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Don’t Give Up, Just Try Something New and Look Ahead With Hope  हार न मानें, कुछ नया आज़माएं और उम्मीद के साथ आगे की ओर देखें
Maulana Wahiduddin Khan

मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ और मेरी यह जानने की कोशिश होती है कि वह कैसे ऐसी लत का शिकार हो गए हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, मैं ने एक व्यक्ति से इसकी वजह पूछी, वह मुस्कुराया और मुझ से कहा “यह मेरे लिए एक भुलावा हैबिट है”l उसने मुझसे कहा वह अच्छी तरह यह जानता है कि यह एक जानलेवा लत है लेकिन इसके बावजूद मैंने इसे अपनाया ताकि मेरा दर्द कम हो सकेl

 

The Bogey of Islamophobia  इस्लामोफोबिया का दानव
Arshad Alam, New Age Islam

ब्रिटेन में रुढ़िवादियों का चेहरा माने जाने वाले ब्रूनी वारसी ने इस मौके पर टोरेस को अपने अन्दर सहज तौर पर मौजूद इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी तास्सुब पर नज़र करने को कहाl अब तक अपनी पार्टी की ओर से दबाव के बावजूद बोरिस जॉन्सन ने माफी मांगने से इनकार कर दिया हैl उसके इस स्पष्ट इनकार के पीछे कई कारण हो सकते हैं और हो सकता है कि इन्हीं कारणों में से एक ऐसा करके अतिवादी वर्ग का वोट प्राप्त करने का रुढ़िवादी पार्टी का गुमान भी होl

 

कुरआन अपने अनुयायियों को सीमा (हद) से आगे बढ़े बिना कमज़ोर और पिछड़े लोगों की सुरक्षा के लिए केवल रक्षात्मक जंग की अनुमति देता है और इससे इस्लाम हिंसा का मजहब नहीं बनताl इसलिए जो लोग धार्मिक अत्याचार के खिलाफ बचाव में जंग की अनुमति से संबंधित कुरआनी आयतों को गलत अंदाज़ में पेश कर रहे हैं और अमन के साथ रहने वाले बेगुनाह व्यक्तियों को क़त्ल करने के लिए उनका प्रयोग कर रहे हैं वह असल में इस्लाम के मूल उद्देश्य की खिलाफवर्जी कर रहे हैं जो कि अमन का कयाम हैl

 

On the Meaning of Khatm e Nabuwwat  खत्मे नबूवत का अर्थ
Naseer Ahmed, New Age Islam

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत को उलेमा और इमामों की इताअत से भी आज़ाद रखा गया है, हर मुसलमान स्वयं कुरआन का अध्ययन कर सकता है और अपनी समझ के अनुसार उस पर अमल भी कर सकता हैl कुरआन एक ऐसी किताब है जो हक़ के रास्ते के चाहने वालों के लिए हर चीज को ऐसा स्पष्ट करके पेश करती है जिसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रहती है, इसमें किसी भी बहाने के तहत किसी भी बातिल की पैरवी की कोई गुंजाइश नहीं हैl अल्लाह ने हम में से हर एक को कुरआन के बारे में अपने इल्म और कुरआन की बेहतर समझ के अनुसार इसकी पैरवी करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की हैl

 

How Imran Khan Will Set Up Medina-Like Islamic Welfare State?  इमरान खान मदीना की तरह इस्लामी कल्याणकारी राज्य कैसे स्थापित करेंगे?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

ध्यान देने योग्य बात यह है कि आम चुनाव से पहले पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने अपने मेनू फेस्टो में भी स्पष्ट रूप से अपना मिशन पाकिस्तान को एक ऐसा इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाना प्रदर्शित किया था जो मानवीय और न्यायप्रिय सिद्धांतों पर आधारित होगी जिस पर मीसाक़े मदीना का आधार थाl जो कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के राज्य में मानवाधिकार का एक लिखित घोषणापत्र थाl

 

