स्वपनल सोनल
21 दिसम्बर 2013
जामिया मिलिया इस्लामिया की ओर से छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल कारगर साबित हो रही है। यूनिवर्सिटी की ओर से छात्राओं को 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। आज जामिया पॉलिटेक्निक में 900 छात्रों में 92 छात्राएं हैं, जो पूर्व के मुकाबले एक उत्साहजनक अनुपात है।

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के एक छोटे से गांव में पढ़ाई शुरू करने वाली आसमा जामिया के प्राकृतिक विज्ञान विभाग से बॉयोटेक्नोलॉजी विषय से स्नातक किया है और जामिया के बायोसाइंसेज श्रेणी में स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक पाया है. उसने प्रोटीन संरचनागत रोगों पर शोध किया और आज इटली में इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बॉयोटेक्नोलॉजी में पोस्ट डॉक्टोरल का अध्ययन कर रही हैं। आसमा और उन जैसी कई लड़कियां आज साहसी मुस्लिम लड़कियों का नया चेहरा बन कर उभरी हैं।
आसमा की ही तरह समरीन जहां ने जामिया पॉलिटेक्निक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है. वह फर्स्ट ईयर के बैच में अकेली छात्रा है, लेकिन उसके हौसले बुलंद हैं। वह कहती हैं, 'अगर लड़के कर सकते हैं, तो लड़कियां क्यों नहीं कर सकतीं?'
हम अच्छा काम कर रहे हैं, क्यों हटें पीछे
जामिया में बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी की फर्स्ट ईयर की छात्रा जैनब जफर ने मरीजों की सेवा के उद्देश्य से पैरामेडिकल क्षेत्र चुना. वह कहती हैं, 'हमारे साथ की कई लड़कियों ने एडमिशन के बाद भी अपना नाम वापस ले लिया, क्योंकि यहां प्रैक्टिकल के दौरान अपोजिट सेक्स की डमी को छूना होता है। लेकिन मैं और मेरी कई अन्य सहेलियां आश्वस्त हैं कि हम अच्छा कर रहे हैं.' जैनब आगे कहती हैं कि उनके काम से उनके माता-पिता भी खुश हैं।
पढ़ाई में बुर्का नहीं है कोई बाधा
जैनब का मानना है कि पढ़ाई प्राथमिकता हो तो बुर्का कोई बाधा नहीं है. 92 साल पुराने इस केंद्रीय विश्वविद्यालय से आज बड़ी संख्या में मुस्लिम लड़कियां जुड़ रही हैं। झारखंड के डाल्टनगंज से आई आर्किटेक्चर की छात्रा शाइला नाज कहती हैं, 'जामिया अध्ययन के लिए आदर्श माहौल देता है. यह सुरक्षित भी है।'
जामिया में फिजियोथेरेपी केंद्र के निदेशक एजाज हसन बताते हैं कि 2007 में जब इस केंद्र की शुरुआत हुई, तब हमें छात्राओं के अभिभावकों को नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना पड़ता था. हमें खुशी है कि आज लड़कियां खुद आगे आकर नामांकन करवा रही हैं. आज यहां छात्र-छात्राओं का अनुपात 70:30 है।
बेहतर दिशा की उम्मीद
जामिया छात्राओं के लिए और छात्रावास बना रहा है. लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने हाल ही एक छात्रावास का उद्घाटन किया है। जामिया में दलित और अल्पसंख्यक अध्ययन केंद्र की संकाय सदस्य साहिबा कहती हैं, 'माता-पिता अब अपनी बेटियों को कंप्यूटर साइंस, बॉयोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी और पॉलीटेक्निक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए दिल्ली भेज रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटियों को यहां बेहतर दिशा मिलेगी।'
स्रोतः http://aajtak.intoday.in/story/the-brave-new-face-of-muslim-girls-1-750111.html
URL: https://newageislam.com/hindi-section/bold-new-faces-muslim-girls/d/35094