअत पसंदाना रवय्या है: कुछ तथ्य

 

 

 

अरशद आलम, न्यू एज इस्लाम

27 अगस्त 2018

जब राजनीतिज्ञ खाने पीने, आवास और सुरक्षा प्रदान करने जैसे बुनियादी वादों को पूरा करने में असफल हो जाते हैं तो सामान्यतः वह धर्म का सहारा लेते हैंl झूटे वादों का जाल बिछा कर वह यह समझते हैं कि धर्म का नाम लेने से लोग जीवित रहने के लिए अपनी दैनिक संघर्ष को भूल जाएंगेl कुछ समय के लिए लोग धार्मिक भावनाओं के बहाव में बह जाते हैं, लेकिन जब उनका सामना भूक और शिक्षा जैसे बुनियादी और वास्तविक समस्याओं से होता है तो वह अपने राजनीतिक नेताओं को वह वादे याद दिलाते हैं जो उन्होंने किए थेl वर्तमान सरकार चली जाती है और इसके बाद दूसरी सरकार आती है और दूसरी सरकार भी वादों का एक ढेर लगा देती है, और यह सिलसिला चलता रहता हैl लेकिन जो बात सबसे अधिक दिलचस्प है वह यह है कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री ने अपने सफ़र के प्रारम्भ से ही धर्म का प्रयोग शुरू कर दिया हैl शायद उन्हें पहले से ही यह पता है कि वह बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार के मामलों पर अपने वादों को पूरा नहीं कर सकेंगे, जिन्हें उन्होंने अपने चुनावी मुहिम का एक केन्द्रीय मुद्दा बनाया थाl एक अच्छे नेता की पहचान दूरदर्शिता है, और इमरान खान जो कि शायद इस बात से अच्छी तरह आगाह हैं कि वह अपने वादों को पूरा करने में असफल होंगे, अपनी कौम को शुरू से ही गुमराह करना शुरू कर दिया हैl

इमारान खान से पाकिस्तान को मदीना राज्य जैसा एक कल्याणकारी राज्य बनाने की बात सुन कर पूरी मुस्लिम दुनिया उनकी ओर नज़र उठाए देख रही हैl और यहाँ तक कि पाकिस्तान के प्रगतिशील विश्लेषक भी इमरान खान और उनके नए पाकिस्तान के बचाव में बोल रहे हैंl समय ही बताएगा कि इमरान खान अपने वादों को पूरा कर पाते हैं, या नहींl

तथापि, अपने भाषणों में उनका मदीना राज्य का हवाला पेश करना अभी हमारी आलोचनात्मक लेख का बुनियादी केंद्र होना चाहिएl सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यहाँ यह है कि क्या मुस्लिम समेत कोई भी कौम आधुनिकता और प्रगतिशील राज्य के बजाए 7 वीं शताब्दी के अरबी मरुस्थल को अपना रोल मॉडल बना सकती हैl केवल इमरान खान ही नहीं बल्कि फ़ौज के बड़े वर्ग ने भी दुनिया के इस क्षेत्र का हवाला पेश किया है और ऐसा करने की अवश्य कोई ना कोई वजह होगीl

आधुनिकता वादियों से लेकर आधुनिक इस्लाम परस्तों तक सभी ने अपने राजनीतिक हितों के समर्थन के लिए मदीना राज्य का हवाला पेश किया हैl मौदूदी के लिए मदीना राज्य आदर्श इस्लाम का एक प्रारंभ बिंदु था, जहां राज्य शरीअत लागू करता है, हुसैन अहमद मदनी के लिए मिसाक ए मदीना अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए सबसे बेहतर ज़मानत था, ख़ास तौर पर भारत के मुसलमानों के लिएl और इमरान खान के लिए मदीना राज्य कल्याणकारी राज्य है जहां कमज़ोरों और पिछड़े लोगों के अधिकार सुरक्षित होंगेl वह मीसाक ए मदीना क्या है जिसका हम सदैव हवाला देते हैं और किस तरह वह आज हमारे वर्तमान युग की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है?

