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Reflections on Qur'anic message - Part-13  जकात का व्यापक पहलू- दिमाग की गंदगियों को दूर करके अपनी सोच और फ़िक्र को पाक करना
Muhammad Yunus, New Age Islam

हो सकता है कि इन सभी बातों में आधुनिक मूल्यों के हामिल पाठकों की दिलचश्पी ना हो क्योंकि उपरोक्त अहकामात या ममनुआत (वर्ज्य) में से किसी से भी माल, मूल्य और समाजी हैसियत की दौड़ में आगे बढ़ने में या अपनी चमक दमक और नाम व नुमूद में बढ़ोतरी करने में मदद नहीं मिलती है, जो कि वर्तमान युग में हर इंसान का मुतमहे नज़र हैl और जहाँ तक आम मुसलमानों का प्रश्न है तो उनके लिए उलेमा के लम्बे बयानात और अंबिया, औलिया और सुफिया की कहानियाँ और उनके मोअजज़ात का ज़िक्र कुरआन के खुश्क अहकामात व हिदायात से कहीं अधिक रुचि का कारण हो सकता हैl

 

Reflections on Qur'anic Message - Part-11  कुरआन के अनुसार ज़कात सहित सदका पुरी मानवता की देख भाल से इबारत है, यह ही इस्लामी मानवतावाद का आधार है
Muhammad Yunus, New Age Islam

खुलासा यह है कि जब कुरआन एक मुसलमान से चाहे वह अमीर हो या गरीब, परुष हो या स्त्री "اقیمو الصلوٰۃ و اٰتو الزکوٰۃ" कहता है, तो वह न केवल यह कि नमाज़ कायम करने का आदेश देता है बल्की अपने ख्यालात को पाक करने के लिए दोसरों के लिए रहमत औ शफकत का रवय्या अपनाने का भी आदेश देता हैl और यह अपने दिमाग को सभी नकारात्मक और बुरे ख्यालात से पाक करना हैl एक मालदार व्यक्ति के लिए ज़कात के फ़रीज़े से बारी होने के लिए सदके में सखावत का प्रदर्शन करना आवशयक है (9:60) जोकि फ़र्ज़ ज़कात की बुनियाद है जिस पर हम अलग से प्रकाश डालेंगेl

 

A Plea for Reaching A Common Understanding Of Islam  अतिवादियों के विचारधारा का मुकाबला करने के लिए इस्लाम की एक सामान्य समझ कायम करने की मांग
Naseer Ahmed, New Age Islam

कुरआन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्लाम में ज़मीर की आजादी बगैर किसी कैद के मुतलक हैl “मज़हब में जब्र व इकराह की कोई गुंजाइश नहीं है” और “पुर अमन काफिरों के लिए उनका रास्ता है और हमारे लिए हमारा रास्ता” बुनियादी उसूल हैंl मजहबी आधार पर ज़ुल्म व सितम के खिलाफ अपनी लड़ाई में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी भी इस उसूल से समझौता नहीं किया हैl पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जंग काफिरों और कुफ्र से नहीं थी बलिक अल्लाह का दीन कायम करने के लिए मजहबी आधार पर ज़ुल्म व सितम करने वालों से थी, जिसमें जब्र व तशद्दुद की गुंजाइश न हो और लोग किसी भी मज़हब पर अमल करने के लिए आज़ाद होंl

 

Reflections on Qur'anic Message - Part-10  जरूरतमंदों पर खर्च करना
Muhammad Yunus, New Age Islam

कुरआन जिसका इस्लाम के प्रारम्भिक दौर में समाजी, व्यावसायिक और सामजिक मूल्यों पर प्रभुत्व था इसने उस दौर में आमदनी के असमानता को बड़े स्तर पर कम किया होगा, लेकिन इस ज़माने और कुरआनी दृष्टिकोण से लोगों की दूरी ने इस्लामी समाज को कई शताब्दी पीछे कर दिया हैl इसका प्रदर्शन बढती हुई गरीबी, आमदनी में बढ़ता हुआ अंतर, सामजिक कफालतों की कमी, भिकारियों और बच्चा मजदूरी की बढ़ती हुई संख्या, और तीसरी दुनिया के अधिकतर मुस्लिम देशों में सस्ते औद्योगिक और घरेलु मजदूरों की उपलब्धता में बढ़ोतरी से होता हैl

