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दरअसल जब हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जमाने में अत्यधिक तलाक़ और तलाक़ देने में जल्दबाज़ी के कारण स्थिति गंभीर हो गई तो अत्यधिक हलाला की घटनाएं पेश आने लगींl किसी ने किसी को जल्दबाज़ी में तलाक़ ए मुगल्लाज़ा देदी फिर पछतावा हुआ तो अपने किसी दोस्त या सगे भाई से अपनी तलाक़ शुदा बीवी का निकाह इस नीयत या इस शर्त के साथ करा दिया कि एक दो रातें गुज़ारने के बाद वह उसको तलाक़ दे कर उसके लिए हलाल कर देl यह कुरआन की रूह के बिलकुल विपरीत थाl इस पर हुजुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सख्त अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए फरमाया कि ऐसा करने वाले और करवाने वाले दोनों पर खुदा की लानत हैl

 

Azhar Masood Threatening on Babri Masjid  बाबरी मस्जिद पर अजहर मसूद की धमकी
Shakeel Shamsi

आतंकवाद और अतिवाद ने जब से धर्म और नस्ल का लिबादा ओढ़ा है तब से कई धर्मों और नस्लों के जोशीले और जज़्बाती लोग इसके साए में फंस चुके हैंl हमारे देश में खालिस्तान के हामी सिखों, अलग तमिल राज्य की स्थापना चाहने वाले श्रीलंकाई तमिलों, गुमराह मुसलामानों और हिन्दुओं के दहशतगर्द समूहों ने कई बार इस सरजमीन को खून से लाल किया हैl

 

Music Should Soar Across the World and Captivate All Humanity:  संगीत की स्वर लहरियों को चुप करने की राजनीति
Ram Puniyani

किताबों पर प्रतिबन्ध की मांग और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम और वहां के गायकों का विरोध भारत में आम हैं. सैटेनिक वर्सेज को प्रतिबंधित किया गया, मुंबई में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच न होने देने के लिए वानखेड़े स्टेडियम की पिच खोद दी गयी और मुंबई में गुलाम अली के ग़ज़ल गायन कार्यक्रम को बाधित किया गया. हाल में, इस तरह की असहिष्णुता में तेजी से वृद्धि हुई है. और अब तो हमारे देश के कलाकारों का भी विरोध होने लगा है.

Did Islam Change Its Policies From Inclusivism Of Early Madina To Exclusivism?  न्यू एज इस्लाम के पाठकों का प्रश्न: क्या इस्लाम प्रारम्भिक मदनी दौर जैसा सम्पूर्णता वादी ना रह कर अब आखरी मदनी दौर जैसा अलगाववादी और धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ असहिष्णु हो चुका है?
Sultan Shahin, Founder-Editor, New Age Islam

जिन्होंने यह और इन जैसे प्रश्न रखने के लिए मुझे कॉल किये, मैं उन लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि न्यू एज इस्लाम अपने दृष्टिकोण पर कायम है, हालांकि हम अपने स्तम्भकारों को अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करते हैंl जो पैराग्राफ कुछ पाठकों को नागवार गुज़रा मैं इसके बारे में यह कहना चाहता हूँ कि इसमें जनाब गुलाम रसूल देहलवी ने जिन विचारों को व्यक्त किया है मुझे नहीं लगता कि वह इन विचारों के हामिल हैंl उन्होंने इस पैराग्राफ की शुरुआत “कुछ लोग यह कह सकते हैं” वाक्य से की हैl संभव है कि कहा जाए कि इस “कुछ लोग” में वह भी शामिल हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा कहना दुरुस्त होगाl इस पुरे लेख का गुफ्तगू का अंदाज़ और संदर्भ एक और ही दृष्टिकोण पेश करता हैl जहां तक मैं समझता हूँ गुलाम रसूल देहलवी अपने इस पैराग्राफ में केवल इस बात पर चिंता का इज़हार कर रहे हैं कि क्या पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इस्लामी रियासत मदीना के अपने पिछले सिद्धांत पर प्रतिबद्ध रहेंगे या बाद की उन नीतियों पर अमल करेंगे जिन्होंने इस्लाम के फुकहा और पाकिस्तान के आतंकवादी सिद्धांत निर्माताओं की नज़रों में पिछली नीतियों को मंसूख कर दिया हैl वह अपने इस पैराग्राफ में केवल यह वर्णन मांगते हुए दिखाई दे रहे हैं कि इमरान खान किस मदीना मॉडल की पैरवी करेंगे; मिसाक ए मदीना पर आधारित प्रारम्भिक मदीना मॉडल की जिसमें बहुसांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा प्राप्त था या उस जमाने की नीतियों कि जिसमें “मदीना की इस्लामी रियासत की एक आक्रामक तस्वीर हमें देखने को मिलती है जिसमें गज्वात, तौहीन ए रिसालत का कानून, यहूदियों और ईसाईयों का रियासत से निकाला जाना और “لا اکراہ فی الدین” जैसे कुरआन के शांतिपूर्ण आयतों का मंसूख किया जाना भी पाया जाता हैl”

