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Hindi Section (05 Sep 2019 NewAgeIslam.Com)



War Mongering is Not Jihad--Part-2, In Islam ParadiseIs not Awarded on Killing Innocent Human Beings जन्नत आतंकवाद मचाने पर नहीं बल्कि सच्चे दिल से तौबा करने पर अता की जाती है



मिसबाहुल हुदा क़ादरी, न्यू एज इस्लाम

३० अगस्त २०१९

अल्लाह पाक का इरशाद है;

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا تُوبُوا إِلَى اللَّهِ تَوْبَةً نَّصُوحًا عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُكَفِّرَ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ يَوْمَ لَا يُخْزِي اللَّهُ النَّبِيَّ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ ۖ نُورُهُمْ يَسْعَىٰ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَانِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۔ (التحریم: 8)

अनुवाद: “ऐ ईमानदारों ख़ुदा की बारगाह में साफ़ ख़ालिस दिल से तौबा करो तो (उसकी वजह से) उम्मीद है कि तुम्हारा परवरदिगार तुमसे तुम्हारे गुनाह दूर कर दे और तुमको (बेहिश्त के) उन बाग़ों में दाखिल करे जिनके नीचे नहरें जारी हैं उस दिन जब ख़ुदा रसूल को और उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं रूसवा नहीं करेगा (बल्कि) उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दाहिने तरफ़ (रौशनी करता) चल रहा होगा और ये लोग ये दुआ करते होंगे परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर हैl” (अल तहरीम: ८)

आज आतंकवादियों के निशाने पर इस कौम का मुस्लिम युवक हैl उन्होंने दीन की शिक्षाओं से अनभिज्ञ युवकों को अपने धोके के जाल में गिरफ्तार करने के ऐसे ऐसे गुण (Tactics) ईजाद कर रखे हैं कि अच्छे अच्छे लोग आसानी से उनके शिकार बन जाएंl उनके लिट्रेचर पढ़ने और उनके बयान सुनने से यह स्पष्ट होता है कि वह जिहाद को जन्नत का एक वाहिद सीधा रास्ता बयान करते हैं, और दिनी शिक्षाओं से दूर ऐसे युवकों को जिनके दिन रात गुनाहों और अल्लाह की अवज्ञा में गुजरते हैं उनकी यह महसूर कुन बातें इतनी दिलकश लगती हैं कि वह एक लम्हे के लिए भी बिना सोचे समझे आतंकवादियों का लुकमा बन जाते हैंl उन्हें यह लगता है कि अपने गुनाहों से खलासी पाने, अल्लाह की रज़ा हासिल करने और जन्नत का हकदार बनने का एक वाहिद सुनहरा मौक़ा यह है कि जिहाद किया जाएl

“अगर बाख गए तो ग़ाज़ी वरना शहीद” यही वह फितना अंगेज़ नारा है जो आतंकवाद के सिद्धांत निर्माताओं को नादाँ मुस्लिम युवाओं की नज़र में मसीहा बना देता है और एक मसीहा के भेस में यह भेड़िये मुस्लिम युवकों से सभी इंसानी मूल्यों, भाईचारे, मुरव्वत, प्यार के जज़्बात छीन लेते हैं और उन्हें मानसिक तौर पर इतना बीमार कर देते हैं कि जिनके खिलाफ उनके दिल व दिमाग में दुश्मनी और नफरत का ज़हर भरा जाता है’ चलते फिरते बम धमाकों और आत्मघाती हमलों के जरिये उनकी जिंदगियां तबाह व बर्बाद कर डालते हैंl

ऐसी स्थिति में हमें ऐसे नादाँ युवकों को यह बताने की आवश्यकता है कि हम सब इंसान हैं और इंसानों से गलतियां होती रहती हैंl गुनाह इंसानों से ही सरज़द होते हैं इसलिए अल्लाह पाक ने इन गुनाहों से खुद को पाक करने के लिए कयामत तक हमारे लिए तौबा का दरवाज़ा खोल रखा हैl और हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह भी फरमाया है कि “सच्ची तौबा करने वाला गुनाहों से ऐसे पाक हो जाता है जैसे वह अभी अभी साफ़ व शफ्फाफ मां के पेट से पैदा हुआ हो”l इसलिए, अब जैसे अपने गुनाहों से निजात, अल्लाह की रज़ा और जन्नत चाहिए इसे जिहाद के नाम पर आतंकवाद का रास्ता विकल्प कर के बेगुनाह इंसानों का खून नाहक बाहाने की आवश्यकता नहीं है बल्कि वह सच्चे दिल से सीधा तौबा के दरवाज़े पर आ जाए और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी चाहे अगर इसके गुनाह समुंद्र के झाग के बराबर भी होंगे फिर भी अल्लाह उन्हें माफ़ कर देगा और उन्हें अपनी रज़ा और जन्नत से नवाज़ देगाl