 

Reflections on Qur'anic Message - Part-9  तक़वा और नमाज़ के बीच अंतर (भाग 9)
Muhammad Yunus, New Age Islam

शब्द तक़वा और इसका शाब्दिक नाम मुत्तकी और इसके माद्दह से मिलते जुलते दुसरे शब्द सैंकड़ों कुरआनी आयात में वारिद हुए हैंl मुस्लिम उलेमा ने इसकी विभिन्न परिभाषाएं पेश की हैं जैसे खुदा की तरफ आकर्षित होना, खुदा का रास्ता दिखाना, खुदा से डरना, खुदा को याद रखना, बुराई से बचना, खुद की बुराई से सुरक्षा करना और परहेज़गारी आदिl संदर्भ व एक विस्तृत दृष्टिकोण में व्यक्तिगत शब्द के मुताबिक़ तक़वा का अर्थ इंसान का अपनी उन सार्वभौमिक और व्यवहारिक जिम्मेदारियों से सचेत रहना है [1] जिनका खुदा ने उसे अमीन बनाया है, या एक शब्द में यह अखलाक़ी दयानतदारी  है जैसा कि शीर्षक मे प्रयोग किया गया हैl

 

मुख्य रूप से इस्लामी जिहाद के फलसफे में जिहाद का उद्देश्य एक ऐसी शांतिपूर्ण, रचनात्मक, व्यवहारिक और अध्यात्मिक संघर्ष है जो हक़ व सदाकत और मानवता के कल्याण के लिए की जाती हैl यह संघर्ष सैद्धांतिक आधार पर केवल ऐसे माहौल का तक़ाज़ा करती है जिसमें हर व्यक्ति का विवेक, ज़ुबान और कलम अपना संदेश ह्रदय तक पहुँचाने में स्वतन्त्र होl समाज में शान्ति और सौहार्द का बोल बाला होl मानवाधिकार पुर्णतः सुरक्षित होl अत्याचार व शोषण और दमन की कोई गुंजाइश ना हो और संसार के सभी देश शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के रिश्ते में संलग्न हों,

Reflections on Qur'anic Message - Part-8  कुरआन में तक़वा का आफ़ाक़ी अवधारणा (भाग-8)
Muhammad Yunus, New Age Islam

पिछले लेख में इंसान के नफ्स के प्रतिरोध और उसकी तुच्छ इच्छाओं और लालच व वासना पर एक पहरेदार के रूप में तक़वा के कुरआनी अवधारण को पेश करने के लिए कुरआन की प्रारम्भिक आयतों (91:1-10) को पेश किया गया थाl जैसा कि कुरआन अमली तौर पर इंसान की नफसानी इच्छाओं के विरुद्ध वास्तव में एक जंग का एलान है, इसकी प्रारम्भिक आयतें (अल बकरा: 2-5) में तक़वा की अवधारणा पेश की गई है जो कि कुरआन में एक छोटी सूरत के बाद स्थित है:

 

Reflections on Qur'anic Message – Part – 7  मानव चेतना में अच्छाई और बुराई का संघर्ष (भाग-7)
Muhammad Yunus, New Age Islam

हम ने ये प्रदर्शित किया कि इलाही रचनात्मक नियोजन में मानव चेतना अच्छाई और बुराई के संघर्ष का संयोजन है और जब तक वह बुराई से बाज़ नहीं रहता तब तक वह नेकी का नमूना नहीं बन सकताl. कुरआन की शुरुआती सूरत अश्शम्स में कुरआन ने इंसान की खुदी के शीर्षक की ओर पेश कदमी करने के लिए प्रकृति की महानता और मानवीय नफ्स के सर को एकत्रित किया हैl कुरआन का एलान हैl

 

Reflections on Qur'anic Message (Part-6)  कुरआन नेक आमाल को सभी मोमिनों के लिए एक साझा गुणवत्ता करार देता है (भाग 6)
Muhammad Yunus, New Age Islam

पिछले लेख में हमने जहाँ चर्चा समाप्त की थी इस लेख में वहीँ से प्रारम्भ करते हैं: अल्लाह की वहदानियत को स्वीकार करने के साथ “अच्छे कर्म” एक वैश्विक दीन इस्लाम की रूह हैl अब हम पुरुष व स्त्री और मज़हब से कता नज़र उन सभी लोगों के लिए जो अल्लाह पर और अपनी हतमी (अंतिम) जवाबदेही पर विश्वास रखते हैं अल्लाह के फैसले के एकमात्र मानक के तौर पर “ अच्छे कर्म” के किरदार के हवाले से कुरआन के संदेश पर विचार करेंगे: कुरआन का फरमान है:

 

The Triple Talaq Case  तीन तलाक का मामला: अन्याय करने वाले मुस्लिम पुरुष और उनके अन्याय करने वाले रहबर
Naseer Ahmed, New Age Islam

केस से यह सिद्ध होता है कि आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और उलेमा ने शाह बनों मामले से सबक नहीं सीखा हैl। तीन तलाक को बिदअत और कुरआन करीम की शरीअत के विरुद्ध और अवांछित माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद हमारे उलेमा इसको खुद अवैध करार देने के लिए तैयार नहीं हैं। हालाँकि मुस्लिम महिलाएं और उनके संगठन इसकी मांग कर रही हैं।l क्या वह मुसलमानों के उपर अल्लाह के और भी गज़ब के प्रतीक्षित हैं? क्या उनकी नज़र दीवार पर लिखी हुई उस तहरीर पर नहीं पड़ती कि अगर वह अपनी महिलाओं को न्याय देने के लिए खुद को नहीं बदलते और अपनी सुधार नहीं करते तो वह तबाह हो जाएँगे? यह एक शर्मनाक बात है कि इस केस को न्याय के लिए अदालतों में जाना पड़ा था और आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड इस समस्या को आल इण्डिया वीमेंस पर्सनल ला बोर्ड और भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के साथ वार्ता से हल न कर सकाl

 

Make Revolutionary Changes  'जिहादी विचारधारा से लड़ने के लिए इज्माअ की इस्लामी फिकह में क्रांतिकारी बदलाव लाया जाए': सुल्तान शाहीन का संयुक्त राष्ट्र यूएनएचआरसी में मुस्लिम देशों से मांग
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

पहली बात यह है कि हालांकि जेहादियत वहाबियत और सल्फियत की एक कट्टरपंथी शाख है, फिर भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से वहाबी और सल्फी विचारधारा के अलमबरदारों को पुरे विश्व में मुस्लिम समाज के अन्दर वहाबी विचारधारा की प्रचार प्रसार में लाखों डालर खर्च करने की अनुमति प्राप्त है।दूसरी बात, हाल ही में हमने एक वहशतनाक दृश्य का सामना किया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से इस पर कोई भी विरोधी आवाज़ बुलंद नहीं की गई, और वह यह कि संयुक्त राष्ट्र के नामज़द आतंकवादी (जिसके सिर पर 10 मिलियन डालर का इनाम है) ने एक राजनीतिक पार्टी का प्रारम्भ किया और एक दुसरे अमेरिका के नामज़द आतंकवादी को पकिस्तान में लोकतांत्रिक चुनाव लड़ने के लिए नामज़द किया। जाहिर है कुछ देश संयुक्त राष्ट्र के निर्देश को बिना किसी डर के अनदेखा कर सकते हैं।

 

The Mutashaabihat Or The Allegorical Verses Of The Quran  कुरआन में आयाते मुतशाबेहात
Naseer Ahmed, New Age Islam
अल्लाह ने साफ़ कर दिया है कि किन शब्दों का शाब्दिक अनुवाद किया जाएगा और किन शब्दों के व्याख्या की आवश्यकता है। लेकिन विडंबना यह है कि इस किताब कुरआन को गलत अंदाज़ में समझा गया है क्यों कि आयते मुह्कमात कि जिनका शाब्दिक अनुवाद किया जाना चाहिए था उनकी भी व्याख्या इस अंदाज़ में की गई है कि जिसका परिणाम यह है कि कुरआन की एक साझा समझ कायम होने की बजाए उससे संबंधित हर इंसान के पास एक अलग तफहीम (समझ) और व्याख्या है!

