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यह बात लगभग स्पष्ट है कि बाबरी मस्जिद विवाद के मामले पर सुप्रीम कोर्ट शीघ्र ही निर्णय सूना दे गाl सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय पर गौर करते हुए ऐसा नहीं लगता कि अदालत अपने निर्णय में और देरी करे गाl हालिया फैसलों से भी हमें एक इशारा दिया है कि फैसला किसके हक़ में जाए गाl तथापि यह मानते हुए कि सुप्रीम कोर्ट अभी निष्पक्ष है, सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला ‘मुस्लिम पार्टी’ के हक़ में या “हिन्दू पार्टी” के हक़ में पेश करे गाl ....

 

भारत में मुसलमानों का थोड़ा असहज होना स्वाभाविक बात है क्योंकि देश को अयोध्या में बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद से संबंधित उच्च न्यायलय के निर्णय की प्रतीक्षा है जो कि कुछ ही दिनों में आने वाली हैl तरह तरह की अफवाहें परिवेश में फ़ैल रही हैं जो हमारे मीडिया के किसी भी जिम्मेदार हिस्से में तकरार के काबिल कल्पना नहीं की जाती हालांकि इस मामले से अधिकतर मुसलमानों को प्रतिरोध का सामना हैl…

 

इस्लामोफोबिया और इस्लाम परस्ताना हिंसा दोनों को ऐसे ऐसे जगहों पर बढ़ावा मिल रहा है जहां गुमान भी नहीं जाताl श्रीलंका गिरजा घरों पर हालिया हमले इतने ही आश्चर्यजनक थे जितने क्राइस्ट चर्च के मस्जिदों पर हमलेl और अब उसी प्रकार के दिल खराश हमले और भी दोसरी जगहों पर भी हो रहे हैंl और ज़ेनोफोबिक (गैरों से घृणा पर आधारित) हिंसा का यह सिलसिला अपने चरम पर हैl आज जबकि पूरी दुनिया जिहादी हिंसा का शिकार है, ख़ास तौर पर उन फिरका वाराना जंगों में सबसे अधिक हलाकतें मुसलमानों की ही हुई हैं जिनकी आग इस्लामी जिहादी विचारधारा के जरिये भड़काई गई हैl........

 

लेकिन वह ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकते कि लोगों के सामने दीन की सही तस्वीर पेश कर दें कि इससे उनके हितों पर ज़द लगने लगे गी और जंग व जिदाल और क़त्ल व किताल पर आधारित उनका पूरा कारोबार ख़त्म हो जाएगाl.......

 

यह वह कुरआनी आयतें और हदीसें हैं जिनमें प्रारम्भिक इस्लाम के कुछ सितम रसीदा मोमिनीन व मुस्लिमीन को अपने वजूद की बका के लिए उन लोगों से जंग करने की अनुमति दी गई थी जो उनके लिए जान बन चुके थेl......

 

पवित्र कुरआन की उल्लेखित आयतों और हदीसों के इतने उल्लेख से अब इस बात में कोई शक बाकी नहीं रहता कि गुनाहों से निजात हासिल करने के लिए अब हमारे पास सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह में तौबा करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं हैl.......

 

शैख़ यूसुफ अल अबीरी के इन कलिमात को आतंकवाद का ज़हर मैंने इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने अपने उपर्युक्त बयान में बे दरेग कत्ल की हिमायत की है और एक ऐसे नरसंहार का समर्थन इस्लाम और पैगंबर ए इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हवाले से पेश करने की कोशिश की हैl.........

 

मौलाना तौकीर रज़ा: तो सुनिए तलाक़ ए बिदअत पर उन्होंने बिल बनाया है तलाक़ ए अहसन और तलाक़ ए हसन पर नहीं बनाया है तलाक़ ए बिदअत जो नशे में और गुस्से में होती है और ऐसी तलाक़ पर हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी नागवारी का इज़हार फरमाया था और हज़रत उमर के ज़माने में ऐसी तलाक़ पर कोड़े भी लगाए गए थे l........

 

कुरआन और सुन्नत ने खूँ रेज़ी को सख्ती से निषेध करार दिया हैl और जहां कहीं भी जंग की अनुमति दी गई वहाँ भी असल में मानवता की सुरक्षा ही मद्देनजर रहीl कुरआन पाक सरीह शब्दों में यह एलान करता है कि जिसने किसी एक जान को क़त्ल किया ना जान के बदले ना ज़मीन पर किसी आपराधिक कार्य के आधार पर तो गोया उसने पूरी इंसानियत का कत्ल कर दिया (अल मायदा).......

