New Age Islam
Tue Jun 09 2026, 10:47 PM

Hindi Section ( 2 May 2012, NewAgeIslam.Com)

Comment | Comment

Salient Features of Progressive Muslim Thought –Social Justice सामाजिक न्याय, लैंगिक न्याय, कम न किये जा सकने वाले धार्मिक बहुलवाद पर प्रगतिशील मुसलमानों की सोच की प्रमुख विशेषताएं


डॉक्टर अदिस दुदरेजा, न्यु एज इस्लाम

27 अप्रैल, 2012

(अंग्रेजी से अनुवाद - समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम)

मैं अपने प्रज़ेन्टेशन में प्रगतिशील मुस्लिम शब्दावली का प्रयोग करता हूँ क्योंकि ओ. सफ़ी के द्वारा सम्पादित किताब "प्रगतिशील मुसलमान" में लेख लिखने वालों द्वारा इस पदावली को तैयार और प्रयोग किया गया है। किताब "प्रगतिशील मुसलमान" इसमें मदद करने वाले पंद्रह लोगों की लगभग पूरे एक साल तक बातचीत, संवाद और विचार विमर्श का नतीजा है। यह 11 सितंबर, 2001 की घटना के बाद इसकी रचना हुई, इस घटना के बाद हमने तुरंत महसूस किया कि बातचीत के स्तर को ऊंचा करने और इस्लाम को क्षमाप्रार्थी वाले तरीके से  पेश करने वाले अंदाज से बाहर निकालने की जरूरत थी।

इसके प्रमुख समर्थकों में से एक एफ ईज़ाक के शब्दों को इस्तेमाल करने के लिए, प्रगतिशील मुसलमानों के 'कास्मोविज़न'  का बेहतरीन प्रदर्शन, उद्देश्यों और कर्तव्य परायणता के कुछ मानकों, मूल्यों, व्यवहार के द्वारा होता है और जिन उद्देश्यों को व्यक्त किया गया उससे और अलग विषयों के सम्बंध में एक बड़ा रूप लेता है।

इन मानकों और रीति रिवाजों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण में से एक वादा और ईज़ाक की पदावली 'सैद्धांतिक या भविष्यवाणी एकजुटता' के अनुसार इसके मानने वालों की दुनिया भर के मज़लूम और हाशिए पर पहुंच चुके लोगों के साथ सम्बद्धता है और जो असल में अन्याय के शिकार हैं। इस सैद्धांतिक एकता को लेकर कोई उलझन नहीं होनी चाहिए और उसे ईज़ाक जिसे उपयुक्त या स्थितजन्य नैतिकता, कहते हैं, उससे अलग होना चाहिए 'जिसका मौजूदा सार्वजनिक मुस्लिम चर्चाओं पर बहुल हो' और सामरिक, उपयोगी, और चरित्र में अनुकूलता रखने वाला हो। ईज़ाक के शब्दों में प्रगतिशील मुसलमानों के बुनियादी चिंता उत्पीड़न के वैश्विक ढांचे से संबंध रखती है, चाहे वो आर्थिक, लैंगिक या यौन आदि, और ये सुनिश्चित करता है कि मज़लूम एक बार फिर इतिहास के सक्रिय एजेंट हों। हमारे (प्रगतिशील मुसलमानों) लिए इस जंग में खुदा की मरकज़ियत, इंसानियत को अल-नास तसव्वुर करना- खुदा की रूह को  ले जाने वाला और आज़ाद करने वाले वार्तालाप के रूप में इस्लाम की तारीफ करने वाला शामिल है।