 

Reflections on Qur'anic Message (Part 5)  इस्लाम में अच्छे कामों की अहमियत और उपयोगिता (भाग 5)
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसलिए, कुरआन भी इस बात की गवाही देता है कि मज़हब और पैगंबर से कतए नज़र अल्लाह पर जिसका ईमान उसके अन्दर नेकी का जज़्बा पैदा करता है उसे अल्लाह की बारगाह से इसका अच्छा बदला मिलेगाl इसी लिए जैसा कि इमरान खान ने कहा “अल्लाह पर ईमान रखना और नेक अमल करना ईमान की बुनियाद है”, या इस्लामी शिक्षाओं का प्रतिबिम्ब हैl लेकिन यह अवधारणा इस्लाम के स्तंभ नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात का महत्व न तो कम करता है और न ही उसे समाप्त करता हैl बल्की यह उन स्तंभों को एक शानदार ढांचा प्रदान करता हैl

 

Reflections on Kindness to Humanity in Qur’anic Message – (Part 4)  कुरआन में खुदा की बनाई हुई चीजों के साथ प्रेम और दया (भाग ४)
Muhammad Yunus, New Age Islam

सामाजिक न्याय के विषय पर पिछले लेखों की तरह, इस लेख का उद्देश्य कुरआन के संदेश को पाठकों की सेवा में सीधे प्रस्तुत करना है, ताकि अगर वे इसके पवित्र कलाम होने में विश्वास रखते हैं तो वह इसकी आसानी के साथ समझ में आने वाले संदेशों और आदेशों को समझ सकें और उन पर विचार विमर्श कर सकें। खुदा की बनाई हुई चीजों के साथ प्रेम और दया........

 

Reflections on Social Responsibilities in Islam (Part 3)  इस्लाम में सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार (भाग ३)
Muhammad Yunus, New Age Islam

आज प्रत्येक मनुष्य अपनी आय के स्तर से नजर बचा कर अपनी जीवन स्तर को ऊँचा करने की इच्छा में डूबा हुआ है। वह सबसे अधिक महंगा मकान किराये पर लेना चाहता है, सबसे बड़ा घर निर्माण करना या खरीदना चाहता है, सबसे अधिक महंगे फर्नीचर, अभी बुनयादी आवाश्यकताओं अतिरिक्त आवश्यकताओं कि वस्तुओं जैसे, कार, एसी, टीवी, मोबाइल, आई फ़ोन, आई पैड में भी लेटेस्ट मॉडल और सभी घरेलू सजावटी चीजें, पलंग, बर्तन, और रसोई के सभी उपकरण और साधन भी खरीदना चाहता है। लेकिन उसके इच्छाओं का अंत यही नहीं है। बल्कि…..

 

कौन जनता है आइएसआइएस में कितने गैर मुस्लिम मुसलमानों के हुलिए में मौजूद हैं और कितने मुसलमान अज्ञानता वश इस में शामिल हो गए हैं। हर हाल में आइएसआइएस और कट्टरपंथी तालिबान का खात्मा आवश्यक हो गया है वरना इन देशों के मुसलमान आराम और चैन से जी नहीं सकते। पश्चिमी देशों में ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसका इलाज पेश कर रहे हैं मगर शासक इसे सुनने और मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अब आतंकवाद एक ऐसे बीमारी में बदल चुकी है जो ला इलाज है। पश्चिमी देश खरबों डालर खर्च करने के लिए तैयार हैं मगर इसका विश्लेषण करने के लिए तैयार नहीं हैं। जो समस्याएँ बात चीत से और थोड़ा ले दे कर सुलझाए जा सकते हैं उनके लिए खरबों डालर और हजारों जानें गंवा रहे हैं।

 

The Prophet Muhammad—the Paragon of Mercy In The Light of Quran  कुरआन गवाह है मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहमत की जान हैं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

अल्लाह पाक ने हुजुर नबी अकरम मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पुरी दुनिया के लिये रहमत बना कर भेजाl। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जो धर्म और शिक्षा मानवता को अता किया वह पूरी तरह से दया, करूणा और प्रेम पर आधारित हैंl अल्लाह पाक ने कुरआन में कई बार आपकी रहमत का उल्लेख किया हैl नीचे हम क़ुरआन की कुछ आयाते तैयबा और उनकी लोकप्रिय तफ़सीर पेश कर रहे हैं जिनके अध्ययन से यह बात उज्ज्वल दिन की तरह स्पष्ट हो जाती है कि मुस्तफा सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम रहमत की जान हैं।

