
By Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam
पाकिस्तान के उर्दू प्रेस का मुंदरजा ज़ेल मज़मून ज़ाहिर करता है कि किस तरह मुसलमानों के दरमियान दीगर मज़हबी तबकों के साथ नफ़रत और उनसे ज़हनी ख़ौफ़ और अपनी मज़लूमियत की कैफ़ीयत को पाकिस्तान में फ़रोग़ दिया जा रहा है। अफ़सोस की बात है कि इसी तरह की सूरते हाल हिंदुस्तान के उर्दू प्रेस में भी ग़ालिब है। उसे दीगर तब्क़ात के फे़ल या फ़ेले बद से क़ता नज़र कोई हिंदुस्तानी मुस्लिम उर्दू मज़्मून निगार भी लिख सकता था, और हमें मालूम होना चाहिए के ज़हनी ख़ौफ़ और अपनी मज़लूमियत की कैफ़ियत ख़ुदबख़ुद मोकम्मल होने वाली पेशन गोई साबित हो सकती है।
नफ़रत की गहराई का इस मज़मून से अंदाज़ा लगता है, मिसाल के तौर पर यहूदियों के तईं मुसलमानों के दरमियान एक बहुत ही आम रुझान है। सैहूनियों की ग़ल्तियों और इसराईली रियासत के अमल के लिए उनको मौरिद इल्ज़ाम ठहराना ऐसा है जैसे इस्लामी इंतेहापसंदों के फ़ेले बद के लिए पूरे मुस्लिम तब्क़े की मलामत करना है। वैसे उनसे नफ़रत करना, या किसी और से, और उनको ख़बीस या ग़लीज़ कहना और उन पर इस नफ़रत के लिए मज़हबी जवाज़ पैदा करना उनके तईं नाइंसाफ़ी है और इस्लाम और इसकी तकसीरियत से हमारी वाबस्तगी के साथ धोखा है।
क़ुरान की उन आयात का हवाला देना जो तारीख़ में एक ख़ास मुद्दत और ख़ास हालात में रहनुमाई के लिए नाज़िल हुई थीं और उस ज़माने में जब इस्लाम अपनी तफ़ूलियत के दौर में था और इसके पैरोकारों की बक़ा को ख़तरा लाहक़ था और उन आयात को आलमगीरी नसीहत वाली तसव्वुर करना इस्लाम और मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को बदनाम करने के बराबर होगा। मुसलमानों को इस्लामी इंतेहापसंदों के तर्ज़े अमल और नुक़्तए नज़र के सबब हज़ारहा मसाइल का सामना करना पड़ रहा है। मैं सोचता हूँ अगर कोई रास्ता हो जिससे मर्कज़ी धारे के मुसलमान हमारे दरमियान नफ़रत फैलाने वाले इस्लामी इंतेहापसंदों से बातचीत कर सकें और उन्हें अपने मज़हब और आलमी मुस्लिम तब्क़े के मफ़ाद में उनके शिद्दत पसंदाना तरीक़ों को ठीक करने के लिए क़ाएल कर सकें---- एडिटर, न्यु एज इस्लाम
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दुश्मन की शनाख़्त
सैय्यद अज़हर हुसैन काज़मी
18 ता 24मई, 2012
(उर्दू से तर्जुमा- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)
इस्तेमारी ताक़तें एक बार फिर तमाम तर वसाइल के साथ मुस्लिम दुनिया को सफ़ए हस्ती से मिटाने के लिए सरगर्म हो चुकी हैं, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, कुवैत में क़ब्ज़ा जमाने के बाद अब इस बार ईरान पर हुक्मरानी के ख़्वाब देख रहा है। पच्चास से ज़ाइद इस्लामी ममालिक में ईरान वो वाहिद मुल्क है जहां इस्तेमारी गु़लामी के आसार नज़र नहीं आते।