 

अक्टूबर १९४७ ई० में कश्मीर के महाराजा को कश्मीर का भारत से सहबद्ध करना पड़ा था वहाँ की जनता तीन वर्गों में बट गईl एक वर्ग आज़ाद राज्य, दोसरा वर्ग पाकिस्तान के साथ एकीकरण और तीसरा वर्ग भारत के साथ सहबद्धता का इच्छुक थाl

 

अल्लाह ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को शिफा याबी की ताकत अता की थीl इसलिए, अगर कोई बीमार शख्स उनके पास शिफा याबी के लिए आया तो क्या यह “शिर्क” हुआ? बेशक नहीं\, ख़ास तौर पर जब आने वाले को इस बात का शउर है कि शिफा की ताकत हज़रात ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने अता की हैl

 

कुरआन में मुसलमानों को दीन के प्रचार और इसके अस्तित्व के लिए मेहनत करने और कुर्बानी पेश करने की तलकीन की है और इसके लिए बड़े बदले की बशारत दी हैl मुसलमानों को दीन के प्रचार प्रसार और तौहीद के संदेश को जनता तक पहुंचाने के लिए हर तरह से मेहनत और संघर्ष करने की हिदायत दी हैl

 

कुरआन और दोसरे सभी आसमानी सहिफों में खुदा को निरंकार, बेमाहीत और लतीफ कहा गया हैl उसकी ज़ात को ना देखा जा सकता है, ना अंदाजा किया जा सकता है और ना उसे अक्ल पा सकती हैl उसे किसी भी माद्दी सूरत से पहचाना नहीं जा सकताl मगर इसके साथ ही साथ कुरआन यह भी कहता है कि वह सुनने, देखने, तदबीर करने और तखलीक करने और तबाह करने की सलाहियत रखता हैl

 

कुछ मुफ़स्सेरीन इस आयत (८५:१०) की तफ़सीर में फरमाते हैं कि यहाँ फितने में मुब्तिला करने से आग में जलाना भी मुराद लिया गया हैl मुफ़स्सेरीन के इस अर्थ की रू से देखा जाए तो मौजूदा दौर में होने वाले खुद काश हमलों, बम धमाकों, और बारूद से आम नागरिकों को जला कर मार देने वाले फितना परवर लोग अज़ाब के हकदार हैंl

 

डॉक्टर ज़वाहिरी, आपने कुरआन की एक विशिष्ट संदर्भ वाली आयत का हवाला देकर मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश की है, और एक ऐसी कुरआनी हिदायत में विस्तार पैदा करने की कोशिश की है जो स्पष्ट रूप से उस एक ख़ास जमात के हक़ में नाज़िल हुई थी जो इस्लाम के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ जंग के लिए तैयार थीl पिछले पांच छः सौ सालों से अनेकों उलेमा यही कहते हुए आए हैं कि इन आयतों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें उनका नुज़ूल हुआ थाl

 

खुदा ने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत के लिए यह भी फर्ज़ कर दिया है कि वह हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूद व सलाम कसरत से भेजते रहेंl दरूद व सलाम भेजना अफज़ल इबादत भी हैl दरूद व सलाम के बड़े सवाब की वजह से खुद हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने सहाबा से दरूद व सलाम की ताकीद करते थेl खुदा इस बात का आदेश इस आयत में देता है-

 

गायकार सोनू निगम ने कुछ समय पहले माइक पर अज़ान की आलोचना की थी तो मुसलमानों ने इसे असहिष्णु और संकीर्ण मानसिकता करार दिया था मगर अब कलकत्ता की एक मुस्लिम शख्सियत ने अज़ान की आलोचना कर के एक विवाद खड़ा कर दिया है और खुद मुसलमान ही बगलें झाँक रहे हैं और इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैंl घटना यह है कि २ जुलाई को कलकत्ता के मिल्ली अल अमीन कॉलेज में उलेमा, बुद्धिजीवियों और मिल्ली संगठनों के नेताओं की एक मुशावरती मीटिंग मिल्लत ए इस्लामिया के सामने मॉब लिंचिंग और दोसरे समस्याओं पर गौर करने के लिए बुलाई गई थीl

 

कुरआन के नाज़िल होने और हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भेजे जाने का उद्देश्य यही है कि इंसान के दुनियावी मामले बेहतर हो जाएं चाहे वह मामले ज़ाती हों, समाजी हों, पारिवारिक हों, वैवाहिक हों, व्यक्तिगत हों चाहे क्षेत्रीय या वैश्विक होंl असल उद्देश्य यह है कि इंसान की शख्सियत संवर जाए और इसकी सारी ताकत आख़िरत को बेहतर बनाने में खर्च होl

 