इस्लाम को एक आक्रामक धर्म और मुसलमानों को आतंकवादी कौम घोषित करना इस्लाम के अटल सिद्धांतों से बेख़बरी का कारण या जानबूझ संकीर्ण मानसिकता का खराब उदाहरण है। इस्लाम हमेशा धार्मिक पवित्रता और कौम की पहचान, मानवीय उद्धार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध और लगातार प्रयास की अनुमति ज़रूर देता है और तबलीग व हिदायत की हर संभव पथ को व्याकुलता के साथ तय करने के लिए शिक्षा पर जोर देता है। अल्लाह पाक नें (सूरः नहल) में फरमाया '' ऐ नबी अपने रब के रास्ते की तरफ ज्ञान और उत्कृष्ट नसीहत के साथ निमंत्रण दो और लोगों से चर्चा करो ऐसे तरीके से जो अच्छा हो ''।

 

Reflections on Social Justice in Islam (Part 2)  इस्लाम में सामाजिक न्याय पर विचार (भाग २)
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसलिए, यदि हम उक्त शब्दों के प्रकाश में कुरआन की संदर्भित आयतों पर विचार करें तो यह साबित होता है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए और जहां तक संभव हो नस्ल,धर्म या राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना अनिवार्य रूप से हर प्रकार के जरूरतमंद और शरण चाहने वालों की भी वित्तीय सहायता करनी चाहिए और अपने सहयोग का हाथ उनसे कभी नहीं खीचना चाहिए।

 

Faith and Its Limits: Religious Freedom under the Constitution Is Conditional  धर्म और उसकी सीमा: संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सशर्त है
Tahir Mahmood
जहां तक मुसलमानों का सवाल है तो उनका मामला यह है कि इस्लामी फ़िक्ह के तहत धार्मिक आदेश और शिक्षाओं को दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें से एक ईबादात (आध्यात्मिक मामला) और मुआमलात (सांसारिक मामला) हैं, और उनमें से प्रत्येक में एक और वर्गीकरण है। जिन दिनचर्या का आदेश विशेष रूप से (आसमानी किताब) कुरआन या (पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कथन) हदीस ने दिया है वह या तो फ़र्ज़ हैं या वाजिब हैं। और इसके अलावा धार्मिक पुस्तकों में वर्णित अन्य सभी कार्य या तो मुस्तहब है या जाईज़ हैं। इस वर्गीकरण के मद्देनजर जो धार्मिक अनुष्ठान मुसलमानों के लिए फर्ज़ या वाजिब हैं उन्हें भारत में संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान में शामिल कर लिया जाएगा।

 

Reflections on Social Justice in Islam (Part 1)  इस्लाम में सामाजिक न्याय पर विचार (भाग-१)
Muhammad Yunus, New Age Islam

गरीब मुसीबत और बदहाली का शिकार हैं, कमजोर और क्षीण बच्चे कूड़े के ढेर में इसलिए हाथ पैर मार रहे हैं कि उन्हें कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिसे खाकर वह अपनी भूख मिटा सकें या जिसे बेचकर कुछ सामाने जिंदगी प्राप्त करें, छोटे बच्चे सड़कों के किनारे गैरेजों और भरी भरकम रचनात्मक कार्यों में मजदूरी कर रहे हैं,भूख से बदहाल बच्चे शिविरों और शरणार्थियों में रोटी के एक टुकड़े के लिए सरगर्दा हैं,कम मजदूरी पाने वाले घरेलू और औद्योगिक मजदूरों को कोई सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है और है भी तो नाममात्र तथा वह खिदमाती शर्तें और चिकित्सा सेवाओं से भी वंचित हैं।

 

Remembrance of Rabbul-Alamin, Rahmatul-lil-Alamin and Errors of Deobandi Ulema  रब्बुलआलमीन और रहमतुल्लिल आलमीन का तज़किरा और उलेमा ए देवबंद की खताएं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

सार वचन यह है कि अल्लाह पाक रब्बुलआलमीन है यानी सारे संसारों का रब है और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहमतुल्लिल आलमीन हैं यानी सारे संसारों के लिए दया हैं.इसके लिए यह कहना कि अल्लाह पाक सिर्फ मुसलमानों या बस मनुष्यों का रब है कभी जायज नहीं इसी तरह यह कहना कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम केवल लोगों के लिए रहमत या केवल मुकल्लेफीन या सिर्फ मुसलमानों के लिए रहमत हैं, कभी वैध नहीं, बल्कि वह सारे जहानों के लिए रहमत हैं, जिनात व इंसान, पक्षी, पशु व वनस्पतियों,मुसलमान हो या नास्तिक,मुकल्लफ़ हो या गैर मुकल्लफ़ आदि सभी के लिए रहमत हैं।