कामयाब इस्लामी इन्क़लाब के बाद से लेकर अब तक इस्लाम दुश्मन ताक़तें इस कोशिश में हैं कि किसी ना किसी तरीक़े से ये इस्लामी क़ुव्वत ख़त्म हो जाय। तमाम तर साज़िशें और धमकियों के बावजूद ईरान ने घुटने नहीं टेके तो उसे इक़्तिसादी पाबंदियों के ज़रीये मजबूर करने की नापाक कोशिशें की गईं। इक़्तिसादी पाबंदी से ईरान को अपने पांव पर खड़ा होने का बेहतरीन मौक़ा मयस्सर आया। ईरानी क़ौम के जज़्बए ईमानी और जुर्रत को देख कर सामराजी क़ुव्वतें अजीब कश्मकश में मुब्तेला हो गई हैं। गुज़श्ता तीस सालों में मग़रिबी ताक़तों ने मुख़्तलिफ़ मंसूबों के तहत मुसलमानों को आपस में लड़ाने का घिनौना खेल शुरू किया जिसकी वजह से आज मुसलमान एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए हैं। मुसलमान अपने ही मुसलमान भाईयों को तबाह करने के लिए अपने अज़ली दुश्मन अमेरीका से मदद तलब करके अपनी बक़ा दुश्मनों से हासिल करना फ़ख़्र समझते हैं। दुश्मन आए रोज़ नित नए हरबे के साथ मुस्लिम दुनिया पर हुक्मरानी का जाल बिछाने में मसरूफ़ हैं और मुस्लिम हुक्मरान शबाबो कबाब, ऐशो इशरत और शिकार खेलने में मगन हैं। अमेरीका और इसके हव्वारियों ने मुस्लिम ममालिक ख़ुसूसन अरब मुसलमान हुक्मरानों को ख़ित्ते में ईरान की बढ़ती हुई ताक़त से ख़ौफ़ज़दा करके मुस्लिम उम्मा में दुश्मनी और नफ़रत के एक नए बाब का इज़ाफ़ा कर दिया है।
अमेरीका ने अरब सुन्नी स्टेट को ईरान की शिया सुपर पावर के मद्दे मुक़ाबिल खड़ा करके एक साथ कई मक़ासिद हासिल करने की कोशिश की। अमेरीका ने एक दहाई क़ब्ल सऊदी अरब और चंद दूसरे अरब ममालिक को हालात की संगीनी का प्रोपेगंडा करके कई मिलियन डालर के फ़ौजी साज़ो सामान ख़रीदने पर राज़ी कर लिया और इस तरह उन्होंने एक तरफ़ अपनी असलहा साज़ कंपनियों के वसी कारोबार के लिए मंडी तलाश कर ली तो दूसरी तरफ़ उन ममालिक को ख़ैर ख़्वाही का झांसा दे कर तसल्लुत का नया रास्ता हमवार कर लिया। हाल ही में सऊदी अरब, कुवैत, ओमान और मुत्तहेदा अरब अमीरात ने अमेरीका से एक सौ 23 अरब डालर के दिफ़ाई साज़ो सामान ख़रीदने का एक मुआहिदा किया है ताकि ईरान को ऐटमी प्रोग्राम से रोक सकें। सऊदी अरब मुस्लिम दुनिया में एक ऐसा अमेरीका नवाज़ मुल्क है जो हर सूरत में अमेरीका की गु़लामी से आज़ाद होना नहीं चाहता है।
अमेरीका ने ग्यारह सितंबर के वाक़ेए को बहाना बना कर अफ़ग़ानिस्तान पर हमला करके लाखों इंसानों को मौतो हयात की कश्मकश में मुबतला कर दिया तो किसी अरब मुल्क को ये तौफ़ीक़ हासिल नहीं हुई कि इन मज़लूम अफ़ग़ान मुसलमानों की दाद रसी की जाय बल्कि सऊदी शाह ने अमेरीकी सदर बुश को ग्यारह सितंबर के सान्हे में होने वाले नुक़्सान के अज़ाले के लिए एक अरब डालर का हदिया पेश करके मुसलमानों को वर्ता हैरत में डाला ताहम ताज्जुब और हैरत की बात ये है कि अमरीकी सदर ने इस हदिए को क़ुबूल करने से इन्कार करते हुए सऊदी शाह को मुलाक़ात का शरफ़ नहीं बख्शा लेकिन सऊदी शाह ने सदर बुश के ख़ुसूसी मुशीरों और दोस्तों को सदर बुश को इस हदिए की रक़म क़ुबूल करने पर राज़ी करने के लिए मज़ीद एक अरब से ज़ाइद की रक़म ख़र्च की। सद्दाम ने अमेरीका की ही ईमा पर कुवैत पर हमला किया तो सऊदी अरब ने फ़ौरी तौर पर अमेरीका से मदद तलब करके मुक़द्दस सरज़मीन को आलमी यहूद के नापाक क़दम से नजिस कर दिया। मिस्र, लीबिया, यमन और शाम में होने वाले वाक़ेआत को सऊदी अरब ईरान से नत्थी करके उसे तन्हा करने की अमेरीकी साज़िश पर अमल पैरा हो कर गु़लामी का हक़ अदा करने में मसरूफ़ है।