मज़हब पुर्णतः प्रकृति के खिलाफ साबित हुआ है इसलिए कि हर मज़हबी हुक्म या कानून उस चीज को खत्म करता है जिससे इंसान को लज्ज़त मिलती है और हर उस बात से परहेज़ करने का आदेश देता है जो खुद के हक़ में या समाज के हक़ में हानिकारक है, और बड़े पैमाने पर समाज की भलाई के लिए ऐसे कामों का आदेश देता है जो तकलीफदेह या नागवार हो सकते हैंl

 

बेशक हमारा प्यारा वतन एक महान देश हैl पूरी दुनिया में यहाँ की सभ्यता व संस्कृति ज्ञान व कला की प्राचीन काल में भी शोहरत व अज़मत थी और आज भी उन्हीं विशेषताओं के लिए जाना जाता हैl वर्तमान काल में विज्ञान और तकनीक ने और इस देश को उंचाई के शिखर तक पहुंचा दिया हैl इसके साथ साथ लोकतांत्रिक भारत के आंदोलन का इतिहास भी एक ऐसी रचनात्मक उदाहरण है जहां विभिन्न धर्मों और भाषाओं से संबंध रखने वाले शांति और अमन व सलामती के साथ रहते हैंl

 

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार काउंसिल ने पिछले मार्च एक प्रस्ताव स्वीकार किया था जिसे इस्लामी देशों की तरफ से पाकिस्तान ने पेश किया था जिसके अनुसार “धर्म का अपमान” को मानवाधिकारों की खिलाफवर्जी स्वीकार किया गया थाl ५६ देशों पर आधारित और्गिनाइज़ेश्न आफ इस्लामिक कांफ्रेंस का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तान ने कहा था कि “इस्लाम को हमेशा गलत तौर पर मानवाधिकार की खिलाफवर्जी और आतंकवाद के साथ जोड़ा जाता हैl इसने राज्यों से ऐसे लोगों पर पकड़ मजबूत करने का मुतालबा किया था जो नस्लीय और मज़हबी अल्पसंख्यकों के लिए असहिष्णुता का प्रदर्शन करते हैं और यह भी कहा था कि “सहिष्णुता और सभी दीनों व मजहबों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएंl

 

श्री राम कृष्ण को वेदांत में ही बुत परस्ती का जवाज़ नज़र आयाl हिन्दुओं के दोसरे बड़े धार्मिक आलिमों और रूहानी पेशवाओं ने भी बुत परस्ती को सहीह ठहरायाl इसलिए बुतपरस्ती हिन्दुओं में रिवाज पा गईl उनका विश्वास था कि बुतों पर इर्तेकाज़ के माध्यम से नए मुर्ताज़ को निर्गुण ब्राह्मण की पहचान हासिल करने में मदद मिलती है और वह आगे चल कर गुणों से खाली वास्तविक माबूद की पहचान हासिल करने में सफल हो जाते हैंl

 

जीव विज्ञान के विशेषज्ञों ने लम्बे अध्ययन और अवलोकन के बाद जानवरों के प्राकृतिक आदतों का उसी प्रकार निर्धारण किया है जैसे मनोविज्ञान के विशषज्ञों ने इंसानों के आंतरिक और सामाजिक व्यवहारों काl भेड़िया कुत्ते की नस्ल का शिकारी जानवर है लेकिन पालतू नहीं है अर्थात उसे कुत्ते की तरह पालतू नहीं बनाया जा सकता हैl आश्चर्यजनक बात है कि नस्ली विकास और शारीरिक गुणों में कुत्ते से अच्छे होते हुए भी भेड़िया कुत्ते की तरह बहादुर नहीं होताl

 

मॉब लिंचिंग या आतंकवाद की वबा सार्व देश में फूट पड़ी हैल इसके बारे में मुसलमानों की चिंता और फिक्रमंदी स्वभाविक बात हैl क्योंकि उन पर नाहक हमले किसी ना किसी बहाने से किये जा रहे हैंl आज कल ‘जय श्री राम’ के ना बोलने से मुसलमानों पर हमले एक के बाद एक किये जा रहे हैंल जहां जहां संघ परिवार की हुकूमतें हैं वहाँ हमला करने वालों की सराहना हो रही हैl अपराधियों को गले लगाया जा रहा है और फूलों का हार पहना कर स्वागत किया जा रहा है l

 

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शब्द टेररिज्म के यह अर्थ दर्ज हैं कि राजनीतिक उद्देश्यों के प्राप्ति या किसी चयनित या अचयनित सरकार को किसी काम पर मजबूर करने के लिए हिंसक कार्यों के प्रयोग को टेररिज्म कहा जाता हैl शब्द आतंकवाद को इस्लाम और मुसलामानों के साथ जोड़ने का खेल वैश्विक षड्यंत्र का हिस्सा हैl जिसका खाका बनाने और व्यावहारिक उपाय में लाने में इस्लाम दुश्मन तत्व यहूदियत ही हैl

 
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