 

Promoting Sectarian and Religious Hatred In the guise of Julus-e-Muhammadi  जुलूस ए मोहम्मदी की आड़ में साम्प्रदायिक और धार्मिक घृणा को बढ़ावा देने की कोशिश
S. Arshad, New Age Islam

ईद मीलादुन्नबी सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौके पर हम नात पाक के जो कैसेट बजाते हैं उनमें नातों के बीच भड़काऊ नारे भी होते हैं जो साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह  का मज़हर होते हैंl हम जिस समाज में रहते हैंl उसमें गैर मुस्लिम बहुमत में हैं और वह हमारी हर बात पर नज़र रखते हैंl इस प्रकार के नारे साम्प्रदायिक मतभेद को हवा देते हैं और गैर मुस्लिमों में भी नकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण बनते हैंl यह कैसेट किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा हैंl इसलिए मुसलामानों की धार्मिक और कौमी संगठन इस प्रकार के कैसेट का नोटिस लें और मुसलमानों को ऐसे कैसेट बजाने से रोकें जो सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले हैंl नातिया कैसेट में भड़काऊ नारे दाख़िल करने के पीछे कौन लोग हैं यह पता लगाना आवश्यक हैl

 

मीलादुन्नबी की आमद आमद है रबीउल अव्वल का महीना अपने नाम के अनुरूप हर पल हर ओर खुशियाँ और बहार बरसाए हुए है और क्यों ना हो जबकि जाने बहार तशरीफ ला रहे हैं क्योंकि बहार का वजूद भी सरकार के जहूर का मोहताज था जैसा की अल्लाह पाक ने स्वयं हुजुर को संबोधित कर के फरमाया ऐ महबूब “لو لاک لما خلقت الافلاک و الارضین”इसलिए जब जमीन और आसमान ही नहीं होते तो खिजां और बहार, सूरज और चाँद, बिजली और फल और दुसरे मौजुदात कहाँ होतेl

 

Why Indian Muslims do not need to follow Extremists’ Call for Hijrat  भारतीय मुसलमानों को अतिवादियों की हिजरत की दावत पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं
Ghulam Ghaus Siddiqi, New Age Islam

बिलकुल यही मफहूम उस एतेहासिक तथ्य से भी निकाला जा सकता है कि मक्का विजय के बाद जब मुसलामानों को धार्मिक स्वतन्त्रता प्राप्त हो गई और उनके लिए जान व माल की सुरक्षा निश्चित हो गई तो हिजरत का आदेश मंसूख कर दिया गया, जैसा कि उपर्युक्त हदीस से स्पष्ट है जिसका मफहूम यह है कि मक्का विजय के बाद हिजरत का कोई हुक्म बाकी नहीं रहाl इसलिए, अब किसी भी अतिवादी धार्मिक लीडर या किसी इस्कॉलर को यह अनुमति नहीं कि वह मुसलामानों को भारत से किसी और देश की तरफ हिजरत की दावत दें, और इसकी वजह स्पष्ट है कि भारत मुसलामानों को धर्म की स्वतन्त्रता और जान व माल की सुरक्षा प्रदान करता हैl