आलमी सतह पर होने वाली इस्लाम दुश्मन साज़िशों का मुक़ाबला करने के लिए मुस्लिम उम्मा मुत्तहिद होने की बजाय आपस में दस्तो गरीबां हो कर अपने वजूद को ही ख़तरे में डाल रही है। मौजूदा आलमी हालात को सही मानों में समझने की सलाहियतों से आरी मुस्लिम हुक्मरान अपनी बक़ा व सलामती का इन्हेसार अमेरीका पर करते हुए अपनी ग़ैरतो हमीयत का सौदा कर चुके हैं। अमेरीका ने अपनी साबिक़ा पालीसियों से ख़ातिर ख़्वाह नताइज हासिल ना होने पर एक नई हिक्मते अमली के ज़रीए मुसलमानों को रौंद डालने का मंसूबा बनाया है जिसके ज़रीए हिज़्बुल्लाह और ईरान को भड़का कर अरब मुसलमानों से लड़ाने का हतमी प्लान तैय्यार किया है। इस मक़सद के लिए बहरीन के शिया मुसलमानों को तख़्तादार पर लटका कर दुनिया भर में मुक़ीम शिया क़ौम को अहले सुन्नत और वहाबियत के ख़िलाफ़ क़दम उठाने पर मजबूर करने का शैतानी खेल इंतेहाई होशियारी से जारी है। अमेरीका चाहता है कि एक तरफ़ सऊदी अफ़्वाज के ज़रीए बहरीन में शियों का ख़ात्मा किया जाय तो दूसरी तरफ़ ईरान और हिज़्बुल्लाह मज़लूम बहरीनी शियों की हिमायत में उठ खड़े हों। इस घिनौनी साज़िश को पायए तक्मील तक पहुंचाने के लिए ईरान की शिया क़यादत और हुकूमत को बहरीन में दख़ल अंदाज़ी के लिए इंतेहाई जारहीयत और सफ़्फ़ाकाना तरीक़ा इस्तेमाल किया जाएगा ताकि अमेरीका नवाज़ सऊदी अरब, कुवैत, मुत्तहेदा अरब अमीरात वग़ैरा से ईरान की बराहे रास्त लड़ाई हो।
सऊदी अरब ने एक बटालियन से ज़ाइद अफ़्वाज को बख्तर बंद गाड़ियों और जदीद जंगी असलहे के साथ बहरीन के निहत्ते मज़लूम मुसलमानों की नस्ल कुशी के लिए बहरीन में उतार दिया है। इस्तेमारी क़ुव्वतें इस ख़ुशफ़हमी में हैं कि बहरीन में शिया नस्ल कुशी को देख कर ईरान के मज़हबी जज़्बात एक दम भड़क उठेंगे और वो सऊदी अफ़्वाज और बहरीनी हुकूमत के ख़िलाफ़ लश्कर कुशी करेगा। ईरान की तरफ़ से कोई जज़्बाती फ़ैसला किए बगै़र बहरीन हुकूमत के ख़िलाफ़ फ़ौजी व अस्करी इक़दाम से गुरेज़ करने के हक़ीक़त पसंदाना रवैय्ये से इस्लाम दुश्मन हलक़ों में शदीद तशवीश की लहर दौड़ रही है। अरब ममालिक के कठपुतली मुस्लिम हुक्मरान शुरू ही से इस्लामी इन्क़लाब के सख़्त मुख़ालिफ़ रहे हैं उन्होंने अपनी बिसात से बढ़ कर इस्लामी इन्क़लाब के ख़ात्मे के लिए जद्दो जहद की है लेकिन नाकामी के सिवा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ तो अपने आक़ा अमेरीका की मदद से जारहीयत पर उतर आए हैं।
अमेरीका तमाम मुस्लिम ममालिक में ईरान के ख़िलाफ़ मज़हबी मुनाफ़िरत फैला कर अपने मज़मूम मक़ासिद के लिए कोशां है। ईरान ने इंतेहाई सब्रो तहम्मुल के साथ इस शैतानी खेल का मुक़ाबला करते हुए दूर अंदेशी और हालात के तनाज़ुर में सही सिम्त में फ़ैसला किया है। अगर ईरान बहरीन के मसले को सिफ़ारती तरीक़े से हल करने के बजाय ताक़त के ज़रिए हल करने की कोशिश करता तो दुश्मन के मंसूबे के ऐन मुताबिक़ होता। अमेरीका बराहे रास्त ईरान पर हमला करने की ग़ल्ती कभी नहीं करेगा वो क़रीबी इस्लामी ममालिक में अपना असर व रसूख़ बढ़ा के मुसलमानों को बाहम लड़ाने की पालिसी पर अमल करते हुए सऊदी अरब या कुवैत के ज़रिए अपने एहदाफ़ पर पहुंचने की जुस्तुजू करेगा। शाम की मौजूदा सूरते हाल को देखते हुए तजज़िया निगारों का ख़याल है कि अमेरीका और इसके ज़रख़रीद ग़ुलाम शाम में किसी भी सूरत अमन और तरक़्क़ी को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस सिलसिले में सऊदी अरब और तर्की ने शाम में बशार अलअसद की हुकूमत के ख़ात्मे के लिए मुशतरक़ा हिक्मते अमली तैय्यार की है। शाम में बशार असअसद की हुकूमत को गिरा कर सऊदी अरब और अमेरीका मुशतरका मफ़ादात के लिए काम करने वाले एक कठपुतली हुक्मरान को मुसल्लत करने के मंसूबे को तकमील के मराहिल में ले आए हैं। इस मंसूबे के तहत बाग़ियों को सऊदी अरब के ज़रिए असलहे की नई खेप पहुंचा कर ख़ानाजंगी को मज़ीद बढ़ा कर बशार अलअसद हुकूमत को मजबूर किया जाएगा। शाम को इस जुर्म में सज़ा दी जा रही है कि वो ग़ासिब इसराईल की ज़ालिमाना कार्यवाईयों का साथ नहीं देता। और ईरान से बेहतर ताल्लुक़ात का ख़्वाहां है। एक सौ 23 अरब डालर के दिफ़ाई सामान की ख़रीदारी का जो मुआहिदा किया गया है मुस्तक़बिल में इसका कितना भयानक नतीजा निकलेगा ये तो वक़्त आने पर ही पता चलेगा ताहम मुसलमान हुक्मरानों की अमेरीका नवाज़ी और इस्लाम दुश्मनी पर जितना मातम किया जाय कम है। इसी मक्कार अमेरीका ने सद्दाम को ईरान और कुवैत पर हमला करके अपनी बादशाहत क़ायम करने का सुनहरी ख़्वाब दिखा कर आमादा किया। सद्दाम ने ईरान के बाद अचानक कुवैत पर हमला करके दुनिया भर के मुसलमानों को वर्ता हैरत में डाला। सद्दाम एक दहाई तक ना समझ जाहिल और मुतअस्सिब मुसलमानों का इस्लामी हीरो बन के मुसलमानों के ख़ून से हाथ रंगीन करता रहा।
मंसूबे के तहत इराक़ के हमले के वक़्त फ़ौरी तौर पर अमेरीका ने अपनी फ़ौज को कुवैत की सरज़मीन पर उतार दिया ताकि दुनिया भर के मुसलमानों को बेवक़ूफ़ बना कर एक और इस्लामी मुल्क में पंजे गाड़ सकें। अमेरीका और इसके हव्वारी ईरान को किसी भी साज़िश के तहत मरऊब नहीं कर सके तो उन्होंने अपनी शैतानी चाल को दूसरी तरफ़ करके एक नई हिक्मते अमली तैय्यार कर डाली है। ताज़ा मंसूबे के पहले मरहले में शाम की हुकूमत का ख़ात्मा करके अपने अगले हदफ़ पाकिस्तान में मुख़्तलिफ़ तरीक़ों से इलाक़ाई और लिसानी तसादुम के साथ साथ फ़िरक़ावाराना फ़सादाद की आग भी भड़काई जाएगी। इस मक़सद के लिए बलुचिस्तान में शियों को टार्गेट करके क़त्ल करने का सिलसिला शुरू किया जा चुका है और इसी के साथ साथ बलोच क़ौम को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उकसा कर उनकी तमाम तर तवज्जोह अंदरूनी मसाइल में उलझाई जाय ताकि ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी कार्रवाई के नतीजे में शिया और बलोच क़ौम ईरान की हिमायत में उठ खड़े ना हो सकें। अमेरीका ईरान के साथ पाकिस्तान की सरहदों के दोनों अतराफ़ कसीर तादाद में बलोचों की मौजूदगी से ख़तरा महसूस कर रहा है कि कहीं पाकिस्तानी बलोच क़ौम अपने ईरानी बलोचों की हिफ़ाज़त के लिए कोई क़दम ना उठाएं। इसी ख़तरे के बाइस पाकिस्तान में एक तरफ़ शिया क़ौम को निशाना बनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ बलोच और पठान को आपस में लड़ाने का खेल अनक़रीब शुरू किया जाएगा। एक तीर से दो शिकार करने वाला अमेरीका अब एक ही तीर से चार शिकार करके पाकिस्तान को टुकड़ों में बांट कर खाने के लिए बेताब है। आलमी हालात के तनाज़ुर में इस वक़्त पूरी मुस्लिम दुनिया अमेरीका की ज़रख़रीद ग़ुलाम की हैसियत अख़्तियार कर चुकी है। किसी भी मुल्क में अमेरीका की इजाज़त के बगै़र कोई क़दम उठाया नहीं जा सकता।