इस परिप्रेक्ष्य में आधुनिक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था वाले बाजार के आधार पर राजनीतिक और सामाजिक ढांचे, संगठनों और शक्तियों ("सल्तनत") पर जोजिनका ग़लबा है वो या तो उसका समर्थन करते हैं या उसे जारी रखने या (ज़ालिम) गतिरोध का सख्ती से विरोध नहीं कर रहे हैं और प्रगतिशील मुसलमान उसे इस्लाम की अपनी समझ और अपने मजमूई तसव्वुरे कायनात समेत इसके परस्पर विरोधी के रूप में देखते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि "सल्तनत" ने खुदा की मर्ज़ीपर अमल करने वाले इंसानों में परिवर्तन और गिरावट पैदा की है, और मुख्य रूप से एक आर्थिक उपयोगकर्ता में बदल दिया है और जिसने दक्षिण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों और उत्तर में रहने वाले अमीरों के बीच महान आर्थिक खाई पैदा कर दी है। सफ़ी के अनुसार, इस सल्तनत में कई शक्तियां शामिल हैं जिनमें उत्पीड़न करने वाली और पर्यावरण विनाश को पैदा करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं जिनके हित आज औपनिवेशिक और शाही सरकारों से जुड़ गए हैं और मानवाधिकार पर अपने लाभ को प्राथमिकता देते हैं "हर इंसान के सम्मान और आदर से पहले उनका अपना सामरिक हित है।

इसके अलावा, प्रगतिशील मुसलमान मरकज़ियत, इन्फ़्रादियत और हर एक इंसान में मौजूद काबिलियत को खुदा की रूह के प्राप्तकर्ता के रूप में लाना चाहता है। यह विचार शायद सफ़ी के निम्नलिखित बयानों में सर्वोत्तम रूप में सामने आता है, एक प्रगतिशील मुस्लिम के दिल की व्याख्या में एक सरल लेकिन इसके बावजूद एक कट्टर विचार हैः हर मानव जीवन, पुरुष या महिला, मुस्लिम और गैर मुस्लिम, अमीर या गरीब, उत्तरी या दक्षिणी सबका वास्तविक मोल समान है।

और

एक प्रगतिशील मुस्लिम एजेंडे का संबंध इस कल्पना से है कि मानवता के सभी सदस्यों का वही वास्तविक मोल है क्योंकि, जैसा कि कुरान हमें याद दिलाता है कि हम में से हर एक खुदा की दी हुई सांस के साथ अपने अस्तित्व को बनाए हुए है।

सल्तनत के केंद्र के भौगोलिक क्षेत्रों से लोकतंत्र और मानवाधिकार पर होने वाली बातचीत को संदेह की नज़र से देखा जाता है क्योंकि उसे अक्सर औपनिवेशिक प्रक्रिया के अपने ही भीतर मौजूद दुश्मनों के रूप में काम करने वाला माना जाता है। उसे भी शक की नज़र से देखा जाता है क्योंकि यह अपने नैतिक स्तर को पूरा न करने वाला माना जाता है, विशेष रूप से सीधे मुसलमानों (केवल उन्हें ही नहीं) को प्रभावित करने वाले मुद्दों के मामले में।

इस सिलसिले में एक प्रगतिशील मुसलमान होने के एक महत्वपूर्ण पहलू और उद्देश्य के बारे में ईज़ाक दलील देते हैं कि, "सच बोल कर ऊंचाई पर पहुंचना" बज़रिया i) बेरहमी से खुद की आलोचना जो प्रगतिशील मुसलमान की विचारधारा के मानने वाले को इस तरह एक न्यायपूर्ण समाज के स्तर के अनुसार बनाता है जो उन्हें किसी के एजेंडे में साझीदार बनने की प्रक्रिया या सल्तनत के विस्तार से रोकता है, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य इस्लाम के साथ मशगूलियत है। II)  i.) की रौशनी में जो इसमें शामिल हैं उनकी फितरी इंसानियत को खतरे में डाले बिना); और तीसरे) उम्मत के अंदर उन लोगों से मुकाबला जो मुस्लिम समाज की रक्षा के नाम पर मुसलमानों के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