The Myth of Jahiliyyah  जाहिलियत के दिनों का अफ़साना
Arshad Alam, New Age Islam

इस्लाम से पहले का वह दौर जैसा कि उसे जाहिलियत के दिन कहा जाता है वैसा ही है जैसा दुनिया के दुसरे क्षेत्रों में अंधियारे का राज रह चुका हैl और जिस प्रकार रौशन ख़याली ने यूरोप को अँधेरे युग से निकाल कर आधुनिकता की दहलीज पर ला कर खड़ा कर दिया इसी तरह इस्लाम ने भी उस अरब क्षेत्र और उसके नागरिकों को अत्याचार, अज्ञानता, बर्बरता और वहशत के अंधियारे से निकाल कर मानवता, इल्म व फिक्र, सभ्यता व संस्कृति, और रौशन ख़याली की एक नई सुबह से परिचित कियाl इस्लाम की आधुनिक इतिहास में सैयद क़ुतुब और मौदूदी के अनुसार अब भी इस दुनिया के अधिक क्षेत्र जाहिलियत के अँधेरे में डूबे हुए हैं और अपनी इस स्वयंभू अज्ञानता के अँधेरे से आज़ाद होने के लिए अब भी इस्लाम का मुंह तक रहे हैंl

 

हदीस के शारेहीन ने सामान्यतः इस भविष्यवाणी की व्याख्या यह की है कि ईसा अलैहिस्सलाम के नाज़िल होने के मौके पर कुफ्र का अंत और इस्लाम का बोलबाला हो जाएगाl तथापि निकटतम अतीत के प्रसिद्ध मुहद्दिस अल्लामा अनवर शाह कश्मीरी रहमतुल्लाह अलैह ने इस राय से मतभेद व्यक्त किया हैl उनका कहना है कि रिवायत में उस मौके पर इस्लाम के ग़ालिब आने का जो ज़िक्र हुआ है, उससे मुराद पूरी धरती नहीं, बल्कि सीरिया और उसके आस पास का विशिष्ट क्षेत्र है जहां सैयदना मसीह का नुज़ूल होगा और जो उस समय इस्लाम वालों और कुफ्र वालों के बीच दुविधा और युद्ध का केंद्र होगाl

 

Need of the Hour Is for Pakistan to Adopt the Prophet’s Delinking Policy  पाकिस्तान का नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की डिलिंकिंग नीति पर अग्रसर होना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता
Maulana Wahiduddin Khan

इतिहास इस वास्तविकता का गवाह है कि इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की डिलिंकिंग (delinking) नीति सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तौर पर जबर्दस्त साबित हुईl इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें नए सिरे से योजना बनाने और कौम के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित करने का मौक़ा मौजूद हैl दुसरे विश्व युद्ध के बाद बहुत सारे देशों ने इस नीति को अपनाया जिसके आधार पर उन्हें बड़ी सफलताएं मिलींl जर्मनी और जापान ने शिक्षा और वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में जबरदस्त सफलता प्राप्त कीl

 

Indian Secularism: Non-Religious, Irreligious or Anti-Religious?  भारतीय सेकुलरिज्म: गैर मज़हबी मज़हब बेज़ार या मज़हब विरोधी
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

बेशक भारत जैसे एक बहु सांस्कृतिक और बहु धार्मिक देश में सेकुलरिज्म एक आवश्यक भाग बन चुका हैl सेकुलरिज्म भारत की विशेषता बन चुकी है, और इसकी बुनियादी वजह यह है कि यह सभी धर्मों को बराबर सम्मान प्रदान करता है और इसके संविधान में सभी देशवासियों को अपने अपने धर्मों के अनुसार गुज़र बसर करने की अनुमति हैl इसलिए सभी धर्मों के अनुयायियों के लिए आवश्यक है कि वह भारतीय सेकुलरिज्म के इस बुनियादी कल्पना को दिमाग में रखें और देश में अमन व शांति कायम रखें, इसके लिए उन्हें सामूहिक रूप में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के प्वाइंट को मजबूत करना होगाl

