certifired_img

Books and Documents

Hindi Section

मुख्य रूप से इस्लामी जिहाद के फलसफे में जिहाद का उद्देश्य एक ऐसी शांतिपूर्ण, रचनात्मक, व्यवहारिक और अध्यात्मिक संघर्ष है जो हक़ व सदाकत और मानवता के कल्याण के लिए की जाती हैl यह संघर्ष सैद्धांतिक आधार पर केवल ऐसे माहौल का तक़ाज़ा करती है जिसमें हर व्यक्ति का विवेक, ज़ुबान और कलम अपना संदेश ह्रदय तक पहुँचाने में स्वतन्त्र होl समाज में शान्ति और सौहार्द का बोल बाला होl मानवाधिकार पुर्णतः सुरक्षित होl अत्याचार व शोषण और दमन की कोई गुंजाइश ना हो और संसार के सभी देश शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के रिश्ते में संलग्न हों,

Reflections on Qur'anic Message - Part-8  कुरआन में तक़वा का आफ़ाक़ी अवधारणा (भाग-8)
Muhammad Yunus, New Age Islam

पिछले लेख में इंसान के नफ्स के प्रतिरोध और उसकी तुच्छ इच्छाओं और लालच व वासना पर एक पहरेदार के रूप में तक़वा के कुरआनी अवधारण को पेश करने के लिए कुरआन की प्रारम्भिक आयतों (91:1-10) को पेश किया गया थाl जैसा कि कुरआन अमली तौर पर इंसान की नफसानी इच्छाओं के विरुद्ध वास्तव में एक जंग का एलान है, इसकी प्रारम्भिक आयतें (अल बकरा: 2-5) में तक़वा की अवधारणा पेश की गई है जो कि कुरआन में एक छोटी सूरत के बाद स्थित है:

 

Reflections on Qur'anic Message – Part – 7  मानव चेतना में अच्छाई और बुराई का संघर्ष (भाग-7)
Muhammad Yunus, New Age Islam

हम ने ये प्रदर्शित किया कि इलाही रचनात्मक नियोजन में मानव चेतना अच्छाई और बुराई के संघर्ष का संयोजन है और जब तक वह बुराई से बाज़ नहीं रहता तब तक वह नेकी का नमूना नहीं बन सकताl. कुरआन की शुरुआती सूरत अश्शम्स में कुरआन ने इंसान की खुदी के शीर्षक की ओर पेश कदमी करने के लिए प्रकृति की महानता और मानवीय नफ्स के सर को एकत्रित किया हैl कुरआन का एलान हैl

 

Reflections on Qur'anic Message (Part-6)  कुरआन नेक आमाल को सभी मोमिनों के लिए एक साझा गुणवत्ता करार देता है (भाग 6)
Muhammad Yunus, New Age Islam

पिछले लेख में हमने जहाँ चर्चा समाप्त की थी इस लेख में वहीँ से प्रारम्भ करते हैं: अल्लाह की वहदानियत को स्वीकार करने के साथ “अच्छे कर्म” एक वैश्विक दीन इस्लाम की रूह हैl अब हम पुरुष व स्त्री और मज़हब से कता नज़र उन सभी लोगों के लिए जो अल्लाह पर और अपनी हतमी (अंतिम) जवाबदेही पर विश्वास रखते हैं अल्लाह के फैसले के एकमात्र मानक के तौर पर “ अच्छे कर्म” के किरदार के हवाले से कुरआन के संदेश पर विचार करेंगे: कुरआन का फरमान है:

 

The Triple Talaq Case  तीन तलाक का मामला: अन्याय करने वाले मुस्लिम पुरुष और उनके अन्याय करने वाले रहबर
Naseer Ahmed, New Age Islam

केस से यह सिद्ध होता है कि आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और उलेमा ने शाह बनों मामले से सबक नहीं सीखा हैl। तीन तलाक को बिदअत और कुरआन करीम की शरीअत के विरुद्ध और अवांछित माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद हमारे उलेमा इसको खुद अवैध करार देने के लिए तैयार नहीं हैं। हालाँकि मुस्लिम महिलाएं और उनके संगठन इसकी मांग कर रही हैं।l क्या वह मुसलमानों के उपर अल्लाह के और भी गज़ब के प्रतीक्षित हैं? क्या उनकी नज़र दीवार पर लिखी हुई उस तहरीर पर नहीं पड़ती कि अगर वह अपनी महिलाओं को न्याय देने के लिए खुद को नहीं बदलते और अपनी सुधार नहीं करते तो वह तबाह हो जाएँगे? यह एक शर्मनाक बात है कि इस केस को न्याय के लिए अदालतों में जाना पड़ा था और आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड इस समस्या को आल इण्डिया वीमेंस पर्सनल ला बोर्ड और भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के साथ वार्ता से हल न कर सकाl