Loyalists of Husain (RA): Dutt Husaini Brahmins  हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के वफादार: दत्त हुसैनी ब्राह्मण
S. Arshad, New Age Islam

दत्त हुसैनी ब्राह्मण, हिन्दू ब्राह्मणों का एक ऐसा वर्ग है जिसने हज़रत हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के साथ अपनी मुहब्बत और अकीदत का प्रमाण कर्बला के मैदान में दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद यज़ीद के विरुद्ध अभियानों में भाग लिया और यज़ीदियों को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया मगर उनकी बलिदानों को इस काबिल नहीं समझा गया कि उन्हें इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएl एक दत्त हुसैनी ब्राह्मण रेहाब दत्त ने अपने सात बेटों को कर्बला में कुर्बान कर दिया और हुसैन रज़ीअल्लाहु अन्हु के शहादत के बाद मुख्तार सकफ़ी के साथ यज़ीदियों के खात्मे में भाग लियाl

 

कुरआन की यह आयत मुसलामानों को दुसरे खुदाओं के बारे में बुरा भला कहने से रोकती है, कि कहीं ऐसा ना हो कि इसके बदले में उनके मानने वाले तुम्हारे खुदा को गालियाँ देंl यहाँ रुक कर हमें इस बात पर गौर करना चाहिए विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच जो फसाद और क़त्ल व गारत गरी के घटनाएं घटित हुईं हैं उनमें से अक्सर की वजह यह रही है कि उन्होंने एक दुसरे के खुदाओं को और उनकी सम्मानित हस्तियों को बुरा भला कहाl निश्चित रूप से अनगिनत फसाद और मुठभेड़ की वजह यही रही हैl

 

आला हज़रत अपनी किताब मकालुल उर्फा में लिखते हैं: “इमाम शाफई रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं: وما اتخذ اللہ ولیا جاھلا अर्थात अल्लाह ने कभी किसी जाहिल को अपना वली नहीं बनाया अर्थात बनाना चाहा तो पहले उसे इल्म दे दिया इसके बाद वली किया कि जो इल्म ए ज़ाहिर (दिखने वाला इल्म) नहीं रखता इल्म ए बातिन (नहीं दिखने वाला इल्म) जो कि उसका परिणाम है क्यों कर पा सकता है, हक़ तआला से संबंधित बन्दों के लिए पांच इल्म हैं: इल्म ए ज़ात, इल्म ए सिफात, इल्म ए अफआल, इल्म ए अस्माअ, इल्म ए अहकामl इनमें हर पहला दुसरे से अधिक कठिन है जो सबसे आसान इल्म ए अहकाम में आजिज़ होगा सबसे कठिन इल्म ए ज़ात क्यों कर पा सकेगा____”

 

Defeating Islamism and Jihadism  जेनेवा में सुलतान शाहीन का खिताब: इस्लामिज्म और जिहादिज्म की हार के लिए अमन व शांति, सहअस्तित्व और लैंगिक न्याय पर आधारित इस्लामिक थियोलौजी का गठन आवश्यक
Sultan Shahin, Founding Editor, New Age Islam