अल्लाह पाक का इरशाद है;

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا تُوبُوا إِلَى اللَّهِ تَوْبَةً نَّصُوحًا عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُكَفِّرَ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيُدْخِلَكُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ يَوْمَ لَا يُخْزِي اللَّهُ النَّبِيَّ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ ۖ نُورُهُمْ يَسْعَىٰ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَبِأَيْمَانِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۔ (التحریم: 8)

ऐ ईमानदारों ख़ुदा की बारगाह में साफ़ ख़ालिस दिल से तौबा करो तो (उसकी वजह से) उम्मीद है कि तुम्हारा परवरदिगार तुमसे तुम्हारे गुनाह दूर कर दे और तुमको (बेहिश्त के) उन बाग़ों में दाखिल करे जिनके नीचे नहरें जारी हैं उस दिन जब ख़ुदा रसूल को और उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं रूसवा नहीं करेगा (बल्कि) उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दाहिने तरफ़ (रौशनी करता) चल रहा होगा और ये लोग ये दुआ करते होंगे परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर हैl (अल तहरीम: ८)

اَفَلَا یَتُوْبُوْنَ اِلَى اللہِ وَیَسْتَغْفِرُوْنَہٗ وَاللہُ غَفُوْرٌ رَّحِیْمٌ۔(المائدۃ:74)

तो ये लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और अपने (क़सूरों की) माफ़ी क्यों नहीं मॉगते हालॉकि ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हैl (अल मायदा: ७४)

وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ- وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ (سورۃ الانعام:55)

अनुवाद: और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (54) और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले (55) (अल अनआम:५४-५५)

إِنَّمَا التَّوْبَةُ عَلَى اللَّهِ لِلَّذِينَ يَعْمَلُونَ السُّوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ يَتُوبُونَ مِن قَرِيبٍ فَأُولَٰئِكَ يَتُوبُ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا(سورۃ النساء:17)

अनुवाद: मगर ख़ुदा की बारगाह में तौबा तो सिर्फ उन्हीं लोगों की (ठीक) है जो नादानिस्ता बुरी हरकत कर बैठे (और) फिर जल्दी से तौबा कर ले तो ख़ुदा भी ऐसे लोगों की तौबा क़ुबूल कर लेता है और ख़ुदा तो बड़ा जानने वाला हकीम हैl (अन्निसा: १७)

हदीस ए कुदसी

رسولُ اللهِ صَلّىَ اللهُ عَلَیہ وَسلم يَقُول:‏‏‏‏ " قَال اللهُ تبارك وتعالى:‏‏‏‏ يا اِبن آدم اِنَّك مَا دَعَوتَنی وَ رَجوتَنی غَفَرتُ لك عَلى ما كَان فَيك ولا ابالی يا اِبن آدم لَو بَلَغَت ذُنُوبك عنانَ السماءِ ثُم استغفرتَنی غَفَرتُ لَك و لا ابالی يا اِبن آدم اِنك لو اَتَيتنی بقراب الارض خطايا ثم لَقيتنی لاَ تُشرِك بی شَيئا لَاتيتك بقرابها مغفرة۔" (ترمذی: رقم الحدیث - 3540)

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि “अल्लाह ने फरमाया: ऐ इब्ने आदम! बेशक जब तक तू मेरे हुजुर इल्तिजा करता रहे गा और मेरी ज़ात से अपनी उम्मीद वाबस्ता रखे गा मैं तुझे बख्शता रहूँगा, अगर चे तेरे गुनाह अधिक हों, और मैं सबसे बेनियाज़ हूँl ऐ इब्ने आदम! अगर तेरे गुनाह आसमान को पहुँच जाएं और फिर तू मुझसे माफ़ी मांगे तो मैं तुझे बख्श दूंगा और मैं सबसे बेनियाज़ हूँl ऐ इब्ने आदम! अगर तेरे गुनाह से ज़मीन भर जाए और फिर तू मेरी तरफ मगफिरत तलब करने के लिए हाथ फैलाए जबकि तू ने मेरे साथ शिर्क नहीं किया हो तो मैं तेरी तरफ अता ए मगफिरत के साथ आकर्षित हूँगा”l

हदीसे नबवी

فإن تاب واستغفر صقل قلبه (ترمذی)