मीसाक ए मदीना से जो पहला तास्सुर मिलता है वह यह है कि मीसाक ए मदीना खून बहा के अवधारणा से भरा हुआ हैl अब यही खून बहा की अवधारणा चिंताजनक हैl अब एक खूनी आज़ाद घूम सकता है अगर वह खून बहा देने की इस्तेताअत रखता हैl पूरा सिद्धांत यह है कि अगर किसी के पास धन है तो वह किसी भी चीज से आज़ाद हो सकता हैl सऊदी अरब में इसकी अनेकों उदाहरण मौजूद हैं जहां लोगों और ख़ास तौर पर निर्धन मुहाजिर वर्गों को खून बहा लेने पर मजबूर किया जाता है ताकि वह अदालत में अपने मुकदमों को समाप्त कर सकेंl अब इसी खून बहा की कल्पना पर समाज के अंदर अवकात और स्तर के असमानता के आधार पर अमल किया जाता हैl जिनके पास धन है वह खून बहा देने के काबिल होंगे और कानून की पकड़ से आसानी के साथ निकल जाएँगे, और जिनके पास धन नहीं है उन्हें कानून के इताब का शिकार होना होगाl इसलिए खून बहा की यह अवधारणा कानून की नज़र में समानता के आधुनिक कल्पना के खिलाफ हैl इसलिए यह बात विश्वास के साथ नहीं कही जा सकती है कि पाकिस्तान के अत्यंत असंतुलित समाज के अन्दर इस मॉडल को अपनाने की आवश्यकता हैl

मीसाक ए मदीना के एक और घोषणापत्र का संबंध महिलाओं से हैl इस तथाकथित इन्केलाबी घोषणापत्र के अनुसार व्यक्तिगत तौर पर एक महिला की शिकायत उसके परिवार या उसके रिश्तेदारों की मर्जी के साथ ही आगे उठाई जा सकती हैl इतिहासकारों ने यह बिलकुल सही लिखा है कि इस घोषणापत्र का उद्देश्य शक्ति के वर्तमान सामाजिक संतुलन में व्यधन उत्पन्न नहीं करना है जिसमें महिलाओं को जानवर समझा जाता थाl अब यह निर्णय पाकिस्तानन पर है कि क्या वह उसी परंपरा को जारी रखना चाहता है और वह महिलाओं के साथ पुरुषों और समाज की एक मिल्कियत के तौर पर व्यवहार करता है या उनके साथ उनके अधिकारों के मामले में एक व्यक्ति की हैसियत से सुलूक करता हैl हम मुसलामानों से सदैव यह कहते हुए सुनते हैं इस्लाम ने महिलाओं को इन्केलाबी अधिकार अदा किया हैl हो सकता है कि यह अतिश्योक्ति हो, मुस्लिम समाज सदैव आधुनिक नियमों के माध्यम से लैंगिक समानता के बारे में एक नया घोषणापत्र तैयार कर सकते हैंl चिंता की बात तो यह है कि पश्चिमी शिक्षा प्राप्त इमरान खान यह जानते हुए मदीना मॉडल की बात करते हैं कि यह पाकिस्तानी महिलाओं को अँधेरे के भेंट कर देगाl पाकिस्तानी महिलाओं ने अपने कुछ मौजूदा अधिकारों की प्राप्ति के लिए एक जबरदस्त संघर्ष का सामना किया है और उन्हें अपने लीडर के पहले से कल्पना किए हुए अच्छे वाक्यों को हलके में नहीं लेना चाहिएl

एक ज़माने में मदीना राज्य को बहुलतावाद और सहअस्तित्व की उज्ज्वल उदाहरण माना जाता थाl बहुलतावाद एक साकारात्मक चीज है, लेकिन मीसाक ए मदीना का एक गहरा विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि इसकी बहुलतावाद कोई एक ऐसा सिद्धांत नहीं है कि जिसकी प्राकृतिक खूबी के कारण पैरवी की जाएl बल्कि इस मामले में बहुलतावाद मुसलामानों की सूफीवाद पर आधारित हैl इस घोषणापत्र में मुसलामानों को एक ऊँची हैसियत अता की गई है और मदीना के दुसरे नागरिकों पर भी उन्हीं के विचार थोपने की बात की गई हैl इस घोषणापत्र की एक शक में यह कहा गया है कि सभी मुसलमान आपस में दोस्त हैं गैर मुस्लिमों को छोड़ कर, जबकि इसकी दूसरी शक में यह कहा गया है कि एक मुसलमान को किसी दुसरे गैर मुस्लिम की मदद नहीं करनी चाहिएl इस प्रकार की इस्लाम परस्त अलगाववादी नीति से हमें मदीना के प्रारम्भिक मुआशरे की गुणवत्ता मालुम होती हैl लेकिन शायद यही बात पाकिस्तानियों को अधिक अपनी ओर आकर्षित करती हैl जब हम प्रधानमंत्री की हैसियत से इमरान खान की शपथग्रहण पर नज़र डालते हैं तो हमें यह पता चलता है कि पाकिस्तान में किसी दुसरे धर्म की कोई गुंजाइश नहीं है और यह कि पूरा शपथपत्र इस्लामी तफ़व्वुक़ परसती के विचार को नए सिरे से लागू करने के लिए तैयार किया गया थाl