 

The Language of the Quran  कुरआन की भाषा
Naseer Ahmed, New Age Islam

कुरआन के अन्दर हर कीवर्ड और कल्पना को उन दूसरी आयतों की सहायता से अच्छी तरह समझा जा सकता है जिनमें वह कीवर्ड (कलीदी अलफ़ाज़) वारिद हुए हैं और इससे किसी भी प्रकार की व्याख्या की आवश्यकता भी दूर हो जाती है और इस प्रकार कुरआन की हर आयत से एक स्पष्ट अर्थ निकाला जा सकता है और कुरआन का यह दावा बिलकुल सहीह है कि यह एक स्पष्ट किताब हैl

 

Why are Islamic countries not coming forward to take Rohingyas?  इस्लामी देश रोहंगिया मुसलामानों की सहायता के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं? क्या मानवाधिकार केवल मुसलामानों के लिए है?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

न्यू एज इस्लाम के एडीटर जनाब सुलतान शाहीन ने प्राइम टाइम टीवी के बहस में एक और महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठाया कि क्यों इस्लामी देश रोहंगिया मुसलामानों को पनाह देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि “सीरिया के शरणार्थियों को जर्मनी और दुसरे योरोपियन देशों ने पनाह दी है लेकिन मुस्लिम देश उन्हें शरणार्थी का स्थान देकर भी उनकी सहायता नहीं कर रहे हैंl यह वास्तव में वैश्विक मुस्लिम बिरादरी के लिए एक सामूहिक रूप से अपमान की बात है कि इस्लामी देश रोहंगिया शरणार्थियों से अपना मुंह मोड़ रहे हैं”l

 

Why Should an Academic Course on Islamist Terror Rile Muslims?  इस्लामी आतंकवाद पर शैक्षणिक कोर्स पेश किए जाने से मुसलमानों में गुस्सा क्यों?
Arshad Alam, New Age Islam

उन्हें इस्लाम की किसी भी मौजूदा आलोचना पर खुल कर बहस करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए इस आत्मनिरीक्षण के बिना यह समझना बहुत कठिन है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान की हैसियत से किस तरह हमारे आस पास की दुनिया के साथ सद्भाव स्थापित करने में सफल होंगेl अगर हम यह स्वीकार नहीं करते कि किसी दुसरे धर्म की तरह इस्लाम भी आतंकवाद का कारण बन सकता है तो हमारे अन्दर एक ऐसा काल्पनिक दृष्टिकोण परवान चढ़ेगा कि जिसमें मुसलमान मज़लूम दिखेंगे और 11/9 जैसी आतंकवादी घटनाएं ईसाईयों की साज़िश लगेगीl

 

Parents’ Rights After Their Death from Islamic Perspective  माता-पिता की मौत के बाद संतान पर माता-पिता के अधिकार
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

माता-पिता के मर जाने के बाद औलाद को चाहिए कि वह उनके जनाज़े की तजहीज़, गुस्ल व कफ़न व नमाज़ व तद्फीन को सुनन व मुतहेब्बात की रिआयत के साथ अदा करें, उनके लिए हमेशा दुआ व इस्तिग्फार करते रहें, सदका व खैरात व नेक काम का सवाब उन्हें हमेशा पहुंचाते रहें, अपनी नमाज़ और रोजों के साथ उनके लिए भी नमाज़ पढ़ें और उनके लिए भी रोज़े रखें, माता-पिता पर कोई उधार हो तो उसे जल्दी अदा करें, उनपर कोई फर्ज़ रह गया हो तो अपनी कुदरत के अनुसार उसे पूरा करें जैसे उनकी तरफ से हज्जे बदल कराना आदि, अगर माँ बाप ने कोई जायज और शरई वसीयत की हो तो उसके निफाज़ की पूरी कोशिश करना, उनकी कसम पुरी करना, हर जुमे को उनके कब्र की ज़्यारत के लिए जाना, वहाँ यासीन शरीफ की तिलावत करना और उसका सवाब उनकी रूह को पहुंचाना, माँ बाप के रिश्तेदारों, दोस्तों के साथ उमर भर नेक सुलूक करना और उनका सम्मान करना, और इसी तरह कोई गुनाह करके उन्हें कब्र में तकलीफ ना पहुंचाना आदिl