Imam Ja'far Sadiq- Imam of Both Shia and Sunni  इमाम जाफर अलसादिक शिया, सुन्नी दोनों समुदायों के इमाम
Zafarul Islam Khan

बहुत शुरुआती दौर में मुसलमानों के बीच अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिलाफत यानी उनके बाद दीनी और राजनीतिक अर्थ में उनका वारिस होने के बारे में मतभेद पैदा हुआ जिसकी वजह से मुसलमानों में आज तक मतभेद चला आ रहा है। एक पक्ष ने शूराई खिलाफत की ताईद की और वह अहले सुन्नत कहलाए। उनका मानना था कि खलीफा का चयन शुरा से होना चाहिए और मुसलमानों में जो सबसे अधिक ज्ञानी, न्यायप्रिय और बहादुर हो उसी को इमाम होना चाहिए।

The Dichotomy between Sharia Law of Islam (Islamic Law) and the Sharia of Islam  'इस्लाम के शरई कानून' और 'इस्लामी शरीअत' के बीच स्पष्ट विरोधाभास
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि इस्लामी शरई कानून' के कई निर्णय 'इस्लामी शरीअत (कुरआनी पैगाम)' के साथ परस्पर विरोधी हैं। जैसे इस्लामी शरीअत के साथ परस्पर विरोधी उन आदेशों में व्यभिचार के लिए संगसारी, स्वधर्म त्याग और तौहीन के लिए मौत की सजा, संगठित गुलामी, अस्थायी शादी, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन के खिलाफ माता-पिता की गैर जवाबदेही, एक बैठक में तीन तलाक, बलात्कारका कानून, महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध, पूर्ण घूंघट और लिंग आधारित महिलाओं को अलग रखना, गैर मुसलमानों के खिलाफ शत्रुता और घृणा, मुस्लिम और गैर मुस्लिम के बीच दुनिया का वितरण, गैर मुसलमानों के खिलाफ लगातार जिहाद, कैदी गैर मुस्लिम महिलाओं का जबरन धर्म बदलना और नृत्य और संगीत जैसे सभी कला पर प्रतिबंध लगाना शामिल हैं।

 

Triple Talaq Must Be Invalidated Constitutionally and Criminalized  तीन तलाक को गैर कानूनी प्रक्रिया और अपराध करार दिया जाना चाहिए
Muhammad Yunus, New Age Islam

पैरा 4 में यह दलील दी गई है कि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए तब भी पुरुष तीन तलाक देना जारी रखेंगे और शादी को बनाए रखने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को अकदे निकाह की अदम तहलील का निर्णय प्राप्त करने के लिए वर्षों तक ऐसी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी जिसमें माल और समय दोनों खर्च होते हैं। यह तर्क भी खराब है। इसलिए कि अगर तीन तलाक को गलत या अवैध करार दे दिया जाता है तो (गवाहों की उपस्थिति में)में तीन तलाक देने वाले पुरुष पर मुकदमा चलाया जाएगा, यहां तक कि वह इस बात को स्वीकार करे कि उसने तलाक बेपरवाही (2: 225) या नशा की हालत में दिया है -कि जिसमें बोलने वाले का भरोसा नहीं किया जाता है (4:43)।

 
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    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • I thought I had reached some clarity in this debate, but it seems Yunus Saheb is not very happy with my understanding of his position. ...
    ( By Sultan Shahin )
  • Thank you Ghaus Saheb for your clarification. This "vice versa" had really troubled me.
    ( By Sultan Shahin )
  • I came across this article after it was referred in one of the YouTube videos. The very essence of today's fight between two countries divided ...
    ( By Manjunatha Swamy )
  • “Now, after decades of global inaction and a seal of US approval, Israel will be emboldened to hasten...
    ( By Skepticles )
  • Naseer sahib, You are talking about the idea of supremacism. Please tell me honestly. When you say “some Mushrik are Kafir”, is there not the ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقي )
  • Sultan Shahin sahib, perhaps the following part of my comment in which i used ‘vice versa’ appeared to you as questionable. If it is really ...
    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقي )