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लोकसभा के परिणामों के बाद मामूली अंतराल के बाद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने दो बार मुसलमानों के सम्बन्ध से लचकदार रवय्या अपनाया है और उनके रवय्ये में अचानक अद्भुत परिवर्तन घटित हुआl पहले उन्होंने संसद के केन्द्रीय हाल में बीजेपी और एनडीए में शामिल दोसरी पार्टियों के चुनें संसद सदस्यों के सामने जो बयान दिया, इसकी गूंज और इस पर बहस का सिलसिला अभी समाप्त नहीं हुआ थाl........

 

ईद की नमाज़ के बाद गले मिलना एक अच्छा काम है जिस से आपसी विवाद और दूरियाँ समाप्त होती हैं और आपसी उल्फत व मोहब्बत को बढ़ावा मिलता हैl शताब्दियों से मुसलमानों में यह अमल प्रचलित है लेकिन अभी कुछ दिनों पहले दारुल उलूम देवबंद की और से ईद के मौके पर एक फतवा आया जिससे ना केवल मुसलमानों की दिल आजारी हुई बल्कि इस फतवा का दोसरी कौमों ने भी बढ़ चढ़ कर मज़ाक उड़ायाl

 

देहली के खुरेजी ख़ास क्षेत्र में ईद की नमाज़ के बाद एक कार तेज़ी से गुजरी और कई लोगों को टक्कर मारती हुई भाग निकलीl जिसके बाद अफवाहों का बाज़ार गर्म हो गयाl मुझे जो पहला मैसेज इस सिलसिले में मिला उसमें लिखा गया था कि खुरेजी ख़ास क्षेत्र में नमाजियों पर एक व्यक्ति ने कार दौड़ा दी जिस से साथ या आठ आदमी घायल हो गएl

 

हक़ व बातिल के इस जंग से आतंकवाद का जोश व जज़्बा प्राप्त करने वाले मुस्लिम युवा इन दोनों के बीच एक बुनियादी तुलना करने से चूक जाते हैं कि प्रारम्भिक इस्लाम इन जंगों की प्रकृति क्या थी और इन आतंकवादी तत्वों के संघर्ष की प्रकृति क्या है!

 

एक बन्दे को चाहिए कि अपने रब की इबादत और उसके आदेशों का अनुसरण करने में इखलास व नेकनीयती का प्रदर्शन करे, एक मखलूक को चाहिए कि दोसरे मखलूक के साथ मामलों और संबंधों को सुंदरता और इखलास व नेकनीयती के साथ निभाएl एक शहरी की जिम्मेदारी यह है कि वह अपने देश के लिए पुरी वफादारी और इखलास व नेकनीयती के साथ जीवन गुज़ारे, इसके निर्माण व विकास में बढ़ चढ़ कर भाग लेl

 

जब मुसलामानों की एक बड़ी जनसंख्या अपनी जाती ज़िन्दगी में कुरआनी शरीअत नाफ़िज़ कर ले तभी रियासत के कानून में परिवर्तन हो सकेगीl लोकतंत्र एक बेहतरीन और वाहिद रास्ता है और निश्चित रूप से यही एक ऐसे धर्म में परिवर्तन पैदा करने का इस्लामी रास्ता है जिसका एलान यह है कि “दीन में जबर व इकराह की कोई गुंजाइश नहीं है”l

 

हालिया कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि जब भी रमजानुल मुबारक की १७ वीं तारीख आती है कश्मीर की घाटी के इन नेताओं की सरगर्मियां तेज़ हो जाती हैं और वह गजवा ए बद्र की उस तारीख का इस्तेमाल गजवा ए हिन्द की फर्जी मुहिम जुई के लिए ज़मीन हमवार करने और घाटी के सीधे साधे नवयुवकों को आतंकवाद की आग में झोकने के लिए करते हैंl

 

यह भी देखा गया है कि कभी कभी कुछ अहले इल्म मफहूम ए कुरआन की तसहील और तामीम में तफसीर ए कुरआन के उसूल व मुबादियात का इल्तेजाम नहीं कर पाते जिसके नतीजे में मफहूम परिवर्तित हो जाता है और कुछ जगहों पर कुरआन की अर्थ में बदलाव भी लाजिम आती हैl