 

Refuting the Jihadist Interpretation of Surah Nisa - Verse 89  चरमपंथियों के माद्ध्यम से की गई सुरह निसा की आयत 89 की गलत व्याख्या का रद्द
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

अहम् बात यह है कि जंग से संबंधित आयतें केवल जंगों तक ही सीमित हैंl केवल एक राज्य या देश की हुकूमत ही जंगी नियम बना सकती हैl आम नागरिकों को किसी भी गिरोह के खिलाफ जंग का एलान करने या कानून अपने हाथों में लेने की अनुमति नहीं हैl इसके अलावा, जंग से संबंधित आयतों का इतलाक उन देशों पर नहीं किया जा सकता है जहां मुस्लिम और गैर मुस्लिम अपने एकमत कानून या किसी प्रकार के अमन समझौते या संविधान के तहत अमन के साथ रहते हैंl इसलिए, आतंकवादी किसी भी प्रकार अपनी कारस्तानियों को वैधता प्रदान करने के लिए आयत 4:89 नक़ल नहीं कर सकतेl अपने जुर्म को सहीह साबित करने के लिए इसी तरह वह दुसरे कुरआन की आयतों का हवाला पेश करते हैं, और यह केवल इस्लाम और शरीअत पर झूट बाँधना हैl

 

A Truthful Person Experiences  एक सच्चा मनुष्य इस संसार में ही उन चरणों से गुज़र जाता है जिनसे पापी आख़िरत (न्याय के दिन) में गुज़रने वाले हैं
Maulana Wahiduddin Khan

सच यह है कि एक सच्चा मनुष्य इस संसार में ही उन चरणों से गुज़र जाता है जिनसे गुनाहगार आख़िरत में गुज़रने वाले हैंl एक पापी मनुष्य खुदा को देखने के बाद उसकी बारगाह में विनम्रता का सर झुकाए गा जबकि एक नेक मनुष्य खुदा को देखे बिना ही अपना सिर उसकी आज्ञाकारिता में झुका देता हैl

 

Discussions Should Be Held with Open Heart, Otherwise the Door to Reform will not Open  बात खुलकर होनी चाहिए अन्यथा सुधार का दरवाजा नहीं खुलेगा
Dr Quaisar Shamim, New Age Islam

एक बदलता हुआ लोकतांत्रिक समाज जिसमें बच्चों के अधिकारों पर इतना जोर है और जो इस मामले में नई दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चलना चाहता है, उसमें ऐसी बातें कब तक नज़र अंदाज़ हो सकती हैं अगर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का, साहसिक चौतरफा योजना नहीं बनाया जाएगा तो लिपा पोती वाली बातों से कुछ नहीं होने वाला है; साहसिक इसलिए कि मसलेहत और मुनाफिकत के माहौल में सच बोलने और जवाबदेही करने के लिए साहस की आवश्यकता होगीl यह काम अगर खुद नहीं करेंगे तो समाज और उसका कानून करेगाl केवल बवाल मचाने से कुछ नहीं होने वाला हैl

 

The Rawda Mosque Attack in Sinai, Egypt  सीनाई मिस्र में रौज़ा मस्जिद पर हमला: अल्लाह की तस्बीह और तजसीम से संबंधित सलफी विचारधारा का एक हिंसक धमाका
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