इस बढ़ती हुई इस्लामिज्म की अतिवाद के हवाले से सर्द मेहरी इस हद तक बढ़ चुकी है कि कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त मुस्लिम अब यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि, “क्या हुआ अगर एक साल के अन्दर 86 देशों से तीस हज़ार मुसलामानों ने इस्लामी रियासत में शमूलियत इख्तियार की? 1.7 बिलियन लोगों की बिरादरी में उनकी प्रतिशत कितनी है?! इतनी छोटी और सीमित संख्या को बढ़ती हुई अतिवाद के सबूत के तौर पर कैसे पेश किया जा सकता है?” अकल हैरान है कि ऐसे विचारकों और बुद्धिजीवियों को कैसे जवाब दिया जाएl वास्तविकता यह है कि अगर एक मुसलमान को यह ;लगता है कि एक इंसानी बम की शक्ल में मस्जिद के अन्दर जाने और खुद को और दुसरे मुसलामानों को नमाज़ के दौरान धमाके से उड़ा देने पर खुदाई इनाम हासिल होगा, तो उम्मत के लिए यह अवश्य चिंता का क्षण है कि हमारे मज़हब में ऐसा क्या है जिसकी आड़ में आतंकवादी संगठन इस तरह के घिनावने अपराध का प्रतिबद्ध करने के लिए तैयार हो जाते हैं, क्या ऐसा करके वह जन्नत में दाखिल हो जाएंगेl उम्मत के लिए यह निश्चित रूप से गौर का मुकाम हैl उम्मत को सोचना चाहिए कि हिंसा में नुमाया इज़ाफा होता जा रहा है, यहाँ तक कि आतंकवादी अपराधों के सैंकड़ों घटनाओं के बावजूद भी हम बे हिसी की ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं, प्रतिदिन दुनिया के किसी ना किसी हिस्से से आतंकवाद की घटनाओं की सुचना मिलती है लेकिन हमें इसकी फ़िक्र कहाँ, हमें तो बेहिस ही बने रहना है!!

 

आयत (60:8) के बारे में अक्सर मुफ़स्सेरीन की एक राय यह है कि यह आयत मोहकम है और यह मंसूख नहीं हुईl इन आयतों में मुसलामानों को मुशरिकों और काफिरों सहित सभी गैर मुस्लिमों के साथ बराबर सुलूक करने से मना किया गया है इसका अर्थ यह है कि अल्लाह मुसलामानों को उन मुशरिकों और काफिरों सहित गैर मुस्लिमों के साथ अच्छा बर्ताव करने से मना नहीं करता जो मज़हब के मामले में मुसलामानों से जंग नहीं करते और मुसलामानों के साथ अमन और न्याय के साथ ज़िन्दगी गुजारते हैंl

 

Organ Donation Is What Is Called Sadqa Jariyah, Continuous Charity, in Islam  आर्गन डोनेशन (अंग दान) इस्लाम में सदका ए जारिया
Maulana Wahiduddin Khan

अंगों का दान आधुनिक सर्जरी का एक बड़ा उपहार हैl पिछले ज़माने में इस प्रकार का दान बिलकुल असंभव थाl अंगों का दान सभी धर्मों सहित इस्लाम में भी जायज हैl अधिक यह कि इस काम में बड़ा अज्र (इनाम) भी हैl एक मानव निर्मित ट्रांस्पलांट प्राकृतिक आर्गन ट्रांसप्लांट का विकल्प कभी नहीं हो सकताl

 

तिबयानुल कुरआन में है: कुरआन ए पाक की सीधे रास्ते पर दलालत है और मुत्तकीन को कुरआन ए पाक के अहकाम पर अमल की तौफीक भी नसीब होती है वह कुरआन ए पाक के अनवार से रौशनी तलब करने वाले और लाभ उठाने वाले होते हैं और कुरआन ए पाक में तदब्बुर और तफ़क्कुर करने से उनके दिमाग की गिरहें खुलती चली जाती हैं और गैर मुत्तकीन के लिए भी कुरआन ए पाक हिदायत है, नेकी और दुनिया की खैर की ओर राहनुमाई है, हालांकि वह इसकी हिदायत को कुबूल नहीं करते और इसके अहकाम पर अमल करके अपनी दुनिया और आखिरत को रौशन नहीं करतेl”

 

अगर कोई व्यक्ति केवल अल्लाह की रज़ा के लिए अल्लाह की इबादत करे इस तरह कि उसके ख़याल में केवल और केवल अल्लाह की रज़ा बस जाए और सुलूक के मर्तबे की उस मंजिल पर पहुँच जाए जहां उसे अल्लाह की रज़ा के सिवा कोई दुसरा ख़याल ना आता हो यह जरुर बेहतर है और यही इबादत का असल उद्देश्य हैl

 

