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Reflections on Social Justice in Islam (Part 1)  इस्लाम में सामाजिक न्याय पर विचार (भाग-१)
Muhammad Yunus, New Age Islam

गरीब मुसीबत और बदहाली का शिकार हैं, कमजोर और क्षीण बच्चे कूड़े के ढेर में इसलिए हाथ पैर मार रहे हैं कि उन्हें कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिसे खाकर वह अपनी भूख मिटा सकें या जिसे बेचकर कुछ सामाने जिंदगी प्राप्त करें, छोटे बच्चे सड़कों के किनारे गैरेजों और भरी भरकम रचनात्मक कार्यों में मजदूरी कर रहे हैं,भूख से बदहाल बच्चे शिविरों और शरणार्थियों में रोटी के एक टुकड़े के लिए सरगर्दा हैं,कम मजदूरी पाने वाले घरेलू और औद्योगिक मजदूरों को कोई सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है और है भी तो नाममात्र तथा वह खिदमाती शर्तें और चिकित्सा सेवाओं से भी वंचित हैं।

 

Remembrance of Rabbul-Alamin, Rahmatul-lil-Alamin and Errors of Deobandi Ulema  रब्बुलआलमीन और रहमतुल्लिल आलमीन का तज़किरा और उलेमा ए देवबंद की खताएं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

सार वचन यह है कि अल्लाह पाक रब्बुलआलमीन है यानी सारे संसारों का रब है और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहमतुल्लिल आलमीन हैं यानी सारे संसारों के लिए दया हैं.इसके लिए यह कहना कि अल्लाह पाक सिर्फ मुसलमानों या बस मनुष्यों का रब है कभी जायज नहीं इसी तरह यह कहना कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम केवल लोगों के लिए रहमत या केवल मुकल्लेफीन या सिर्फ मुसलमानों के लिए रहमत हैं, कभी वैध नहीं, बल्कि वह सारे जहानों के लिए रहमत हैं, जिनात व इंसान, पक्षी, पशु व वनस्पतियों,मुसलमान हो या नास्तिक,मुकल्लफ़ हो या गैर मुकल्लफ़ आदि सभी के लिए रहमत हैं।

 

Imam Ja'far Sadiq- Imam of Both Shia and Sunni  इमाम जाफर अलसादिक शिया, सुन्नी दोनों समुदायों के इमाम
Zafarul Islam Khan

बहुत शुरुआती दौर में मुसलमानों के बीच अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिलाफत यानी उनके बाद दीनी और राजनीतिक अर्थ में उनका वारिस होने के बारे में मतभेद पैदा हुआ जिसकी वजह से मुसलमानों में आज तक मतभेद चला आ रहा है। एक पक्ष ने शूराई खिलाफत की ताईद की और वह अहले सुन्नत कहलाए। उनका मानना था कि खलीफा का चयन शुरा से होना चाहिए और मुसलमानों में जो सबसे अधिक ज्ञानी, न्यायप्रिय और बहादुर हो उसी को इमाम होना चाहिए।

The Dichotomy between Sharia Law of Islam (Islamic Law) and the Sharia of Islam  'इस्लाम के शरई कानून' और 'इस्लामी शरीअत' के बीच स्पष्ट विरोधाभास
Muhammad Yunus, New Age Islam

इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि इस्लामी शरई कानून' के कई निर्णय 'इस्लामी शरीअत (कुरआनी पैगाम)' के साथ परस्पर विरोधी हैं। जैसे इस्लामी शरीअत के साथ परस्पर विरोधी उन आदेशों में व्यभिचार के लिए संगसारी, स्वधर्म त्याग और तौहीन के लिए मौत की सजा, संगठित गुलामी, अस्थायी शादी, बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन के खिलाफ माता-पिता की गैर जवाबदेही, एक बैठक में तीन तलाक, बलात्कारका कानून, महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध, पूर्ण घूंघट और लिंग आधारित महिलाओं को अलग रखना, गैर मुसलमानों के खिलाफ शत्रुता और घृणा, मुस्लिम और गैर मुस्लिम के बीच दुनिया का वितरण, गैर मुसलमानों के खिलाफ लगातार जिहाद, कैदी गैर मुस्लिम महिलाओं का जबरन धर्म बदलना और नृत्य और संगीत जैसे सभी कला पर प्रतिबंध लगाना शामिल हैं।

 

Triple Talaq Must Be Invalidated Constitutionally and Criminalized  तीन तलाक को गैर कानूनी प्रक्रिया और अपराध करार दिया जाना चाहिए
Muhammad Yunus, New Age Islam

पैरा 4 में यह दलील दी गई है कि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए तब भी पुरुष तीन तलाक देना जारी रखेंगे और शादी को बनाए रखने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को अकदे निकाह की अदम तहलील का निर्णय प्राप्त करने के लिए वर्षों तक ऐसी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी जिसमें माल और समय दोनों खर्च होते हैं। यह तर्क भी खराब है। इसलिए कि अगर तीन तलाक को गलत या अवैध करार दे दिया जाता है तो (गवाहों की उपस्थिति में)में तीन तलाक देने वाले पुरुष पर मुकदमा चलाया जाएगा, यहां तक कि वह इस बात को स्वीकार करे कि उसने तलाक बेपरवाही (2: 225) या नशा की हालत में दिया है -कि जिसमें बोलने वाले का भरोसा नहीं किया जाता है (4:43)।

 

राज्य में ऐसे मदरसों की संख्या बहुत कम है,जिन्हें पूर्णता की श्रेणी में रखा जाए। सही मायने में ऐसे मदरसों को उंगलियों पर गिन सकते हैं। राज्य में केवल दर्जन भर मदरसों पर इतराने के बजाय प्रशासन को उन मदरसों की ओर ध्यान देना चाहिए जो शहर और ग्रामीण स्तर पर खोल दिए गए हैं लेकिन उनकी उपयोगिता रत्ती भर भी नहीं है। यहां तक कि जमीन पर भी उनकी उपस्थिति नहीं है। राज्य में ऐसे बेमानी मदरसों की संख्या पचास नहीं बल्कि हजारों में है।

 

The Attack of ISIS on the Dignity of the Rightly-Guided Caliphate  खिलाफते राशदा की नामूस पर आईएसआईएस का हमला
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

आईएसआईएस (दाइश)की स्वयंभू 'खिलाफत'इस्लाम विरोधी तत्वों,सिद्धांतों और विध्वंसक उद्देश्यों पर आधारित एक आधुनिक खारजी संगठन है। मीडिया की रिपोर्टों और आईएसआईएस के गैर इस्लामी कार्यों और चरित्र का विश्लेषण कर लेने के बाद यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है कि आईएसआईएस केवल इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने और विशेषकर खिलाफत ए राशदा के पवित्र अवधि की इज़्ज़त व नामुस को कलंकित करने के लिए ही उपस्थिति में आई है।

 

Triple Talaq in One Sitting And Refutation of An Accusation Against Hadhrat Umar  एक मजलिस की तीन तलाकें और हज़रत उमर पर अह्दे रिसालत के मामुलात बदलने के आरोप का जवाब
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

जम्हूर फ़ुक़्हा ए इस्लाम ने सर्वप्रथम तो इस हदीस के फन्नी सकम के कारण इसे स्वीकार नहीं किया lदुसरे बर सबीले तनज्जुल इसमें तावील की और कहा कि दौरे रिसालत और दौरे सहाबा में लोग ताकीद की नीयत से तीन बार तलाक देते थे। बाद में उमर रदिअल्लाहु अन्हु के दौर में लोगों ने तीन तलाक देने की नीयत से तीन बार तलाक कहना शुरू कर दिया इसलिए उमर रदिअल्लाहु अन्हु ने उनकी नियत के आधार पर इन तीन तलाकों को तीन ही करार दिया lइन जवाबों से स्पष्ट हो गया कि हज़रत उमर नें पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किसी बात को नहीं बदला बल्कि इसी बात को लागू किया है,जो अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस है।

 

Who All Are ‘Ahle Zikr’ In the Qur’an?  कुरआन में 'अहले ज़िक्र' से मुराद कौन लोग हैं?
Muhammad Yunus, New Age Islam

व्यक्तिगत रूप से और साथ ही उसके बाद वाली आयत 16:44के साथ उक्त आयत के पाठ का विश्लेषण इस बात को स्पष्ट करता है कि आयत 16:43में संबोधन पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से है और शब्द ज़िक्र से पिछले नबियों पर नाज़िल की गई आयतें होती हैं और अहले ज़िक्र से संकेत पैगम्बरे इस्लाम के युग के उन ईसाइयों और यहूदियों की तरफ है जिनके बारे में यह माना जाता है कि उन्हें वह दिव्य संदेश और आयत याद होंगे जो उनके नबियों के पास किए गए थे। अगर कुछ मुस्लिम उलेमा अहंकार के साथ खुद को आयत 16:43का मिसदाक़ बताते हैं ताकि वे एक बैठक में तीन तलाक जैसे अत्यधिक ज़न बेज़ार सामाजिक परंपरा को मजबूती पहुंचा सकें।

 

Different Country, Different Religion But the Same Mentality  देश अलग, धर्म अलग लेकिन स्वभाव एक
Shakeel Shamsi

भारत और पाकिस्तान में कई वर्षों से एक रिवाज चल पड़ा है कि धर्म के नाम पर एक भीड़ जमा होती है और जिसको दोषी समझती है, उसकी हत्या कर देती है, यूं तो इस भीड़ का धर्म अलग होता देश भी अलग होता है लेकिन भीड़ में शामिल लोगों का स्वभाव बिल्कुल एक जैसा होता है। उग्र भीड़ जिसकी हत्या करना चाहता है उस पर कभी गौ हत्या तो कभी लड़की छेड़ने का आरोप लगाता है। कभी यही भीड़ धर्म का अपमान करने के नाम पर किसी को मार देती है। भारत में पहलू खान को चरमपंथियों की एक भीड़ क़त्ल कर देती है तो पाकिस्तान के मरदान शहर में मशाल खान नाम के मुस्लिम युवक की हत्या करके उसके परिवार में चरमपंथ की मशाल से अंधेरा कर दिया है।

 

A Call To American / Global Muslim Leaders  अमेरिकी और वैश्विक मुस्लिम रहनुमा इस्लाम की रूह तलाश करें और अपने युवाओं को अच्छा वैश्विक नागरिक बनाएं
Muhammad Yunus, New Age Islam
पूरी तरह से आकस्मिक परिस्थितियों और मामलों के आधार पर मुसलमानों को पश्चिमी दुनिया की सहानुभूति प्राप्त हुई है और उन्हें बजाय ज़ालिम के पीड़ितों के रूप में पेश किया गया हे।  निश्चित रूप से यह मुसलमानों के लिए एक आकस्मिक वरदान है जिसनें तेज़ी से उभरते हुए सांस्कृतिक टकराव की अवधारणा को समाप्त कर दिया है। वैश्विक मुस्लिम उलेमाओं को भी इसी अंदाज में जवाब देना चाहिए और अमेरिका में प्रवेश के इस प्रतिबंध को अपने समुदायों में पश्चिम विरोधी भावना को कम करने का एक साधन समझना चाहिए।

 

Shared Values among Religions and the Call for Interfaith Dialogue  संयुक्त धार्मिक मूल्य और अंतर्धार्मिक संवाद
Ghulam Ghuas, New Age Islam

इस्लाम सभी धर्मों के बीच शांतिपूर्ण अस्तित्व को बढ़ावा देता है। सभी प्रमुख धर्मों की शिक्षाएं अमन व शान्ति पर ज़ोर देती है। लेकिन धर्मों की गलत व्याख्या मतभेद और विवाद को हवा देती है। हम अक्सर देखते हैं कि धर्म के नाम निहाद नेता उत्तेजना,उग्रवाद,आक्रामकता और नफरत की आग भड़काते हैं और यही नहीं,वह हिंसा और खूनी संघर्ष को वैधता प्रदान करते हैं।प्रायः जबरन राजनीति के सपने को लागू करने के लिए धर्म का दुरुपयोग किया जाता है। अतीत से लेकर आज तक लगातार हम इस बात का निरीक्षण कर सकते हैं कि प्रायः हिंसक गतिविधियां धर्म के नाम पर अंजाम दी जाती हैं।

 

Accusations and Mistrust are Poisonous For the Peace of the Community  सामाजिक शांति के लिए ज़हर क़ातिल
Dr Arif Mahmood Kisana

तोहमत,प्रत्यारोप, बोहतान (झूठे आरोप), और बदगुमानी हमारे सामाजिक शांति के लिए जहर क़ातिल हैं। यह रवैये हमारे सुखों को बर्बाद कर देते हैं और हर घर और हर एक व्यक्ति उनसे प्रभावित होता है। नकारात्मक विचारों और दूसरों के बारे में गलत सोच और अकारण जिज्ञासा हमें एक दूसरे से दूर ले जाता है। निराधार विचार, गलतफहमी, संदेह और दूसरों के बारे में स्वतः कोई राय कायम कर लेना या दूसरों की गलत जानकारी और आरोप लगाने को सत्यापित किए बगैर सच जान लेना बदगुमानी और घृणा का कारण बन जाता है जो एक दूसरे के साथ संबंधों में बिगाड़ आ जता हैl

 

Come out of the Closet, Times have Changed!  हुजरे से बाहर आइए हज़रत, जमाना बदल गया है
Dr Qamar Tabrez

सरकारें भी मुसलमानों के लिए कुछ करना चाहती हैं,लेकिन कोई उनके पास जाने को तैयार ही नहीं है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही कहा था कि मुसलमान अपने मुद्दों को लेकर उनके पास आएंगे,तो रात के बारह बजे भी उनका दरवाजा खुला रहेगा। कितने मुसलमान अपनी समस्याओं को लेकर आज तक उनके पास गए?इस देश में हिंदुओं की बहुमत मुसलमानों से हमदर्दी रखती है। कुछ मुट्ठी भर लोग हैं,जो मुसलमानों से घृणा करते हैं जिसकी वजह से कई बार खूनखराबा हो जाता है। लेकिन हिन्दुओं के बहुमत धर्मनिरपेक्ष मानसिकता वाली है।

 

But Who is the Quazi  लेकिन काजी कौन है?
Hafeez Nomani

हमें मुकदमा की कार्रवाई से हटकर कुछ बातें निवेदित करना हैं। इस्लाम में निकाह के लिए प्रामाणिक और पंजीकृत काजी और निकाहनामा शर्त नहीं है। हमारे पिता मौलाना मोहम्मद मंजूर नोमानी बेशक बहुत बड़े आलिम थे। लेकिन वह न काजी थे न मुफ्ती थे। हमारा निकाह उन्होंने इस तरह पढ़ाया कि संभल की एक मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के बाद उन्होंने ही घोषणा कर दी कि नमाज़ के बाद आप हज़रात तशरीफ रखें मेरे दो बेटों का निकाह है और मुझे आप से कुछ बातें भी करना हैं।

 

तारीख़े इस्लाम कहता है कि हमारे पूर्वज सभी प्रकार के बौद्धिक सरबुलंदी हासिल करने में पूरे जीवन व्यस्त रहे और हिदायते दीन पर सख्ती से अमल के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और शोध में वह उदाहरण पेश कीं जिसका कल्पना तक करना भी आज का शिक्षित समाज दांत तले उंगली काटने पर मजबुर हो जाता है कि ''ऐसे समय में जब संभावित संसाधन भी उपलब्ध नहीं थे,उनके मुस्लिम अकाबेरीन वैज्ञानिकों ने किस तरह हौसला आजमा लगन के परिणामस्वरूप बीजगणित से लेकर शिक्षा और दर्शन, ट्रांस्फ़ॉर्म विज्ञान और द्रुतशीतन विज्ञान के क्षेत्र में प्रवीणता ही नहीं बल्कि बुद्धि को आश्चर्यचकित कर देने वाले आविष्कार पेश किए होंगे ''।

 

Religious Authorities of Islam Must Delimitate Peaceful Islam  इस्लाम के नाम पर अंजाम दी जाने वाली आतंकवाद से शांतिपूर्ण इस्लाम को अलग करना उचित -जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल
Muhammad Yunus, New Age Islam

समस्या की जड़ यह है कि रूढ़िवादी मुसलमान नबी की जीवनी (सीरत) को एक प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़, हदीसों को वही का एक रूप और शरीअत के कानून को इलाही (दिव्य) शरीअत मानते हैं। जबकि यह सभी चीजें इतिहास से प्रभावित हैं और मानव प्रयासों का परिणाम हैं, जिनमें ऐसे सामग्री भरे हुए हैं जो इस दावे को गलत साबित करते हैं कि इस्लाम एक शांतिपूर्ण धर्म है, और इस्लामी उलेमा और अधिकारी जिनमें से कुछ को छोड़ कर आईएसआईएस के खिलाफ कोई भी फतवा जारी करने और उस पर ईमान की हद से अधिक करने का आरोप लगाने के लिए अनिच्छुक हैं।

 

Interpretation of Quran Submitted in Supreme Court and AIMPLB  पर्सनल लॉ बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट में पेश क़ुरआन की तफसीर
A Rahman, New Age Islam

'' इस्लाम से पहले यह दस्तूर था कि पति जितनी चाहे तलाकें देता चला जाए और इद्दत में रुजूअ करता जाए इससे महिलाओं के क्रोध में जान थी, इद्दत गुज़रने के पास आई, रुजुअ कर लिया, फिर तलाक दे दिया। इस तरह महिलाओं को तंग करते रहते थे तो इस्लाम ने हद बंदी कर दी कि इस तरह की तलाकें दो ही दे सकते हैं तीसरी तलाक के बाद लौटा लेने का कोई अधिकार नहीं रहेगा।

 

हमारे मित्र कहते हैं कि शबे बराअत का कहीं कोई सबूत नहीं, यह बाद की सृजन हैl इस आधार पर वह शबे बराअत न केवल यह कि नहीं मनाते हैं बल्कि मनाने वालों को ताना भी देते हैं और कुछ सज्जनों तो जबरदस्ती ऐसा करने से मना करते और रोकते हैं। चलिए थोड़ी देर के लिए हम भी इस मामले में अपने मित्रों के हम नवा बन जाते हैं लेकिन बड़े अदब से पूछना चाहते हैं कि अगर कुछ लोग इस रात में जागते हैं।

 
Sufism and Humanity सूफीवाद और मानवता
Maulana Faiyyaz Ahmad Misbahi,Tr.New Age Islam

इस्लामी सुफीवाद का इम्तियाज यह है कि इस दुनिया में रहकर दुनिया से बे नियाज़ी का हुक्म देता है अहलो अयाल से रिश्ता ए उखुवत व मुहब्बत क़ायम रखते हुवे उनके अधिकार को अदा करनें का आदेश देता है उसी तरह हासिल करने की विशेष रूप से ताकीद करता है और आय प्राप्त करना व रिज्के हलाल व हलाल खाने और सिद्के मक़ाल की हेदायत देता है इन सारी स्थितियों में हुक्म इलाही की तकमील और रजाए इलाही की मांग इसका मुख्य उद्देश्य होता,यही कारण है कि इस्लामी सुफीवाद के धारक खुदा के बन्दों के बीच रहते हुए भी उनसे बेनियाज़ और अख्लाक़े आलम की ओर आकर्षित और उसके के फजल व एहसान के तालिब होते हैं।

 

मुसलमान न कभी आतंकवादी था और न ही होगा क्योंकि जो सच्चा मुसलमान होगा वह कभी आतंकवादी हो ही नहीं सकता। उन्हें अपनी शांती प्रियता के लिए किसी मोदी से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है,लेकिन सच का जादू सिर चढ़कर बोलता है और वह मोदी के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उनके राज्य में कई बेगुनाहों का फर्जी एनकाउंटर किया गया था मगर आज वह स्वीकार करने लगे हैं कि भारतीय मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं और वे शांति और सुरक्षा में विश्वास करते हैं। वह आतंकवाद और अशांति में भरोसा नहीं रखते। वे सदियों से शांति और भाईचारे के साथ रह रहे हैं।

 

Shariat Vs Constitution: Supreme Court Ready for the Hearing  शरीअत बनाम संविधान सुप्रीम कोर्ट में पांति पूरी
A Rahman, New Age Islam

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जो जवाबी हलफनामे और 30मार्च तय तिथि पर लिखित अनुरोध और तर्क अदालत में दाखिल किए गए उनका विश्लेषण करने से पहले आवश्यक है कि भारतीय महिला आंदोलन के स्टैंड और दावे पर नज़र डाली जाए, जो दरअसल सुप्रीम कोर्ट की जनहित वाली याचिका का उत्तेजक माना जाना चाहिए। (याद रहे कि चर्चा के तहत समस्याओं में निकाह हलाला और तक्सीरे अज़वाज (एक से अधिक पत्नी का होना)शामिल हैं हालांकि कानूनी लड़ाई और मीडिया में चर्चा जिस जोर शोर से तीन तलाक पर है इतना जोर शेष दो मुद्दों पर नहीं दिया जा रहा है और इसके कारण काफी दिलचस्प हैं, लेकिन वह चर्चा बाद में होगी।

 

Can A Mosque Too Be Anybody’s Personal Property?  क्या मस्जिद भी किसी की निजी संपत्ति हो सकती है?
Shakeel Shamsi

बिहार के सीतामढ़ी से एक दुखद खबर आई कि वहां मस्जिद में नमाज़ पढ़ने को लेकर दो मसलकों में विवाद पैदा हो गया। मस्जिदों के मामले में विवाद होना कोई नई बात नहीं है, पहले भी कई बार शिया और सुन्नी समुदायों के बीच मस्जिदों के स्वामित्व को लेकर झगड़े हुए हैं। बरैलवी और देवबंदी सज्जनों के बीच भी मस्जिदों के मामले में झगड़े के समाचार आना कोई नई बात नहीं है। बल्कि कई जगहों पर तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि मस्जिदों में बोर्ड लगा दिए गए हैं कि यहां केवल एक विशेष समुदाय के लोग ही प्रार्थना कर सकते हैं,लेकिन सीतामढ़ी से जो खबर आई वह इस लिये हैरान करने वाली है कि अहले हदीस और देवबंदी सज्जन एक मस्जिद के स्वामित्व को लेकर आमने-सामने हैं।

 

AIMPLB Advocates Of Instant Triple Talaq Are Gender Terrorists  एक बैठक की तीन तलाक का समर्थन करने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड लिंग आतंकवादी और इस्लाम का गद्दार है
Muhammad Yunus, New Age Islam

एक ऐसी महिला के दर्द और सदमे को वर्णन करना लेखक के बूते से बाहर है। ऐसी महिलाओं के लिये राक़िमुल हुरूफ़ के नज़दीक उस महिला का उदाहरण है जिसका घर उसकी आंखों के सामने उजड़ गया हो और जिसने एक ही त्वरित नोट्स में घर के अंदर अपना पति अपने बच्चों,अपने सपने और सारे सामान भी खो दिए हों इसलिए कि फौरी तौर पर तलाकशुदा महिला न केवल कि अपना पति खोती है बल्कि अपने बच्चे,सामान और अपने सपनों को भी खो देती है।

 

The Victim: Muslims Or Islam?  पीड़ित कौन, मुसलमान या इस्लाम?
Misbahul Huda, New Age Islam

मैं इस आयत के संदर्भ में केवल एक बात निवेदन करना चाहूंगा कि समकालीन संदर्भ में यह आयत जिस तरह मुसलमानों की नैतिक और बौद्धिक पिछड़ेपन,बौद्धिक बदहाली और सैद्धांतिक रेखा के कारण निर्धारित करती है उसी तरह मुसलमानों को इस बात की दावते फ़िक्र भी देती है कि मुसलमान अभी भी अपनी खोई हुई इज्ज़त को प्राप्त कर सकता है, और अभी भी पूरा मुस्लिम राष्ट्र एक सभ्य, मुतमद्दन, सम्मानजनक और साहबे ईज्ज़त व सरवत कौम के रूप में अपनी प्रतिष्ठा फिर से बहाल कर सकती है बशर्ते वह इस्लाम की उन शांति प्रियता, विविधता, प्यार और हमदर्दी, भाईचारे और बंधुत्व और शांति का संदेश देने वाली उनकी शिक्षाओं को फिर अपना कर वास्तविक इस्लाम को गले लगा ले जिस पर ईमान की जड़ और पूरा आधार है। और सामूहिक रूप से पूरे मुसलमान इन चरमपंथियों और आतंकवादियों के खिलाफ और खुद उनके संरक्षक और प्रधान सऊदी अरब के खिलाफ भी एक सैद्धांतिक और वैचारिक युद्ध की घोषणा कर दे और हर मोर्चे पर उनसे प्रतिस्पर्धा के लिए अपनी पूरी ऊर्जा खर्च कर दे।

 
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    ( By Aayina )
  • your god just does not measure up to your own expectations. find someone else.'
    ( By hats off! )
  • You have said "you say kaffir does not mean non-muslims. all others (who also claim a perfect ....
    ( By Naseer Ahmed )
  • A fool will find contradictions everywhere. That does not prove that there is a contradiction.
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  • my issue is to point out the contradictions in your articles, assertions (without proof) and bland statements. as for the contradictions in the Qur'an go to ...
    ( By hats off! )
  • Hats Off, Don't try to put your silly words and silly arguments in my mouth. Quote my exact words ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • Yunus Sb, I am aware of your views on the ahadith. The fact remains is that our voices (including Rashid Sb's) are mostly (not completely) lone ...
    ( By Naseer Ahmed )
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    ( By Amy )
  • butte.edu/departments/cas/tipsheets/thinking/reasoning.html if this link cannot help you clear your misunderstanding ....
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  • a "truth claim" and its "proof" are different from each other. first try to wrap your head around that. if you have forgotten it is you ...
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  • Dear Naseer Sahab, Your last comment to hats off ends with this remark: "He is quite right in saying that my voice is mostly a lone ...
    ( By muhammd yunus )
  • GM Sahab We are getting lost in semantics. Commonsense remains a very subjective term. The verse I quoted ....
    ( By muhammd yunus )
  • Thank you Yunus Sb for your comment. Common sense is based on our values and will vary from people to people based on their values. ...
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  • Naseersaab, Common sense does not mean "What the people in large numbers commonly believe". That is consensus, not common sense....
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Dear Naseer Sahab! Great! You have made a clear distinction between 'common sense' and 'use of reason.'....
    ( By muhammd yunus )
  • Thank you Yunus Sb and Rashid Sb for your comments supporting the article.'
    ( By Naseer Ahmed )
  • There is a difference between using our reason and using our common sense. Reason can never go wrong (unless misled by emotion) but common ....
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  • Hats Off says:"the entire mass of sunni muslims assert that the sunnah of the prophet is an essential and inseparable part of the practice of ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • “one little lonely article claims the opposite”. No hats off, there are many other people and the Book too says the same. Muhammad’s ....
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  • You can go around in circles Hats Off but it is truly pitiable that you lack even the most elementary understanding Whether it is a mathematical ...
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  • Dear Naseer Ahmed Sahab, People who have never read the Qur'an back to back in their lifetime will never know that ....
    ( By muhammd yunus )
  • What is common sense? What the people in large numbers commonly believe? Common sense can sometimes be misleading. No, the Quran does not ask you ...
    ( By Naseer Ahmed )
  • what a tragedy! the entire mass of sunni muslims assert that the sunnah of the prophet is an essential and inseparable part of the practice ....
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  • a theorem NEVER makes a statement. a theorem PROVES a statement. a STATEMENT is different from the theorem that PROVES the statement....
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  • It is better to have Idol than live Idols everywhere look like Jombies, at least gods Idol can be variable according to different human phycology ...
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  • Dear Ghulam Mohiuddin Sahab, The Qur'an answers your question upfront: "Indeed the worst kind of all living ...
    ( By muhammd yunus )
  • please give us a break so the author says Muslims were angels in India and their behavior was exemplary. May be Pakistanis ...
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  • Good article! Thoughtful and realistic.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Does the Quran ask us to follow our own common sense?
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
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  • if you think a theorem is a text that proves itself, you must be the next godel. a theorem ...
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