अनुवाद:अगर इंसान गुनाहों से तौबा कर ले तो उसका दिल चमक उठता हैl

ज़ैनुल इस्लाम हज़रत अब्दुल करीम बिन हवाज़िन बिन अब्दुल मालिक अल कसीरी (मृतक ४६५ हिजरी) रिसाला कशीरिया में लिखते हैं:

أخبرنا أبو بكر محمد بن الحسين بن فورك، رحمه الله، قال: أخبرنا أحمد بن محمود بن خراّز قال: حدثنا محمد بن فضل بن جابر، قال حدثنا سعيد بن عبد الله قال: حدثنا أحمد بن زكريا، قال: سمعت أنس بن مالك يقول: سمعت رسول الله صلى الله عليه وعلى آله وسلم، يقول: "التائب من الذنب كمن لا ذنب له، وإذا أحبَّ الله عبداًلم يضره ذنب"، ثم تلا: "إن الله يحب التوّابين ويحب المتطهرين"، قيل: يا رسول الله، وما علامة التوبة؟ قال "الندامة"(بحوالہ رسالہ قشیری۔ مصنفہ عبد الكريم بن هوازن بن عبد الملك القشيري (المتوفى: 465هـ صفحہ 95)۔

अनुवाद: हज़रतअनस बिन मालिक (रज़ीअल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं कि मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह फरमाते हुए सूना कि “गुनाहों से तौबा करने वाले की मिसाल उस व्यक्ति जैसी है जिसके जिम्मे कोई गुनाह नहींl और जब अल्लाह किसी (ख़ास) बंदे से मोहब्बत करता है तो उसे कोई गुनाह नुक्सान नहीं पहुंचाता”, फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत तिलावत फरमाई “(إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ التَّوَّابِينَ وَيُحِبُّ الْمُتَطَهِّرِين 2:222)अनुवाद: बेशक अल्लाह बहुत तौबा करने वालों से मोहब्बत फरमाता है और खूब पाकीज़गी इख्तियार करने वालों से मोहब्बत फरमाता हैl इरफानुल कुरआन”l सहाबा ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तौबा की अलामत क्या है (अर्थात बंदे के अंदर मासबक गुनाहों पर एहसास ए निदामत व शर्मिंदगी पैदा हो जाए)”l

और

أخبرنا عليُّ بن أحمد بن عبدان الأهوازي، قال: أخبرنا أبو الحسين أحمد بن عبيد الصفار، قال: أخبرنا محمد بن الفضل بن جابر قال: أخبرنا الحكم بن موسى، قال: حدّثنا غسّان بن عبيد عن أبي عاتكة طريف بن سليمان، عن أنس بن مالك۔ أن النبي صلى الله عليه وعلى آله وسلم، قال: "ما من شيء أحب إلى الله من شاب تائب"(بحوالہ رسالہ قشیری۔ مصنفہ عبد الكريم بن هوازن بن عبد الملك القشيري (المتوفى: 465هـ۔صفحہ 95)۔

अनुवाद: हज़रत अनस बिन मालिक रज़ीअल्लाहु अन्हु से मरवी है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया “अल्लाह की बारगाह में तौबा करने वाले जवानों से अधिक महबूब कोई व्यक्ति नहींl”

पवित्र कुरआन की उल्लेखित आयतों और हदीसों के इतने उल्लेख से अब इस बात में कोई शक बाकी नहीं रहता कि गुनाहों से निजात हासिल करने के लिए अब हमारे पास सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह में तौबा करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं हैl अगर उन तथाकथित जिहादियों के पास ऐसी कोई आयत या कोई हदीस हो कि जिससे यह साबित होता हो कि बेगुनाह इंसानों का खून बहाने से अल्लाह की रज़ा हासिल होती है तो उन्हें पेश करना चाहिए, इसके उलट कुरआन और हदीसों में ऐसी अनगिनत हदीसें वारिद हुई हैं जिनसे यह साबित होता है कि बेगुनाह इंसानों का खून बहाने वाले यह आतंकवादी जहन्नम का इंधन बनने वाले हैंl’

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URL for Part-2: http://www.newageislam.com/urdu-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad--part-2,-in-islam-paradiseis-not-awarded-on-killing-innocent-human-beings--جنت-دہشت-گردی-مچانے-پر-نہیں-بلکہ-صدق-دل-سے-توبہ-کرنے-پر-عطا-کی-جاتی-ہے/d/119615

URL: http://www.newageislam.com/hindi-section/misbahul-huda,-new-age-islam/war-mongering-is-not-jihad--part-2,-in-islam-paradiseis-not-awarded-on-killing-innocent-human-beings--जन्नत-आतंकवाद-मचाने-पर-नहीं-बल्कि-सच्चे-दिल-से-तौबा-करने-पर-अता-की-जाती-है/d/119655

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