इसका मतलब ये है कि एक प्रगतिशील मुसलमान विभिन्न आलोचना में व्यस्त है जिसके लिए "एक बहुआयामी दृष्टिकोण शर्त है जो एक साथ बहुत से समुदायों और वार्तालाप, जिन पर प्रगतिशील मुस्लिम कर रहे हैं। इसका मतलब है कि अन्याय के ढांचे को वैचारिक और जातीय विकास से अलग विरोध करने, तख्ता पलटने की कोशिश करना है।

प्रत्येक मनुष्य के सम्मान पर जोर देते हुए सामाजिक और लैंगिक न्याय और कम न हो सकने वाले धार्मिक बहुलवाद के मूल्य, प्रगतिशील मुसलमान के नैतिक और धार्मिक दृष्टिकोण के पीछे मूल प्रेरणा की अहम वजह हैं। जैसे प्रगतिशील मुसलमान की विशेषताओं में इस्लाम में रहते हुए इसकी आलोचना, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार के एक आधार के रूप में लैंगिक समानता, धार्मिकता और जातीय बहुलवाद का एक रूप है और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की एक प्रक्रिया के द्वारा एक न्यायपूर्ण और बहुलतावादी समाज के लिए लगातार सख्त कोशिश करनी है।

खासकर लैंगिक न्याय और समानता, प्रगतिशील मुसलमान के मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि ये "सामाजिक न्याय और बहुलतवाद के व्यापक भय के लिए माप की छड़ी के रूप में देखा जाता है। इस तरह लैंगिक न्याय और समानता एक प्रगतिशील मुस्लिम के रूप में किसी को मानने के लिए एक आवश्यक और बुनियादी विशेषता मानी जाती है। साफ़ी के शब्दों में

... कुल मिलाकर मुस्लिम समुदाय न्याय हासिल नहीं कर सकता है जब तक कि मुसलमान महिलाओं के लिए न्याय की गारंटी न हो जाए। संक्षेप में लैंगिक न्याय के बिना इस्लाम की प्रगतिशील व्याख्या नहीं हो सकती है। लैंगिक न्याय महत्वपूर्ण, अपरिहार्य और अनिवार्य है। लंबी अवधि में किसी भी प्रगतिशील मुसलमान की व्याख्या छोटे और बड़े वर्ग में से किस हद तक लैंगिक न्याय की स्थित बदलने में सफल हुआ, उसके आधार पर फैसला किया जाएगा।

इस तरह के प्रगतिशील मुसलमान कानूनी रूप से तस्लीम शुदा इस्लामी तहरीके निस्वां के लिए कोशिश करते हैं।

प्रगतिशील मुसलमानों का 'कास्मोविज़न' में आध्यात्मिकता और आपसी संबंध पर विशेष जोर दिया गया है जो अपने समकालीन इंसानों के साथ "रोमान्टिक या मेयारी" सूफी नैतिकता में से कुछ तालिमात की बुनियाद पर आधारित है जो हमेशा एक दूसरे में खुदा की उपस्थिति और उसकी विशेषताओं को याद करते हैं। प्रगतिशील मुसलमान के दृष्टिकोण को वास्तव में सूफी तहज़ीब के इरफान की एक दानिश्वराना शक्ल कहा जा सकता है।

प्रगतिशील मुसलमान की चिंता का एक और महत्वपूर्ण पहलू बुनियादी स्तर पर सरगर्मी है जो उसके स्तर और मूल्यों को प्रदर्शित करता है। सफ़ी के शब्दों में,

एक प्रगतिशील संकल्प का मतलब सामाजिक न्याय के मुद्दों के साथ प्रतिबद्ध रहने के हैं क्योंकि ये मुस्लिम और गैर मुस्लिम वर्ग में बुनियादी सतह पर हक़ाएक़ से आशकार रहने की ख्वाहिश से है। बसारत और सरगर्मी दोनों जरूरी हैं। बसारत के बिना कार्रवाई का कोई खास मतलब नहीं है इसी तरह बिना अमल के बसारत जल्द ही बेमानी हो जाती है।