हाल ही में अल अज़हर ने अपने सीनियर इमामों और इस्लामी उलेमा को सांप्रदायिक पूर्वाग्रह भड़काने वाली सभी प्रकार की किताबों से मिस्री मस्जिदों को पाक करने के लिए नियुक्त किया हैl अपने एक अरबी तर्जुमान में अल अज़हर ने अपनी महत्वपूर्ण इस दर का इज़हार किया है कि हमारा उद्देश्य इस्लाम के बुनियादी संदेश को सुरक्षित करने के लिए देश में प्रचलित शाफई मकतबे फ़िक्र पर आधारित शिक्षाओं की रौशनी में मस्जिद के इमामों को ट्रेनिंग देना है जो हिंसक तकफीरियत (मुसलामानों के क़त्ल का जवाज़ पेश करने के लिए उन्हें मुर्तद करार देना) की अवहेलना करता हैl

 

Darul Qazas or Sharia Courts: Why both must be Opposed?  दारुल क़ज़ा या शरई अदालतों का विरोध आवश्यक क्यों?
Arshad Alam, New Age Islam

इसलिए स्वयं को ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की फूट डालने वाली राजनीति से अलग रखना मुसलामानों के हित में है और उन्हें यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि भारतीय मुसलामानों का नेतृत्व करने का उन्हें क्या अधिकार हैl क्या वह एक चयनित संगठन है? अगर नहीं, तो फिर किसने उन्हें भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधि आवाज बनने का अधिकार दिया है? क्या वह भारतीय मुसलामानों के विविधता का उपयुक्त तरीके से नेतृत्व करते हैं?

 

No Country for Rohingyas  रोहंगिया मुसलामानों के लिए पृथ्वी की विशालता तंग
Arshad Alam, New Age Islam

शायद अंतिम समाधान को व्यावहारिक रूप दे दिया गया हैl उस भूमि पर नहीं जहां यह नाज़ी विचार पैदा हुआ था बल्कि मयान्मार के दूर दराज इलाके मेंl एक बड़ी मुस्लिम आबादी पर आधारित सबसे गरीब राज्य को फ़ौजी दस्ते वीरान कर रहे हैं और पुरी दुनिया खामोशी के साथ बैठ कर तमाशा देख रही है जैसे कि दुनिया में कुछ हो ही नहीं रहा हैl

 

UAE Fatwa Council to Fight against Rogue Fatwas  संयुक्त अरब अमीरात फतवा काउंसिल आतंकवाद और चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले फतवों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध

शैख़ इब्ने बैय्यह जो (Forum for Promoting Peace in Muslim Societies) के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने कहा कि काउंसिल “समाज, नगर और पुरे विश्व की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले भ्रष्ट फतवों और विनाशकारीप्रभाव से देश की सुरक्षा करने का पूरा प्रयास करेगी”l उन्होंने कहा कि “काउंसिल का किरदार उलेमा के लिए इस मुबारक देश में एक महत्वपूर्ण कदम होगा”l

 

Islamic Concept of Tolerance—an Essential Prerequisite for Peaceful Coexistence  सहिष्णुता की इस्लामी अवधारणा - शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए एक अनिवार्य शर्त
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

हमारी मुस्लिम बिरादरी पर ज़रूरी है कि सबसे पहले हम अपनी ज़िन्दगी के सभी क्षेत्रों में इस्लाम के सहन करने की अवधारणा को विकल्प करें और फिर इसके बाद दूसरी बिरादरियों को भी सहिष्णुता की दावत देंl इसके लिए मैं सभी मुस्लिम बुद्धी जीवियों से प्रार्थाना करता हूँ कि वह सहिष्णुता के मूल्यों और उसकी अहमियत पर एक ख़ास निसाब तैयार करें और अपने मदरसों, स्कूलों, कालिजों, युनिवर्सिटियों और धार्मिक या सेकुलर संस्थाओं में इसकी शिक्षा देंl गैर मुस्लिम संगठनें भी अनिवार्य रूप से ऐसा ही एक पाठ्यक्रम तैयार करें ताकि संगठित तौर पर हमारे समाज और देश के सभी वर्गों में सहिष्णुता की जड़ें मजबूत हो सकेंl

 