इस्लाम का संदेश बहुत स्पष्ट हैl इसके बावजूद भी हम यह देखते हैं कि कुछ लड़ाका गिरोह जमीन के उपर आतंकवाद और फसाद मचा रहे हैंl ऐसे लड़ाकों के लीडर हो सकता है कि इस तरह के इस्लामी संदेशों से अवगत हों या अनभिज्ञ हों, लेकिन हमें यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि आज के युवा इस तरह के लीडरों के प्रोपेगेंडे का शिकार हो रहे हैंl इसी लिए हमें इस्लाम के असल पैगामों का प्रचार करते रहना चाहिए, इस आशा पर कि newageislam.com पर अतिवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष के साकारात्मक परिणाम बरामद हो रहे हैंl

 

Why Imran Khan’s Invocation of Medina is Deeply Regressive  इमरान खान का मदीना को रोल मॉडल करार देना बहुत ही रुजअत पसंदाना रवय्या है: कुछ तथ्य
Arshad Alam, New Age Islam

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए आवश्यक है कि अल्लाह की वहदानियत पर, अल्लाह की किताबों पर, कुरआन के आखरी आसमानी किताब होने पर, पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आखरी नबी होने पर, और इस बात पर कि आप के बाद अब कोई नबी नहीं होगा, कयामत के दिन पर और कुरआन और सुन्नत की सभी आवश्यकताओं और शिक्षाओं पर ईमान रखेl अब अगर प्रधानमंत्री के लिए यह शपथ है तो यह बात समझी जा सकती है कि क्यों अब भी मदीना मॉडल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैl

 

Ban on Amr bil Maroof and Nahi Anil Munkar?  अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर पर प्रतिबंध?
Shakeel Shamsi

अंग्रेज़ों के विरुद्ध फतवे जारी करने वाले उलेमा ने ना तो काले पानी की फ़िक्र की और ना तोप से उड़ाए जाने के डर से अपनी जुबान रोकी, लेकिन इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हज़ारों उलेमा ऐसे भी हुए जिन्होंने हुकूमत के लुकमे खाने को ही अपना दीनी फरीज़ा समझा, मगर खुदा का करम यह है कि इस्लाम दोनों प्रकार के उलेमा की पहचान उलेमा ए हक़ और उलेमा ए सू के रूप में बहुत पहले ही कर चुका थाl इसलिए जब कोई आलिमे दीन किसी बादशाह के हाँ में हाँ मिलाता नज़र आया तो आम मुसलामानों ने फ़ौरन उसको पहचान लिया कि उसका संबंध उलेमा के किस वर्ग से हैl

 

Terrorism is not the Result of Unemployment Rahul G!  आतंकवाद बेरोजगारी का परिणाम नहीं है राहुल जी!
Shakeel Shamsi

जर्मनी के दौरे पर गए राहुल गांधी ने वहाँ एक जलसे में जहां मोदी सरकार की असफलताएँ गिनाईं वहीँ उन्होंने एक अजीब व गरीब बयान भी दियाl उन्होंने कहा कि देश में बेरोज़गारी है और जब लोगों को रोज़गार नहीं मिलेगा तो उनको बहकाने वाली शक्तियाँ भी सक्रिय हो सकती हैं, उन्होंने उदाहरण के रुप में आइएसआइएस का नाम लिया और कहा कि अमेरिका ने जब ईराक पर हमला किया तो तिकरीत के लोगों को बहुत अनदेखा किया जिसका वहाँ के युवाओं पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ा और वह आइएसआइएस की ओर आकर्षित हो गएl राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब आप अपने युवाओं का ख़याल नहीं रखेंगे तो दुसरे उनको बहका सकते हैंl

 

Don’t Give Up, Just Try Something New and Look Ahead With Hope  हार न मानें, कुछ नया आज़माएं और उम्मीद के साथ आगे की ओर देखें
Maulana Wahiduddin Khan

मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ और मेरी यह जानने की कोशिश होती है कि वह कैसे ऐसी लत का शिकार हो गए हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, मैं ने एक व्यक्ति से इसकी वजह पूछी, वह मुस्कुराया और मुझ से कहा “यह मेरे लिए एक भुलावा हैबिट है”l उसने मुझसे कहा वह अच्छी तरह यह जानता है कि यह एक जानलेवा लत है लेकिन इसके बावजूद मैंने इसे अपनाया ताकि मेरा दर्द कम हो सकेl