प्रगतिशील मुसलमान की विचारधारा के समर्थक मुस्लिम और गैर मुस्लिम दुनिया भर में फैल जाएं। कई प्रसिद्ध प्रगतिशील मुस्लिम बुद्धिजीवी पश्चिम में रहते हैं और पश्चिमी विश्वविद्यालयों में शिक्षा देते हैं। उनमें से कुछ ने इन संस्थाओं से स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल है, और कुछ मामलों में इस्लामी अध्ययन में पारंपरिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। सफ़ी के शब्दों में:

अपने स्वतंत्र विचार वाले मुसलमान पूर्वजों के विपरीत, प्रगतिशील मुसलमान, मुस्लिम महिला और पुरुषों में सक्रिय कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के एक व्यापक गठबंधन का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रगतिशील मुसलमानों के अभियान की प्रमुख विशेषताओं में इस्लामी आधुनिकता के इलमबरदार के तौर पर महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी और साथ ही साथ मानवाधिकारों के संबंध में एक व्यापक सम्बद्धता के हिस्से के रूप में महिलाओं के अधिकार को उजागर करने का प्रयास किया गया है।

हालांकि प्रगतिशील मुसलमानों की चिंता का एक और महत्वपूर्ण पहलू ये है कि इसने इस्लामी परंपरा के कुछ सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू को मुख्य भूमिका दी है इसके अलावा इस्लामी शिक्षा के बुनियादी स्रोत कुरान और सुन्नत की व्याख्या का सबसे अच्छा ज़रिया नैतिक- धार्मिक आधार हैं। जैसे प्रगतिशील चिंता की विशेषता "इस्लाम के बौद्धिक विरासत के नैतिक और मानवीय पक्ष की खोज और नैतिक सुस्ती खिलाफ एक शक्ति है जो इसमें आ गई है।" प्रगतिशील विचार के एक महत्वपूर्ण समर्थक अल-फज़्ल इसके केंद्रीय मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में तर्क देते हैं कि इस्लाम के व्यापक और समृद्ध नैतिक परंपरा में सौंदर्य को फिर से हासिल करना और उसकी नैतिक आवश्यकताओं की खोज करना है"। इस दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में प्रगतिशील विचार मांग करता है कि मुसलमानों के कानूनी और नैतिक दर्शन के अधिक जटिल और बुनियादी कल्पनाओं का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना है और ज़रूरी दर्शन अमल से जुड़ी मिसालों मे परिवर्तन, जिसे मूसा, सल्तनत के बाद के इस्लाम का संदर्भ कहते हैं। इस सिलसिले में प्रगतिशील विचार वहाबी (सिर्फ यही नहीं) विचारधारा के मानने वालों के द्वारा धर्म में अज़ीम फ़िक्री कमजोरी लाने का सख्ती से विरोध करता है"।

अंत में, प्रगतिशील विचार धार्मिक शास्त्रों की व्याख्या (तशरीह) में कम न किये जा सकने वाली धार्मिक और जातीय बहुलवाद पर जोर देता है और धार्मिक अनुभव को गुणवत्ता और सभी इंसानों के खालिक (निर्माता) की इच्छा माना जाता है। इसलिए हर धर्म अद्वितीय माना जाता है और अपने व्यापक तसव्वुरे कायनात के अंदर ही एक आत्मनिर्भर, पूरी तरह चलाता हुआ माना जाता है।

डॉ. अदिस दुदरीजा, मेलबर्न विश्वविद्यालय के इस्लामिक स्टडीज़ विभाग में रिसर्च एसोसिएट हैं।

URL for English article: https://newageislam.com/islam-pluralism/salient-features-progressive-muslim-thought/d/7163

URL for Urdu article: https://www.newageislam.com/urdu-section/social-gender-justice-/d/7197

URL for this article: https://newageislam.com/hindi-section/salient-features-progressive-muslim-thought/d/7207


Loading..

Loading..