 

तौबा का घर हमेशा खुला रहता है, अल्लाह का कोई भी बंदा अगर सच्चे दिल के साथ अपने गुनाहों की तौबा कर ले तो उसकी तौबा कुबूल होती है और अल्लाह उसे अपनी नेअमतों से नवाज़ता हैl

 

हमारे समाज में फैलती जा रही इस बुराई का खात्मा करने के लिए यह सिलसिलेवार लेख आप तक पेश करने की सआदत  हासिल कर रही हूँl इस किस्तवार लेख में पाक हदीसों और नेक लोगों के कथन की रौशनी में बद दयान्ति की दुनयवी और उखरवी नुक्सानों और नेकनीयती के अनेकों लाभ बताए जाएंगे ताकि इस्लाम का कलमा पढ़ने वाले मुसलमानों के अन्दर इखलास व नेकनीयती का जज्बा पैदा होl.........

 

वलीमा इतना मुबारक कार्य है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसमें बरकत की दुआ फरमाईl एक हदीस शरीफ में है कि एक बार लोगों ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत उम्र फारुक रज़ीअल्लाहु अन्हु से पूछा कि क्या बात है कि शादी के खाने में हमको जो लज्ज़त और खुशबु मिलती है वह आम खानों में नहीं मिलती?

 

यह रमजानुल मुबारक का पाक महीना है जिसमें अपने गुनाहों की मगफिरत और अपने रब को राज़ी करने के लिए गरीबों, मोहताजों कू जरूरियात पूरी की जाए और खुद भी उनको खाना खिलाएं और अपने करीबियों को भी नेक अमल करने की ताकीद करेंl

Roza and Health रोज़ा और सेहत
Muhammad Ansar Usmani, New Age Islam

जो लोग बिस्यार खोरी की लत में लिप्त होते हैं उनके रमज़ान में रोज़ा रखने से जिस्मानी साख्त में बेहतरी के आसार नमूदार होते हैंl अल्लाह पाक का बहोत बड़ा एहसान है कि उसने हम मुसलमानों पर रोज़े रखने फर्ज़ किये हैंl.........

 

रमजान उल मुबारक में अहल ए ईमान के रिजक को कुशादा कर दिया जाता हैl यह चूँकि कुरआन की नुज़ूल का महीना है इसलिए कुरआन की बरकत से जिंदगियों में ईमान व यकीन की रौशनियाँ पैदा होती हैंl हर जगह अमन व भाई चारे की फिज़ा बन जाती हैl

 

रोज़ा एक दिनी फरीज़ा और अफज़ल इबादत है जिसके लिए बड़े सवाब का वादा अल्लाह ने किया हैl कुरआन में रोज़े की ताकीद की गई और हदीसों में भी रोज़े की बहोत ताकीद की गई हैl कुरआन में रोजों के सम्बन्ध में कहा गया है कि पिछली सभी उम्मतों पर रोज़ा फर्ज़ किया गयाl........

 

एक प्रश्न बार बार पूछा जाता है कि क्या अत्यधिक क्रोध की हालात में तलाक हो जाती है या नहीं? फुकहा इस प्रश्न का उत्तर तकय्यिद के साथ देते हैं कि गुस्से की वह हालत जो हद जूनून तक पहुँच जाए इस हालत में तलाक स्थित नहीं होतीl

 

कुरआन इंसानों को खुदा की अजमतों का ज़िक्र करते हुए यह बिंदु भी बयान करता है कि खुदा की अजमतों का एतेराफ ना केवल जानवर करते हैं बज़ाहिर गैर जानदार चीजें भी करती हैं क्योंकि उनको खुदा की हिकमत और ताक़त का अंदाजा हैl यह ज़मीन और आसमान, पेड़, पहाड़, चाँद, सूरज और कीड़े मकोड़े यहाँ तक कि साए भी खुदा को सजदा करते हैंl

 

श्रीलंका में आतंकी हमले के बाद भारत में बुर्के पर प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की जा रही है. शिवसेना के मुखपत्र सामना  का सम्पादकीय पूछता है कि रावण की लंका में बुर्के पर प्रतिबन्ध लग गया है, राम की अयोध्या में कब लगेगा…..

