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A Profound Ideological Crisis In The Indian Muslim Community  सांप्रदायिकता: भारतीय मुस्लिम समाज का एक जबरदस्त सैद्धांतिक संकट
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

न्यू एज इस्लाम के फाउन्डिंग एडीटर जनाब सुलतान शाहीन ने अपने एक हालिया लेख में बजा तौर पर यह सवाल उठाया है की : “साम्प्रदायिक सौहार्द यकीनन एक कदर के काबिल उद्देश्य हैl तथापि, इसका उद्देश्य भी अति महत्वपूर्ण हैl एक दुसरे को काफिर कहने वाले वहाबी देवबंदी और सूफी- बरेलवी फिरके अब कुछ महीनों से एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैंl लेकिन इसका उद्देश्य क्या है?”..........

 

Is Violence the Only Way Out  क्या हिंसा ही अंतिम रास्ता है?
Mushtaq Ul Haq Ahmad Sikander, New Age Islam

जम्मू व कश्मीर में बंदूक का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं हैl राज्य और सरकार सहित विभिन्न जामातें और संगठन अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करती आ रही हैंl 1931 से ही सशस्त्र बागी जमातें कश्मीर की राजनीति का हिस्सा रही हैंl डोगरा सशस्त्र जमातों नें १९४७ में जब की पुरे उपमहाद्वीप भारत में आग लगी हुई थीl लगभग तीन हज़ार मुसलामानों को क़त्ल किया थाl 1947 से ले कर अब तक कई सशस्त्र संगठन हिंसा के इस्तेमाल से हुकूमत को ताखत और ताराज करने और अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने की कोशिश कर चुकी हैंl

 

Refutation of Kashmiri Militant Zakir Musa’s Recent Statement  कश्मीरी उग्रवादी ज़ाकिर मुसा का कश्मीर के नरमदलीय मुसलामानों के सर कलम करने वाले हालिया बयान की तरदीद (भाग-2)
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

भारतीय सेकुलरिज्म की खुसूसियत यह है कि यहाँ सेकुलरिज्म का तसव्वुर दुसरे देशों से अलग है और भारतीय रियासत सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देती हैl भारत के संविधान में 1976 ई० की 42 वीं संसोधन के अनुसार संविधान के मुकद्दमे में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत एक सेकुलर देश हैl हालांकि ना तो भारत के संविधान में और ना ही उसके नियमों में धर्म और राज्य के बीच संबंधो का कोई स्पष्टीकरण पेश किया गया है, तथापि, भारत हर धर्म को स्वीकार करता है और उनके लिए बराबर सम्मान को निश्चित बनाता हैl भारत के शहरियों को पूर्ण स्वतन्त्रता के साथ हिन्दू मत, इस्लाम, ईसाइयत, जैन मत, बुद्ध मत और सिख मत आदि जैसे अपने अपने धर्म पर अमल करने की अनुमति हासिल हैl

 

'Only In the Remembrance of God Is the Solace of Hearts' (Quran13:28)  अल्लाह ही के ज़िक्र में दिलों का सुकून है
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

असल में दिल का इत्मीनान बहुत बड़ी दौलत है जिस किसी को यह हिस्सा मिल जाए वह कामयाब तरीन इंसान है, चाहे वह दूसरों के देखने में कोई मामूली सा गरीब इंसान हो, लेकिन दिल का सुकून उस गरीब इंसान के लिए इतनी बड़ी दौलत और पूंजी ही जिसका एहसास और अंदाज़ा केवल वही कर सकता हैl इसके उलट दुनिया का बड़ा से बड़ा लीडर और अरबपति अगर दिल का सुकून हासिल करने के लक्ष्य से वंचित रहा तो उसकी लीडर शिप या दौलत उसे कभी सफल नहीं बना सकती.....

 

Muslim Zakat: Reigniting the Fire of Camaraderie  इस्लाम में जकात की अवधारणा
Moin Qazi, New Age Islam

यह दृष्टिकोण हज़ारों सालों से मौजूद रहा है की दूसरों की मदद करना एक सार्थक जीवन का भाग है, मुसलामानों के लिए सदका व खैरात उनके अकीदे व मामुलात का बुनियादी पहलु हैl मजहबे इस्लाम में देने का कल्चर एक इबादत की शक्ल में पेश किया गया हैl गरीबों की मदद एक मज़हबी हुक्म हैl इस दृष्टिकोण के तहत कि हर चीज खुदा की तरफ से है और आखिर में सबको खुदा की ही तरफ लौट जाना हैl मुसलामानों को खुदा की नेमतों का अमीन बन कर ज़िन्दगी बसर करने की शिक्षा दी गई हैl

 

Refutation Of Kashmiri Militant Zakir Musa’s Recent Statement  कश्मीरी उग्रवादी ज़ाकिर मूसा का कश्मीर के नरम मुसलामानों के सर कलम करने वाले हालिया ब्यान का रद्द भाग-1
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

भारतीय मुसलामानों को जो मज़हबी आज़ादी हासिल है वह रूहानी तरक्की के हुसूल और तकवा की राह अख्तियार करके अल्लाह और उसके महबूब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कुर्बत हासिल करने के लिए काफी हैl प्रश्न यह है कि कश्मीरियों सहित भारतीय मुसलमानों को एलानिया इस्लामी अहकाम व फ़राइज़ अदा करने, तजकिया नफ्स, इस्लाह ज़ाहिर व बातिन, रूहानी मर्तबा हासिल करने और अल्लाह का ज़िक्र करने से कौन रोकता है? इसी तरह इस्लामी रुसुमात व मामुलात पर अमल करने से उन्हें कौन रोकता है?.....

 

Fasting during Ramadan Is a Course of Annual Re-Strengthening  रमज़ानुल मुबारक के महीने में रोज़ा बातिनी शख्सियत को मजबूत करने की एक सालाना मश्क है
Maulana Wahiduddin Khan

रोज़ा खुद को मजबूत बनाने का एक तरीका हैl यह ज़ोह्द व तकवा का एक सूफियाना तरिका है जो इंसान के अन्दर जब्ते नफ्स का जज़्बा पैदा करता हैl और ज़ब्ते नफ्स ही रूहानी ताकत का दुसरा नाम हैl जब्ते नफ्स का जज़्बा हर किस्म की कामयाबी की चाभी है और जो खुद को कंट्रोल कर सकता है वह पुरी दुनिया को कंट्रोल कर सकता हैl रोज़ा अपनी बातिनी शख्सियत को मजबूत करने की एक सालाना मश्क हैl

 

सभी दीन और मिल्लत में रोज़ा मारुफ़ व मशहूर है, प्राचीन मिस्री ‘यूनानी’ रोमन और हिन्दू सब रोज़ा रखते थे’ मौजूदा तौरात में भी रोज़ा दारों की तारीफ़ का ज़िक्र है’ और हज़रत मुसा (अलैहिस्सलाम) का चालीस दिन रोज़ा रखना साबित है’ योरोशलम की तबाही को याद रखने के लिए यहूद इस ज़माने में भी एक हफ्ते का रोज़ा रखते हैं’ इस तरह मौजूदा इन्जीलों में भी रोज़े को इबादत करार दिया गया है और रोज़ेदारों की तारीफ़ की गई है’ इसलिए अल्लाह पाक ने फरमाया है की जिस तरह तुम से पहले लोगों पर रोज़ा फर्ज किया गया था उसी तरह तुम पर रोज़ा फर्ज किया गया है’ ताकि मुसलामानों को रोज़ा रखने में रगबत हो क्योंकि किसी मुश्किल काम को आम लोगों पर लागू कर दिया जाता है तो फिर वह आसान हो जाता हैl

 

Is the prophet light or human being? A study in the light of the Quran  पैगम्बर नूर हैं या बशर------कुरआन की रौशनी में
S. Arshad, New Age Islam

सभी अंबिया ए किराम ने अपनी कौम को मूर्ति पूजा, शिर्क और नैतिक व सामाजिक बुराइयों से रोकने की कोशिश कीl परिणाम स्वरूप उनकी कौम ने उनका विरोध किया क्योंकि वह अपने बाप दादा के दीन मूर्ति पूजा और शिर्क को छोड़ने को राज़ी नहीं थेl अंबिया ए किराम के दीन और संदेश के विरोध की एक वजह यह भी थी कि वह भी इंसान थे और इसी समाज का भाग थेl जब भी कोई नबी अपनी कौम से कहता कि मैं अल्लाह का भेजा ह़ा नबी हूँ और मुझे आदेश हुआ है कि तुम्हें तौहीद की शिक्षा दूँ और बूट परस्ती व शिर्क से रोकूँ तो उनकी कौम के लोग आश्चर्य करते कि उनहीं के जैसा एक इंसान अल्लाह का नबी या रसूल कैसे हो सकता है जो उनहीं की तरह खाना खाता है और बाज़ारों में फिरता हैl

 

Instant Trip।e Talaq Judgment and After  तीन तलाक पर फैसला और उसके बाद
Arshad Alam, New Age Islam

यह जानना काफी दिलचस्प है की तलाक पर मुस्लिम कानून को बेहतर बनाने के हक़ में उठने वाली आवाजें इससे कहीं अधिक पुरानी हैं जितना की आम तौर पर गुमान किया जाता है । १९२० की दशक में आल इण्डिया मुस्लिम लेडीज़ कान्फ्रेंस ने अपने एक वार्षिक कान्फ्रेंस में तीन तलाक का मसला उठाया था। उनकी दलील उस समय भी ऐसी ही थी जो आज मुसलमान महिलाओं की तंजीम पेश कर रही है।

 

The Prophet Muhammad as Mercy Personified  पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम – सारी दुनिया के लिए रहमत
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

इसके अलावा भी बहुत सारी ऐसी हदीसें मौजूद हैं जिनसे यह बात साबित होता है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी ज़िंदगी में मज़हब, रंग और नस्ल से परे अमन, रहमत, अफ़व दरगुज़र और इन्साफ का एक मिसाली नमूना हमारे सामने पेश किया हैl इस मिसाल से हमें यह सबक मिलता है कि एहसान और अफ़व दरगुज़र पर कायम रहते हुए प्रतिकूल हालात में सब्र का मुजाहेरा करना नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत हैl

 

Spiritual Words And Stories of The Great Sufis – Part 1  सूफ़ी विद्वानों की बातें और घटनाएं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

अगर हसद, गुस्सा, कीना, बुग्ज़ और इस प्रकार के दुसरे रोग मौजूद हों तो लाख सजदे भी कर लिए जाएं मगर इन रोगों का इलाज नसीब नहीं होगाl इसलिए कि इन रोगों का इलाज ज़ाहिरी इबादत में है ही नहींl इसलिए जब तक अल्लाहु की मखलूक की सेवा पर खड़ा ना हुआ जाए और शारीरिक पीड़ा और परेशानी बर्दाश्त ना की जाएं, उस समय तक इन रोगों से छुटकारा नहीं मिलेगा और नहीं ही तौबा का सफ़र तै होगाl

‘Deen Bachao, Desh Bachao’ Rally Organised By Imarat-E-Shariah Patna  इमारते शरीआ पटना द्वारा आयोजित दीन बचाओ, देश बचाओ रैली का आयोजन: क्या वाकई शरीअत खतरे में है या इसे नवीकरण की जरूरत है?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

यहाँ यह बिंदु ज़िक्र करने के काबिल है कि हनफी इस्लामी फुकहा ने उर्फ आम के कानून के सिद्धांत के लिए एक हिदायती उसूल के तौर पर पेश किया हैl अगर भारतीय मुसलमान क्लासिकी इस्लामी कानून के अंदर आदत पर आधारित मान्यताओं का एक गहरी नजर के साथ अध्ययन करें तो वह कुरआनी और सुन्नत की ताज़ा तशरीह के आधार पर मध्य युग के बजाए मौजूदा रिवायती मामुलात, समाजी मूल्यों और अह्द हाज़िर की नैतिकता की रौशनी में अपने दृष्टिकोण का दुबारा जायज़ा लेने के काबिल होंगेl

 

Ankit Saxena’s Killing Should Start a Debate about What’s Wrong with Indian Muslims  अंकित सक्सेना के क़त्ल पर भारतीय मुसलामानों के अंदर विध्वंसक तत्वों को चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए
Arshad Alam, New Age Islam

केवल एक उचित और सहानुभूतिपूर्ण बहस के जरिये ही नामूस के नाम पर क़त्ल के इस समस्या का हल तलाश कर सकते हैंl लेकिन इस तरह की सभी बातों में व्यक्तिगत स्वतन्त्रता को सब पर वरीयता देनी होगीl मुसलामानों को खुद को अपने समाज के अंदर इस प्रकार के बहस को शुरू करने के लिए सबसे पहले कदम उठाना चाहिएl लोकतंत्र और सेक्युलरिज्म दूसरों के अमल के लिए नहीं हैं बल्कि अल्पसंख्यकों को इस तरह की सभी कोशिशों में पेश पेश रहना चाहिएl अफ़सोस की बात है कि हम मुस्लिम अल्पसंख्यकों के समाज में लोकतंत्र और स्वतन्त्रता बहुत कम मिलती हैl

 

The Divine Gnosis and The Words of Great Sufis- Part 1  अल्लाह पाक की मार्फत और सूफिया ए कराम के अक़वाल भाग-1
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

जिस ने अल्लाह पाक को पहचान लिया वह अल्लाह के अलावा हर चीज़ से अलग हो गया, नहीं नहीं बल्कि गूंगा हो गया और उसकी बीनाई चली गईl हज़रत वास्ती रहमतुल्लाह अलैह के इस कौल का मतलब यह है कि जिस ने अल्लाह की मारफत हासिल कर ली अब उसे अपने रब के सिवा किसी और की तरफ रुजूअ करने का रास्ता नज़र नहीं आता, उसकी जुबान भी केवल अल्लाह पाक की हमद व सना (प्रशंसा) के लिए ख़ास हो गईl इस अर्थ में वह बंदा अल्लाह के अलावा हर चीज़ के लिए अँधा और बहरा हो गयाl

 

The Left-Liberals, Muslim Leadership and the State, Sadly  लेफ्ट-लिबरल, मुस्लिम नेतृत्व और सरकार, अफ़सोसनाक स्थिति
Arshad Alam, New Age Islam

किसी भी समुदाय और ख़ास तौर पर हिन्दुस्तानी मुसलामानों के लिए एक लिबरल और रौशन खयाल कयादत बहुत जरुरी हैl गुहा की बात बिलकुल सही है कि ऐसी कयादत के बिना मुसलामानों पर मौलवियों का वर्चस्व कायम रहेगा और विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपने चुनावी फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करती ही रहेंगीl तथापि, यह भी बराबर तौर पर एक हकीकत है किसी भी समाज में लिब्रालिज्म की जड़ों को मजबूत करने के लिए राज्य को एक सहायक किरदार अदा करना पड़ता हैl

 

Decoding The Meanings of the Medieval Islamic Terminologies  ‘दारुल हरब’ और ‘दारुल इस्लाम’ जैसे मध्यकालीन शब्दों की व्याख्या
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

बाबरी मस्जिद ढाए जाने की 25 वीं वर्षगांठ के मौके पर मुसलामानों के बीच उत्तेजना भड़काने के लिए अंसार गज्वतुल हिन्द ‘दारुल हरब’ और ‘दारुल इस्लाम’ जैसे मध्यकालीन इस्लामी सिद्धांतों का इस्तेमाल कर रहा है— भारत में अतिवादी जिहादी बयान बाजियां पुरी तरह उस हादसे पर आधारित है जो आज से कई दाहाइयों पहले आया था और इसी घटना के आधार पर इसका जवाज़ भी पेश किया जाता हैl

 

Religious Extremism  धार्मिक उग्रवाद
Javed Ahmad Ghamidi

यह बात अब तर्क का मोहताज नहीं रहा कि पाकिस्तान के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या धार्मिक उग्रवाद हैl हमारी बदकिस्मती है कि फ़िक्र व ख़याल और जुबान व कलम से आगे अब यह क़त्ल व गारत और आतंकवाद का रूप धारण कर चुका हैl राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज हर चीज इसकी चपेट में है और हज़ारों बच्चे, बूढ़े और जवान इसकी नज़र हो चुके हैंl इतिहास बताता है कि इस तरह की स्थिति में अंततः लड़ने ही का निर्णय करना पड़ता है और हमारी राजनीति को भी शायद एक दिन यही करना पड़ेगाl

 

Some Questions for the Proposed World Council of Muslim Minorities  मुस्लिम अल्पसंख्यक के प्रस्तावित वर्ल्ड काउंसिल से कुछ सवाल
Arshad Alam, New Age Islam

और जहां तक रहा मुस्लिम समाज के अंदर विविधतावाद का प्रशन तो इसे तरजीही बुनियाद पर बढ़ावा दिया जाना हैl प्रस्तावित काउंसिल को इस बात का खयाल रखना चाहिए कि काउंसिल के सभी फैसला करने वाले लोगों के आंतरिक सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता अवश्य मौजूद होंl जैसा कि हमें यह मालूम है कि सुन्नी मुसलमान के अंदर शिया मुसलामानों के लिए और शिया मुसलामानों के अंदर सुन्नी मुसलामानों के लिए गहरा अविश्वास पाया जाता हैl

 

Why Shah Waliullah’s Thesis should be Repudiated by Indian Muslims  भारतीय मुसलामानों का शाह वलीउल्लाह की शिक्षाओं से दस्तबरदार होना आवश्यक; कारण
Arshad Alam, New Age Islam

शाह वलीउल्लाह के खिलाफ सबसे पहला आरोप यह है कि उनके दिल में भारत के लिए कोई रुचि नहीं थीl उन्होंने मराठों से मुगलों को बचाने के लिए अहमद शाह अब्दाली को भारत पर हमला करने और यहाँ मुसलामानों को बचाने के लिए ख़त लिखेl यहाँ इस बात की संभावना प्रबल है कि उनके इस अमल को इस्लाम हिमायती और देश से गद्दारी की एक मिसाल के तौर पर देखा जाएl

 

Making Sense of Afrazul’s Lynching  अफराजुल के ह्त्या के निहितार्थ
Arshad Alam, New Age Islam

मैं यहाँ एक तंबीह पेश करना चाहता हूँl मेरा कहना यह नहीं है कि किसी को हर प्रकार के कत्ल और हर प्रकार के अत्याचार व हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं करना चाहिएl बल्की इस संदर्भ में कि मुसलामानों की ज़िन्दगी केवल मुसलिम होने की वजह से मामूली हो चुकी है; अफराजुल के कत्ल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में पुरी बेबाकी के साथ यह बयान दिया जाना चाहिए थाl संतुलन पैदा करने की कोशिश में इन प्रदर्शनों ने केवल उस नियोजित क़त्ल के फासिद नज्रियाती की शिद्दत को कम किया हैl

 

Rejoinder To The Rhetoric Of Jihad In Kashmir  कश्मीर में जिहाद के एलान का दंदान शिकन जवाब
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

असल में कश्मीर में सारी की सारी चरमपंथी जिहादी बयान बाजियां जो सोशल मीडिया और यू ट्यूब पर मुसलामानों को भड़काने के लिए जारी हैं, उनमें कोई ख़ास बात नहीं है और उनका समर्थन इस्लामी अहकामात के चार स्रोत अर्थात कुरआन, हदीस, इज्माअ और कयास में से किसी एक से भी नहीं होती हैl जो लोग भारतीय उलेमा और फुजला की आलोचना करते हैं और उन पर ‘हुकूमत का साथ देने’और ‘कश्मीर में जिहाद का फतवा’ देने से असमर्थ होने’ का आरोप लगाते हैं उनहें इस बात की फिकर होनी चाहिए कि वह किस तरह आख़िरत में अल्लाह को अपना चेहरा दिखाएंगेl

 

True Purpose of Life Is Beyond Self  जीवन का सही उद्देश्य स्वयं से परे होना है
Maulana Wahiduddin Khan

किसी व्यक्ति को उच्चतम स्थान तभी प्राप्त होता है जब वह एक उद्देश्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता हैl इस प्रकार का जीवन मानवीय विकास के सबसे उच्चतम चरण का निर्धारण करता हैl बेशक अपने लिए अच्छा खाना, वस्त्र और निवास की व्यवस्था करना इस दुनिया के अंदर इंसान की सबसे प्रथम जिम्मेदारी हैl

 

Asifa was Brutalised Because She Was a Muslim  आसिफा पर ऐसे अत्याचार इस लिए किए गए क्योंकि वह एक मुसलमान बच्ची थी
Arshad Alam, New Age Islam

यह कहते हुए दिली तकलीफ होती है कि आठ वर्षीय बच्ची का अपहरण किया जाता है, बार बार उसके साथ बलात्कार किया जाता है और अंत में उसे क्रूरता के साथ मार दिया जाता है, जिससे हमारे सर शर्म से झुक जाने चाहिएl इस शर्मनाक दुर्घटना के लगभग तीन महीने बाद ऐसा लगता है कि इस देश का विवेक जागृत हुआ हैl अचानक हमने आसिफा के हक़ में न्याय के लिए विरोधी आवाज बुलंद करने लगे हैं और इस खौफ व दहशत के खिलाफ नई दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक आवाजें बुलंद हो रही हैंl

 

There Is an Enormous Energy Reservoir in You  हमारे अंदर ऊर्जा का एक सागरहै
Maulana Wahiduddin Khan

इंसान का दिमाग ऊर्जा के भंडार की तरह हैl अगर किसी का लक्ष्य मामूली है तो उसका दिमाग सीमित पैमाने पर ऊर्जा के दरवाज़े खोलेगाl लेकिन अगर किसी का लक्ष्य उच्च है तो उसका दिमाग भी उसके लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा के दरवाज़े खोलेगाl यही अंतर इंसान की सफलता के स्तर निर्धारित करता हैl आप अपने दिमाग का प्रयोग करने की कोशिश करें, आप अवश्य वह सब कुछ कर लेंगे जो आप अपने जीवन में प्राप्त करना चाहते हैंl

 
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