Syed Ahmed Khan: When Will We Stop Idolizing Him and Start Engaging With His Ideas?  सैयद अहमद खान: कब हम उनसे अकीदत का इज़हार बंद करके उनके विचारों पर चर्चा शुरू करेंगे?
Arshad Alam, New Age Islam

इनमें सैयद अहमद खान के विचारों पर कोई आलोचनात्मक वार्तालाप करने का प्रयास नहीं किया जाता हैl हमारे समाज में कोई भी इस बात पर गौर नहीं करता कि क्यों दो सौ साल बाद भी हम उन्हीं समस्याओं में उलझे हुए हैं जिनका सामना सैयद अहमद को उनके जीवन में थाl इस्लाम और आधुनिकता के साथ संबंध, शिक्षिक पिछड़ापन और मुस्लिम समाज के अन्दर रूढ़ीवाद के प्रभाव यह वह समस्याएँ हैं जिनका सामना हमें आज भी हैl

 

इस्लाम ने मुसलामानों को अपनी रोजाना की ज़िंदगी के सभी मामलों में मुसलामानों को एतेदाल पसंदी यानी मॉडरेशन की तालीम दि हैl उन्हें शैतान को खुश करने वाली किसी भी किस्म की इन्तेहा पसंदी से बचना चाहिए जो उन्हें सीधी राह से भटका देता हैl एतेदाल पसंदी और तवाजुन की तालीम के साथ मुसलमान इन्तेहा पसंदी की बढ़ती हुई लहरों का मुकाबला कर सकते हैं जिनसे मुसलामानों और गैर मुस्लिमों दोनों को खतरा हैl

 

Muslims Must Seize Any Opportunity to Reform Their Madrasas  मुसलामानों को अपने मदरसों के सुधार के लिए हर एक मौक़ा अपनाना चाहिए
Arshad Alam, New Age Islam

इस बात से सभी परिचित हैं कि मौजूदा स्थिति संतोषजनक नहीं हैl इन संस्थाओं में जो शिक्षा दी जाती है मध्यकालीन और पुरानी है; वहाँ तर्क (मंतिक) की किताबें पढ़ाई जाती हैं जिन पर छात्र कई कई घंटे लगाते हैं लेकिन इससे उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होताl एक समय था जब मदरसों से ना केवल फिकही विशेषज्ञों बल्कि बेहतरीन फलसफी, गणितज्ञ और यहाँ तक कि बेहतरीन वास्तुकार भी पैदा होते थेl लेकिन 1857 के बाद मदरसों में शिक्षा का दायरा केवल धार्मिक शिक्षा तक ही सीमित हो कर रह गयाl

 

Understanding Pranab Mukherjee’s Speech as an Answer to Mohan Bhagwat is Wrong  प्रणब मुखर्जी के भाषण को मोहन भागवत का जवाब समझना गलत है
Arshad Alam, New Age Islam

अगर प्रणब मुखर्जी कोई अंतर पैदा करना चाहते तो वह ख़ास तौर पर मुसलामानों और दलितों के कत्ल ए आम के बारे में जरुर कोई बात करतेl आज जो गलत है उसे स्पष्ट ना करके और इस बात का खुलासा ना करके कि किस तरह उनका संबंध अतिवादी हिन्दू विचार से हैl उन्होंने आर एस एस को एक विशेष अंदाज़ में औचित्य प्रदान किया हैl जो दौर हम देख रहे हैं इस जैसे परेशान करने वाले दौर में बुराई का नाम ना लेना उसे अनदेखा करने के बराबर हैl

 
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  • Supremacism seems to be the bane of almost all Muslim sects. Religious belief without humility is a devilish enterprise.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Maulana Wahiduddin Khan's tafsir is remarkably free from regressive and closed-minded thinking.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Saudi atrocities in Yemen and Chinese brutality in Xinjiang have drawn international outrage. "Where is the Muslim rage?" is an idle and ummah-ist question.
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  • Good article Kaniz sahiba. Relevant portions from the Quran havc been quoted to prove the point. Islam is indeed the religion of peace and co-existence....
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