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए आवश्यक है कि अल्लाह की वहदानियत पर, अल्लाह की किताबों पर, कुरआन के आखरी आसमानी किताब होने पर, पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आखरी नबी होने पर, और इस बात पर कि आप के बाद अब कोई नबी नहीं होगा, कयामत के दिन पर और कुरआन और सुन्नत की सभी आवश्यकताओं और शिक्षाओं पर ईमान रखेl अब अगर प्रधानमंत्री के लिए यह शपथ है तो यह बात समझी जा सकती है कि क्यों अब भी मदीना मॉडल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैl अंततः इस्लाम स्थापित करने का पहला अनुभव मदीना में आज़माया गया और ख़ास तौर पर इस्लाम के नाम पर बनने वाला देश पाकिस्तान थाl और शायद समानता यहीं समाप्त नहीं होती, बल्कि इस्लामी मदीना ऐसे शहर पर स्थापित किया गया था जिसका अपना एक सिद्धांत व नियम और जीवन प्रणाली भी थाl बिलकुल उसी तरह इस्लामी पाकिस्तान भी एक ऐसी आबादी पर कायम किया गया है जो सदियों से अपने प्रचलित रस्म व परंपरा पर अग्रसर थीl और इस्लाम के मंसा ए शुहुद पर आने के बाद दोनों स्थानों की पहचान ही बदल गईl

सामंती पाकिस्तान के अन्दर एक कल्याणकारी राज्य कायम करने की आवश्यकता का स्वागत हैl लेकिन एक कल्याणकारी राज्य का मॉडल सातवीं सदी के अरब मॉडल पर आधारित नहीं होना चाहिए जहां सदकों और खैरात के अलावा कल्याण का कोई सिद्धांत नहीं था और जहां व्यक्तिगत, अल्पसंख्यक और लैंगिक अधिकारों की कोई कल्पना नहीं थीl अगर इमरान खान एक कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के लिए गंभीर हैं तो उन्हें उन आधुनिक संस्थाओं से रुजुअ करना चाहिए जिनका अनुभव पश्चिमी यूरोप में किया जा रहा हैl

URL for English article: http://www.newageislam.com/the-war-within-islam/arshad-alam,-new-age-islam/why-imran-khan’s-invocation-of-medina-is-deeply-regressive/d/116208

URL for Urdu article: http://www.newageislam.com/urdu-section/arshad-alam,-new-age-islam/why-imran-khan’s-invocation-of-medina-is-deeply-regressive--عمران-خان-کا-مدینہ-کو-رول-ماڈل-قرار-دینا-انتہائی-رجعت-پسندانہ-رویہ-ہے--چند-حقائق/d/116347

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/arshad-alam,-new-age-islam/why-imran-khan’s-invocation-of-medina-is-deeply-regressive--इमरान-खान-का-मदीना-को-रोल-मॉडल-करार-देना-बहुत-ही-रुजअत-पसंदाना-रवय्या-है--कुछ-तथ्य/d/116380

New Age Islam, Islam Online, Islamic Website, African Muslim News, Arab World News, South Asia News, Indian Muslim News, World Muslim News, Women in Islam, Islamic Feminism, Arab Women, Women In Arab, Islamphobia in America, Muslim Women in West, Islam Women and Feminism

 




TOTAL COMMENTS:-    


Compose Your Comments here:
Name
Email (Not to be published)
Comments
Fill the text
 
Disclaimer: The opinions expressed in the articles and comments are the opinions of the authors and do not necessarily reflect that of NewAgeIslam.com.

Content