 

आतंकवादी संगठनों पर वतन का मफहूम इसलिए स्पष्ट ना हो सका क्योंकि कुरआन की समझ के सहीह स्रोतों का उन्होंने प्रयोग नहीं किया, देश प्रेम के इशारे कुरआन ए पाक और मुफ़स्सेरीन के कलाम में मौजूद हैंl इमाम राज़ी, मुल्ला अली कारी और दोसरे अनेकों उलेमा व मुफ़स्सेरीन के यहाँ इसको देखा जा सकता हैl

 

भारत में मुफ़्ती ए आज़म का खिताब उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसे इस्लामी मामलों में फतवा या प्रमाणिक कानूनी राय देने का विकल्प प्राप्त होl लेकिन क़ाज़ी अल कज़ाह की इस ताज़ा नियुक्ति पर एक गहरी नज़र डालने से बरेलवी मसलक के उलेमा के वर्ग में आपसी प्रतियोगिता और मतभेद व फूट का पता चलता हैl........

 

हज़रत इबराहीम अलैहिस्सलाम को यहूदी और नसरानी अपने फिरके का इमाम बताते हैं जबकि कुरआन कहता है कि वह ना तो यहूदी थे औए ना ही नसरानीl इबराहीम की की औलादें और उनकी उम्मत में से जो लोग खुदा की वहदत पर ईमान लाए उनहें मुसलमान कहा गयाl

ख्वारिज के यहाँ भी पहला मसला हाकिमियत का था और आज भी शिद्दत पसंद जमातों का सबसे महत्वपूर्ण मसला यही है (५) ख्वारिज जिस तरह की दलीलों से मान सकते थे उन्हीं को उनके सामने पेश किया ऐसा नहीं था कि उन्होंने ख्वारिज को हार देने के लिए कोई नया मनहज या हदीस के इनकार का सहारा लियाl.........

 

दुनिया का पहला प्रिंटेड कुरआन १५३७ में इटली के शहर वेनिस के एक प्रिंटिंग प्रेस में छापा गयाl दोसरा कुरआन १६९४ हेम्बर्ग जर्मनी और तीसरा कुरआन रूस में छापा गयाl यह वह समय था जब मुस्लिम दुनिया में किसी प्रकार का प्रिंटिंग प्रेस लगाना या कोई प्रिंटेड किताब रखना हराम और बड़ा अपराध थाl

 

जिस प्रकार कुरआन ने नमाज़ और ज़कात को बराबर रूप से आवश्यक करार दिया है उसी प्रकार कुरआन ने कई मौकों पर मोहताजों को खिलाने की भी ताकीद की हैl इससे यह तास्सुर मिलता है कि मोहताजों को खिलाना भी मोमिन का एक फरीज़ा है और उसके लिए बहोत सवाब का वादा किया गया हैl मोहताजों को खिलाने वाला आसानी से जन्नत में जाएगाl........

 

हम मुसलमान कुरआन और सुन्नत पर ईमान रखते हैं लेकिन अफ़सोस की बात है कि हम में से बहुत सारे लोग इनकी शिक्षाओं पर अमल नहीं करतेl ऐसे भी कुछ मुसलमान हैं जो इस्लाम का प्रयोग केवल अपने राजनीतिक हितों के लिए करते हैं और परिणामस्वरूप इस्लाम की ज़िल्लत व रुसवाई का कारण बन जाते हैंl....

 
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  • @Abhijnan Kharmul , nothing wrong or bad about the above examples . Infact , there are wrong intrepretation ....
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  • I gave example "one day every one come under islam" "without allah no one has to worship any other ....
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  • @Hakim Ahmed , that's what I have written above that there is no Islamic terrorism but only political terrorism .'
    ( By Irfan Ali Mansoor )
  • Will u please identify where is Islamic terrorism, it is only state sponsored terrorism all over world ....
    ( By Mansoor Hakkim Ahamed )
  • @Sheikh Shaheen , under no circumstances anyone should raise or pick up guns against any Government ! ....
    ( By Irfan Ali )
  • @Abhijnan Khamrui Brother which one verse of Quran'
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  • They are not sincere,behind the scene they all support them.None of them have condemned terrorism openly.'
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  • Blessed are the peace makers for they will be called children of God.
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