 

Make Revolutionary Changes  'जिहादी विचारधारा से लड़ने के लिए इज्माअ की इस्लामी फिकह में क्रांतिकारी बदलाव लाया जाए': सुल्तान शाहीन का संयुक्त राष्ट्र यूएनएचआरसी में मुस्लिम देशों से मांग
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

पहली बात यह है कि हालांकि जेहादियत वहाबियत और सल्फियत की एक कट्टरपंथी शाख है, फिर भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से वहाबी और सल्फी विचारधारा के अलमबरदारों को पुरे विश्व में मुस्लिम समाज के अन्दर वहाबी विचारधारा की प्रचार प्रसार में लाखों डालर खर्च करने की अनुमति प्राप्त है।दूसरी बात, हाल ही में हमने एक वहशतनाक दृश्य का सामना किया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से इस पर कोई भी विरोधी आवाज़ बुलंद नहीं की गई, और वह यह कि संयुक्त राष्ट्र के नामज़द आतंकवादी (जिसके सिर पर 10 मिलियन डालर का इनाम है) ने एक राजनीतिक पार्टी का प्रारम्भ किया और एक दुसरे अमेरिका के नामज़द आतंकवादी को पकिस्तान में लोकतांत्रिक चुनाव लड़ने के लिए नामज़द किया। जाहिर है कुछ देश संयुक्त राष्ट्र के निर्देश को बिना किसी डर के अनदेखा कर सकते हैं।

 

The Mutashaabihat Or The Allegorical Verses Of The Quran  कुरआन में आयाते मुतशाबेहात
Naseer Ahmed, New Age Islam
अल्लाह ने साफ़ कर दिया है कि किन शब्दों का शाब्दिक अनुवाद किया जाएगा और किन शब्दों के व्याख्या की आवश्यकता है। लेकिन विडंबना यह है कि इस किताब कुरआन को गलत अंदाज़ में समझा गया है क्यों कि आयते मुह्कमात कि जिनका शाब्दिक अनुवाद किया जाना चाहिए था उनकी भी व्याख्या इस अंदाज़ में की गई है कि जिसका परिणाम यह है कि कुरआन की एक साझा समझ कायम होने की बजाए उससे संबंधित हर इंसान के पास एक अलग तफहीम (समझ) और व्याख्या है!

 

Reflections on Qur'anic Message (Part 5)  इस्लाम में अच्छे कामों की अहमियत और उपयोगिता (भाग 5)
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसलिए, कुरआन भी इस बात की गवाही देता है कि मज़हब और पैगंबर से कतए नज़र अल्लाह पर जिसका ईमान उसके अन्दर नेकी का जज़्बा पैदा करता है उसे अल्लाह की बारगाह से इसका अच्छा बदला मिलेगाl इसी लिए जैसा कि इमरान खान ने कहा “अल्लाह पर ईमान रखना और नेक अमल करना ईमान की बुनियाद है”, या इस्लामी शिक्षाओं का प्रतिबिम्ब हैl लेकिन यह अवधारणा इस्लाम के स्तंभ नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात का महत्व न तो कम करता है और न ही उसे समाप्त करता हैl बल्की यह उन स्तंभों को एक शानदार ढांचा प्रदान करता हैl

 

Reflections on Kindness to Humanity in Qur’anic Message – (Part 4)  कुरआन में खुदा की बनाई हुई चीजों के साथ प्रेम और दया (भाग ४)
Muhammad Yunus, New Age Islam

सामाजिक न्याय के विषय पर पिछले लेखों की तरह, इस लेख का उद्देश्य कुरआन के संदेश को पाठकों की सेवा में सीधे प्रस्तुत करना है, ताकि अगर वे इसके पवित्र कलाम होने में विश्वास रखते हैं तो वह इसकी आसानी के साथ समझ में आने वाले संदेशों और आदेशों को समझ सकें और उन पर विचार विमर्श कर सकें। खुदा की बनाई हुई चीजों के साथ प्रेम और दया........

 

Reflections on Social Responsibilities in Islam (Part 3)  इस्लाम में सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार (भाग ३)
Muhammad Yunus, New Age Islam

आज प्रत्येक मनुष्य अपनी आय के स्तर से नजर बचा कर अपनी जीवन स्तर को ऊँचा करने की इच्छा में डूबा हुआ है। वह सबसे अधिक महंगा मकान किराये पर लेना चाहता है, सबसे बड़ा घर निर्माण करना या खरीदना चाहता है, सबसे अधिक महंगे फर्नीचर, अभी बुनयादी आवाश्यकताओं अतिरिक्त आवश्यकताओं कि वस्तुओं जैसे, कार, एसी, टीवी, मोबाइल, आई फ़ोन, आई पैड में भी लेटेस्ट मॉडल और सभी घरेलू सजावटी चीजें, पलंग, बर्तन, और रसोई के सभी उपकरण और साधन भी खरीदना चाहता है। लेकिन उसके इच्छाओं का अंत यही नहीं है। बल्कि…..

 

कौन जनता है आइएसआइएस में कितने गैर मुस्लिम मुसलमानों के हुलिए में मौजूद हैं और कितने मुसलमान अज्ञानता वश इस में शामिल हो गए हैं। हर हाल में आइएसआइएस और कट्टरपंथी तालिबान का खात्मा आवश्यक हो गया है वरना इन देशों के मुसलमान आराम और चैन से जी नहीं सकते। पश्चिमी देशों में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसका इलाज पेश कर रहे हैं मगर शासक इसे सुनने और मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अब आतंकवाद एक ऐसे बीमारी में बदल चुकी है जो ला इलाज है। पश्चिमी देश खरबों डालर खर्च करने के लिए तैयार हैं मगर इसका विश्लेषण करने के लिए तैयार नहीं हैं। जो समस्याएँ बात चीत से और थोड़ा ले दे कर सुलझाए जा सकते हैं उनके लिए खरबों डालर और हजारों जानें गंवा रहे हैं।

 

The Prophet Muhammad—the Paragon of Mercy In The Light of Quran  कुरआन गवाह है मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहमत की जान हैं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

अल्लाह पाक ने हुजुर नबी अकरम मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पुरी दुनिया के लिये रहमत बना कर भेजाl। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जो धर्म और शिक्षा मानवता को अता किया वह पूरी तरह से दया, करूणा और प्रेम पर आधारित हैंl अल्लाह पाक ने कुरआन में कई बार आपकी रहमत का उल्लेख किया हैl नीचे हम क़ुरआन की कुछ आयाते तैयबा और उनकी लोकप्रिय तफ़सीर पेश कर रहे हैं जिनके अध्ययन से यह बात उज्ज्वल दिन की तरह स्पष्ट हो जाती है कि मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम रहमत की जान हैं।

इस्लाम को एक आक्रामक धर्म और मुसलमानों को आतंकवादी कौम घोषित करना इस्लाम के अटल सिद्धांतों से बेख़बरी का कारण या जानबूझ संकीर्ण मानसिकता का खराब उदाहरण है। इस्लाम हमेशा धार्मिक पवित्रता और कौम की पहचान, मानवीय उद्धार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध और लगातार प्रयास की अनुमति ज़रूर देता है और तबलीग व हिदायत की हर संभव पथ को व्याकुलता के साथ तय करने के लिए शिक्षा पर जोर देता है। अल्लाह पाक नें (सूरः नहल) में फरमाया '' ऐ नबी अपने रब के रास्ते की तरफ ज्ञान और उत्कृष्ट नसीहत के साथ निमंत्रण दो और लोगों से चर्चा करो ऐसे तरीके से जो अच्छा हो ''।

 

Reflections on Social Justice in Islam (Part 2)  इस्लाम में सामाजिक न्याय पर विचार (भाग २)
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसलिए, यदि हम उक्त शब्दों के प्रकाश में कुरआन की संदर्भित आयतों पर विचार करें तो यह साबित होता है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए और जहां तक संभव हो नस्ल,धर्म या राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना अनिवार्य रूप से हर प्रकार के जरूरतमंद और शरण चाहने वालों की भी वित्तीय सहायता करनी चाहिए और अपने सहयोग का हाथ उनसे कभी नहीं खीचना चाहिए।

 

Faith and Its Limits: Religious Freedom under the Constitution Is Conditional  धर्म और उसकी सीमा: संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सशर्त है
Tahir Mahmood
जहां तक मुसलमानों का सवाल है तो उनका मामला यह है कि इस्लामी फ़िक्ह के तहत धार्मिक आदेश और शिक्षाओं को दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें से एक ईबादात (आध्यात्मिक मामला) और मुआमलात (सांसारिक मामला) हैं, और उनमें से प्रत्येक में एक और वर्गीकरण है। जिन दिनचर्या का आदेश विशेष रूप से (आसमानी किताब) कुरआन या (पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कथन) हदीस ने दिया है वह या तो फ़र्ज़ हैं या वाजिब हैं। और इसके अलावा धार्मिक पुस्तकों में वर्णित अन्य सभी कार्य या तो मुस्तहब है या जाईज़ हैं। इस वर्गीकरण के मद्देनजर जो धार्मिक अनुष्ठान मुसलमानों के लिए फर्ज़ या वाजिब हैं उन्हें भारत में संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान में शामिल कर लिया जाएगा।

 

Reflections on Social Justice in Islam (Part 1)  इस्लाम में सामाजिक न्याय पर विचार (भाग-१)
Muhammad Yunus, New Age Islam

गरीब मुसीबत और बदहाली का शिकार हैं, कमजोर और क्षीण बच्चे कूड़े के ढेर में इसलिए हाथ पैर मार रहे हैं कि उन्हें कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिसे खाकर वह अपनी भूख मिटा सकें या जिसे बेचकर कुछ सामाने जिंदगी प्राप्त करें, छोटे बच्चे सड़कों के किनारे गैरेजों और भरी भरकम रचनात्मक कार्यों में मजदूरी कर रहे हैं,भूख से बदहाल बच्चे शिविरों और शरणार्थियों में रोटी के एक टुकड़े के लिए सरगर्दा हैं,कम मजदूरी पाने वाले घरेलू और औद्योगिक मजदूरों को कोई सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है और है भी तो नाममात्र तथा वह खिदमाती शर्तें और चिकित्सा सेवाओं से भी वंचित हैं।

 

Remembrance of Rabbul-Alamin, Rahmatul-lil-Alamin and Errors of Deobandi Ulema  रब्बुलआलमीन और रहमतुल्लिल आलमीन का तज़किरा और उलेमा ए देवबंद की खताएं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

सार वचन यह है कि अल्लाह पाक रब्बुलआलमीन है यानी सारे संसारों का रब है और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहमतुल्लिल आलमीन हैं यानी सारे संसारों के लिए दया हैं.इसके लिए यह कहना कि अल्लाह पाक सिर्फ मुसलमानों या बस मनुष्यों का रब है कभी जायज नहीं इसी तरह यह कहना कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम केवल लोगों के लिए रहमत या केवल मुकल्लेफीन या सिर्फ मुसलमानों के लिए रहमत हैं, कभी वैध नहीं, बल्कि वह सारे जहानों के लिए रहमत हैं, जिनात व इंसान, पक्षी, पशु व वनस्पतियों,मुसलमान हो या नास्तिक,मुकल्लफ़ हो या गैर मुकल्लफ़ आदि सभी के लिए रहमत हैं।

 

Imam Ja'far Sadiq- Imam of Both Shia and Sunni  इमाम जाफर अलसादिक शिया, सुन्नी दोनों समुदायों के इमाम
Zafarul Islam Khan

बहुत शुरुआती दौर में मुसलमानों के बीच अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिलाफत यानी उनके बाद दीनी और राजनीतिक अर्थ में उनका वारिस होने के बारे में मतभेद पैदा हुआ जिसकी वजह से मुसलमानों में आज तक मतभेद चला आ रहा है। एक पक्ष ने शूराई खिलाफत की ताईद की और वह अहले सुन्नत कहलाए। उनका मानना था कि खलीफा का चयन शुरा से होना चाहिए और मुसलमानों में जो सबसे अधिक ज्ञानी, न्यायप्रिय और बहादुर हो उसी को इमाम होना चाहिए।

The Dichotomy between Sharia Law of Islam (Islamic Law) and the Sharia of Islam  'इस्लाम के शरई कानून' और 'इस्लामी शरीअत' के बीच स्पष्ट विरोधाभास
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि इस्लामी शरई कानून' के कई निर्णय 'इस्लामी शरीअत (कुरआनी पैगाम)' के साथ परस्पर विरोधी हैं। जैसे इस्लामी शरीअत के साथ परस्पर विरोधी उन आदेशों में व्यभिचार के लिए संगसारी, स्वधर्म त्याग और तौहीन के लिए मौत की सजा, संगठित गुलामी, अस्थायी शादी, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन के खिलाफ माता-पिता की गैर जवाबदेही, एक बैठक में तीन तलाक, बलात्कारका कानून, महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध, पूर्ण घूंघट और लिंग आधारित महिलाओं को अलग रखना, गैर मुसलमानों के खिलाफ शत्रुता और घृणा, मुस्लिम और गैर मुस्लिम के बीच दुनिया का वितरण, गैर मुसलमानों के खिलाफ लगातार जिहाद, कैदी गैर मुस्लिम महिलाओं का जबरन धर्म बदलना और नृत्य और संगीत जैसे सभी कला पर प्रतिबंध लगाना शामिल हैं।

 

Triple Talaq Must Be Invalidated Constitutionally and Criminalized  तीन तलाक को गैर कानूनी प्रक्रिया और अपराध करार दिया जाना चाहिए
Muhammad Yunus, New Age Islam

पैरा 4 में यह दलील दी गई है कि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए तब भी पुरुष तीन तलाक देना जारी रखेंगे और शादी को बनाए रखने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को अकदे निकाह की अदम तहलील का निर्णय प्राप्त करने के लिए वर्षों तक ऐसी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी जिसमें माल और समय दोनों खर्च होते हैं। यह तर्क भी खराब है। इसलिए कि अगर तीन तलाक को गलत या अवैध करार दे दिया जाता है तो (गवाहों की उपस्थिति में)में तीन तलाक देने वाले पुरुष पर मुकदमा चलाया जाएगा, यहां तक कि वह इस बात को स्वीकार करे कि उसने तलाक बेपरवाही (2: 225) या नशा की हालत में दिया है -कि जिसमें बोलने वाले का भरोसा नहीं किया जाता है (4:43)।

 

राज्य में ऐसे मदरसों की संख्या बहुत कम है,जिन्हें पूर्णता की श्रेणी में रखा जाए। सही मायने में ऐसे मदरसों को उंगलियों पर गिन सकते हैं। राज्य में केवल दर्जन भर मदरसों पर इतराने के बजाय प्रशासन को उन मदरसों की ओर ध्यान देना चाहिए जो शहर और ग्रामीण स्तर पर खोल दिए गए हैं लेकिन उनकी उपयोगिता रत्ती भर भी नहीं है। यहां तक कि जमीन पर भी उनकी उपस्थिति नहीं है। राज्य में ऐसे बेमानी मदरसों की संख्या पचास नहीं बल्कि हजारों में है।

 

The Attack of ISIS on the Dignity of the Rightly-Guided Caliphate  खिलाफते राशदा की नामूस पर आईएसआईएस का हमला
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

आईएसआईएस (दाइश)की स्वयंभू 'खिलाफत'इस्लाम विरोधी तत्वों,सिद्धांतों और विध्वंसक उद्देश्यों पर आधारित एक आधुनिक खारजी संगठन है। मीडिया की रिपोर्टों और आईएसआईएस के गैर इस्लामी कार्यों और चरित्र का विश्लेषण कर लेने के बाद यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है कि आईएसआईएस केवल इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने और विशेषकर खिलाफत ए राशदा के पवित्र अवधि की इज़्ज़त व नामुस को कलंकित करने के लिए ही उपस्थिति में आई है।

 

Triple Talaq in One Sitting And Refutation of An Accusation Against Hadhrat Umar  एक मजलिस की तीन तलाकें और हज़रत उमर पर अह्दे रिसालत के मामुलात बदलने के आरोप का जवाब
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

जम्हूर फ़ुक़्हा ए इस्लाम ने सर्वप्रथम तो इस हदीस के फन्नी सकम के कारण इसे स्वीकार नहीं किया lदुसरे बर सबीले तनज्जुल इसमें तावील की और कहा कि दौरे रिसालत और दौरे सहाबा में लोग ताकीद की नीयत से तीन बार तलाक देते थे। बाद में उमर रदिअल्लाहु अन्हु के दौर में लोगों ने तीन तलाक देने की नीयत से तीन बार तलाक कहना शुरू कर दिया इसलिए उमर रदिअल्लाहु अन्हु ने उनकी नियत के आधार पर इन तीन तलाकों को तीन ही करार दिया lइन जवाबों से स्पष्ट हो गया कि हज़रत उमर नें पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किसी बात को नहीं बदला बल्कि इसी बात को लागू किया है,जो अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस है।

 

Who All Are ‘Ahle Zikr’ In the Qur’an?  कुरआन में 'अहले ज़िक्र' से मुराद कौन लोग हैं?
Muhammad Yunus, New Age Islam

व्यक्तिगत रूप से और साथ ही उसके बाद वाली आयत 16:44के साथ उक्त आयत के पाठ का विश्लेषण इस बात को स्पष्ट करता है कि आयत 16:43में संबोधन पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से है और शब्द ज़िक्र से पिछले नबियों पर नाज़िल की गई आयतें होती हैं और अहले ज़िक्र से संकेत पैगम्बरे इस्लाम के युग के उन ईसाइयों और यहूदियों की तरफ है जिनके बारे में यह माना जाता है कि उन्हें वह दिव्य संदेश और आयत याद होंगे जो उनके नबियों के पास किए गए थे। अगर कुछ मुस्लिम उलेमा अहंकार के साथ खुद को आयत 16:43का मिसदाक़ बताते हैं ताकि वे एक बैठक में तीन तलाक जैसे अत्यधिक ज़न बेज़ार सामाजिक परंपरा को मजबूती पहुंचा सकें।

 

Different Country, Different Religion But the Same Mentality  देश अलग, धर्म अलग लेकिन स्वभाव एक
Shakeel Shamsi

भारत और पाकिस्तान में कई वर्षों से एक रिवाज चल पड़ा है कि धर्म के नाम पर एक भीड़ जमा होती है और जिसको दोषी समझती है, उसकी हत्या कर देती है, यूं तो इस भीड़ का धर्म अलग होता देश भी अलग होता है लेकिन भीड़ में शामिल लोगों का स्वभाव बिल्कुल एक जैसा होता है। उग्र भीड़ जिसकी हत्या करना चाहता है उस पर कभी गौ हत्या तो कभी लड़की छेड़ने का आरोप लगाता है। कभी यही भीड़ धर्म का अपमान करने के नाम पर किसी को मार देती है। भारत में पहलू खान को चरमपंथियों की एक भीड़ क़त्ल कर देती है तो पाकिस्तान के मरदान शहर में मशाल खान नाम के मुस्लिम युवक की हत्या करके उसके परिवार में चरमपंथ की मशाल से अंधेरा कर दिया है।

 
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 ... 45 46 47


Get New Age Islam in Your Inbox
E-mail:
Most Popular Articles
Videos

The Reality of Pakistani Propaganda of Ghazwa e Hind and Composite Culture of IndiaPLAY 

Global Terrorism and Islam; M J Akbar provides The Indian PerspectivePLAY 

Shaukat Kashmiri speaks to New Age Islam TV on impact of Sufi IslamPLAY 

Petrodollar Islam, Salafi Islam, Wahhabi Islam in Pakistani SocietyPLAY 

Dr. Muhammad Hanif Khan Shastri Speaks on Unity of God in Islam and HinduismPLAY 

Indian Muslims Oppose Wahhabi Extremism: A NewAgeIslam TV Report- 8PLAY 

NewAgeIslam, Editor Sultan Shahin speaks on the Taliban and radical IslamPLAY 

Reality of Islamic Terrorism or Extremism by Dr. Tahirul QadriPLAY 

Sultan Shahin, Editor, NewAgeIslam speaks at UNHRC: Islam and Religious MinoritiesPLAY 