मुसलमानों की बदक़िस्मती है कि फिरवी मसाइल को अना का मसला बना कर अपना मकतबे फ़िक्र दूसरों पर जबरी मुसल्लत करने की कोशिश करते हैं। अक़ीदे और नज़रिए के मसले को दुश्मन एक हथियार के तौर पर मुसलमानों को परागंदा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन मुसलमानों को इस ख़तरनाक और नाज़ुक मसले का एहसास ही नहीं है। दुश्मन एक मसलक को दूसरे मसलक के ख़िलाफ़ क़तलो ग़ारत के लिए उभार कर अपने अज़ाइम हासिल कर रहे हैं। मुसलमान नज़रियाती इख़्तिलाफ़ को इस्लाम और कुफ्र का मेयार क़रार दे कर मुख़ालिफ़ फ़िर्क़ा को क़तल करना फ़र्ज़े ऐन तसव्वुर करते हैं। मुसलमानाने आलम ने अब तक इस नुक्ते को समझने की कोशिश ही नहीं की कि हमारे मुशतरका दुश्मन हमसे कैसे मक़ासिद हासिल कर रहे हैं और ना हमें मालूम है कि हमारे असल दुश्मन कौन हैं। जब तक हमें अपने दुश्मन की शनाख़्त मालूम ना हो हम इसी तरह बाहम दस्तो गिरेबां रहेंगे। हालात के तक़ाज़ों को देखते हुए तमाम मुसलमान मुत्तहिद हो कर अपने इस्लामी तशख़्ख़ुस को बरक़रार रखते हुए ग़ैरत व हमीयत से काम लेते मगर तमाम मुस्लिम हुक्मरान ने इक़्तेदार को बचाने के लिए इस्लाम दुश्मन ताक़तों से मदद हासिल करते रहे इसके नतीजे में कमो बेश तमाम इस्लामी ममालिक में मग़रिबी ताक़तों का असर व रसूख़ काफ़ी बढ़ चुका है। मुसलमानों के अंदर कर्नल क़ज़्ज़ाफ़ी, सद्दाम, हुस्ने मुबारक, ज़ियाउल हक़, उसामा बिन लादन और रज़ा शाह पहलवी जैसे नाम निहाद लीडर अपने ज़ाती मफ़ादात और इक़्तेदार के लिए मुसलमानों की क़िस्मत से खेलते रहे।
इस्लामी ममालिक के सियासतदान हों या उल्मा या मज़दूर हों या किसान, बिज़नेसमैन हों या ब्युरोक्रैट हर कोई फ़िरकापरस्ती की लानत में गिरफ़्तार है। इन तमाम हालात का जायज़ा लेने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि मुसलमानों के अंदर इत्तेहाद और यकजहती वक़्त का तक़ाज़ा है ताहम जहां कहीं मुस्लिम रियासत में कोई वाक़ेआ रुनुमा हो तो इसके असरात पाकिस्तान पर बहुत ज़्यादा पड़ते हैं क्योंकि बाक़ी मुस्लिम ममालिक की निस्बत पाकिस्तान के मुसलमान ज़्यादा जज़्बाती जल्दबाज़ और दर्द मंद और बाख़बर हैं इसी वजह से पाकिस्तान हमेशा हंगामाख़ेज़ हालात में रहता है इन्ही अवामिल के पेशे नज़र इस्तेमारी ताक़तें पाकिस्तान को मश्क़ गाह के तौर पर इस्तेमाल करते हुए हमारे दरमियान नफ़रत, रंजिश और तास्सुब के बीज बो रही हैं। अमेरीका ईरान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान को अड्डा बनाने के लिए सरकारी तौर पर कोशिशें तो अज़ल से ही करता चला आया है। लेकिन अवामी रद्दे अमल के सामने बंद बांधने के लिए कई नाकाम कोशिशें करने के बाद भी ख़ातिर ख़्वाह कामयाबी ना मिलने पर सीख पा होकर दरांदाज़ी के लिए पर तौल रहा है। हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि इत्तेहाद का मुज़ाहरा करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दें वगरना अफ़ग़निस्तान और इराक़ की मिसाल हमारे सामने है।
18ता 24मई बशुक्रियाः हफ़्तरोज़ा नवाए इस्लाम, पाकिस्तान
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