NEW COMMENTS

  • There is a good way to read the book and there is a Saudi/Hats-Off way to derive the worst meaning out of it. Giving vent ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Hats Off's hatefulness has blinded him to the fact that the Muslim community is not one homogenous mass. Moderate Muslims have their moderate opinions ....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Muslims are not as pre-occupied with kufr as Naseer sb. thinks. Muslims hate Shias, Sunnis and Ahmadis a lot more than...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Very good lecture.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • the saudi barbarians are merely asserting what their holy book tells...
    ( By hats off! )
  • The fight against sexual abuse necessarily entails more respect for women as equals with the same rights...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • the pretended surprise of "moderate" muslims is the grass in which the snakes of extremism hide and bite the kuffar.'
    ( By hats off! )
  • As a society, we need to critically reflect on our practices that deny basic human rights to some individuals. Likewise...
    ( By Meera )
  • Rightly said, women’s right to assert themselves in matters of marriage should not be denied. These....
    ( By Meera )
  • Why is this so-called Capt. Safdar’s bigotry surprising? Replace Ahmadi with Hindu, Safdar with Jinnah and the rest of the speech ...
    ( By South Asian )
  • Jai Shree Ram'
    ( By Rajkumar )
  • GM Sb says: “His claim that he is dealing a deadly blow to the extremist ideology is not only grossly exaggerated but is delusional” The definition ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • Let us introduce common civil code in India, we can forget all such nonsenses.Let all married couples have two children in all let us ...
    ( By dr.A.Anburaj )
  • Sorry sisters, men do not like to self police so they do all short ps of thing with women on matter of clothing. Last peace ....
    ( By Aayina )
  • The simple answer, he was. He wanted Muslim to educate to dominate Hindus, if two nations theory cannot came into realisation.
    ( By Aayina )
  • Easy way to is that called themselves as new Qadyian relgion and Gulam Mirza Ahmed as their prophet. Just start to lie like Mulism do that ...
    ( By Aayina )
  • Its may be true that Muslim may not need to sexually assault. I have witnessed lots of my Muslim friends that Muslim girls are reach to ...
    ( By Aayina )
  • Convertion might be not limited to bride but for kids certainly Muslim kid. Hypocrates have no answer ....
    ( By Aayina )
  • a shameless member os the most persecuted sect in islam revels in his stockholm syndrome and crows about it. he never...
    ( By hats off! )
  • As is typical of him, Naseer sb again resorts to abuse and insults. The fact remains that he has been trying to make a huge point ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Giving the spouse-to-be freedom of choice in matters of faith would be the right way to prove one's love and respect. There should be no ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Well Done, keep it up...'
    ( By vgf )
  • the rag that goes by the name of "the independent" is now owned by a saudi arabian. one saudi ....
    ( By hats off! )
  • All religions teach hatred and violence. Religious scrptures are full of bigotry. We should not be apologetic and there is no need to lie or, ...
    ( By Ashok Sharma )
  • What Wahiduddin Khan, Javed Ghamidi and Muhammad Yunus have been saying is what Yunus sb said in his article “Hindus are Not the Mushrikin Mentioned ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • dictionaries are inherently islamophobic. and arabic does not have a word...
    ( By hats off! )
  • @Manzar Khan By the way, I am not suggesting any changes in Islam. Only a new Islamic ...
    ( By Sultan Shahin )
  • @Manzar Khan Who authorised theologians to create their theology. In Islam, there is nothing between a Muslim and his...
    ( By Sultan Shahin )
  • Who authorized u Mr Shahin to suggest changes in Islam?'
    ( By Manzar Khan )
  • Dakshinamoorthi Raja Ganesan Thanks very much indeed. Regards.
    ( By Sultan Shahin )
  • Sincerely congratulate on your bold call. Wish you all success in your mission.'
    ( By Dakshinamoorthi Raja Ganesan )
  • Rafi Ahmed Don't change basic Islam, only discard its theology of hate and confrontation....
    ( By Sultan Shahin )
  • How can one change basic Islam to suite present day requirements of one person.
    ( By Rafi Ahmed )
  • Saki Syed How can any one replace verses of the Holy Quran? Replace with what? Please try to understand Islamic theology....
    ( By Sultan Shahin )
  • New Age Islam Do you want to replace the verses of the holy book ?.
    ( By Saki Syed )
  • Mohammed Amin Zargar I want to know about Deen-e-Ilahi. Can you suggest some book.
    ( By Sultan Shahin )
  • Do you favour Deeni-illahi.'
    ( By Mohammed Amin Zargar )
  • A.j. Jawad Thanks very much indeed, Jawad Saheb
    ( By Sultan Shahin )
  • Well said Shahin sab
    ( By A.j. Jawad )
  • Satish Vengurlekar True. But not impossible.
    ( By Sultan Shahin )