 

The Bogey of Islamophobia  इस्लामोफोबिया का दानव
Arshad Alam, New Age Islam

ब्रिटेन में रुढ़िवादियों का चेहरा माने जाने वाले ब्रूनी वारसी ने इस मौके पर टोरेस को अपने अन्दर सहज तौर पर मौजूद इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी तास्सुब पर नज़र करने को कहाl अब तक अपनी पार्टी की ओर से दबाव के बावजूद बोरिस जॉन्सन ने माफी मांगने से इनकार कर दिया हैl उसके इस स्पष्ट इनकार के पीछे कई कारण हो सकते हैं और हो सकता है कि इन्हीं कारणों में से एक ऐसा करके अतिवादी वर्ग का वोट प्राप्त करने का रुढ़िवादी पार्टी का गुमान भी होl

 

कुरआन अपने अनुयायियों को सीमा (हद) से आगे बढ़े बिना कमज़ोर और पिछड़े लोगों की सुरक्षा के लिए केवल रक्षात्मक जंग की अनुमति देता है और इससे इस्लाम हिंसा का मजहब नहीं बनताl इसलिए जो लोग धार्मिक अत्याचार के खिलाफ बचाव में जंग की अनुमति से संबंधित कुरआनी आयतों को गलत अंदाज़ में पेश कर रहे हैं और अमन के साथ रहने वाले बेगुनाह व्यक्तियों को क़त्ल करने के लिए उनका प्रयोग कर रहे हैं वह असल में इस्लाम के मूल उद्देश्य की खिलाफवर्जी कर रहे हैं जो कि अमन का कयाम हैl

 

On the Meaning of Khatm e Nabuwwat  खत्मे नबूवत का अर्थ
Naseer Ahmed, New Age Islam

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत को उलेमा और इमामों की इताअत से भी आज़ाद रखा गया है, हर मुसलमान स्वयं कुरआन का अध्ययन कर सकता है और अपनी समझ के अनुसार उस पर अमल भी कर सकता हैl कुरआन एक ऐसी किताब है जो हक़ के रास्ते के चाहने वालों के लिए हर चीज को ऐसा स्पष्ट करके पेश करती है जिसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रहती है, इसमें किसी भी बहाने के तहत किसी भी बातिल की पैरवी की कोई गुंजाइश नहीं हैl अल्लाह ने हम में से हर एक को कुरआन के बारे में अपने इल्म और कुरआन की बेहतर समझ के अनुसार इसकी पैरवी करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की हैl

 

How Imran Khan Will Set Up Medina-Like Islamic Welfare State?  इमरान खान मदीना की तरह इस्लामी कल्याणकारी राज्य कैसे स्थापित करेंगे?
Ghulam Rasool Dehlvi, New Age Islam

ध्यान देने योग्य बात यह है कि आम चुनाव से पहले पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने अपने मेनू फेस्टो में भी स्पष्ट रूप से अपना मिशन पाकिस्तान को एक ऐसा इस्लामी कल्याणकारी राज्य बनाना प्रदर्शित किया था जो मानवीय और न्यायप्रिय सिद्धांतों पर आधारित होगी जिस पर मीसाक़े मदीना का आधार थाl जो कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के राज्य में मानवाधिकार का एक लिखित घोषणापत्र थाl

 

The Myth of Jahiliyyah  जाहिलियत के दिनों का अफ़साना
Arshad Alam, New Age Islam

इस्लाम से पहले का वह दौर जैसा कि उसे जाहिलियत के दिन कहा जाता है वैसा ही है जैसा दुनिया के दुसरे क्षेत्रों में अंधियारे का राज रह चुका हैl और जिस प्रकार रौशन ख़याली ने यूरोप को अँधेरे युग से निकाल कर आधुनिकता की दहलीज पर ला कर खड़ा कर दिया इसी तरह इस्लाम ने भी उस अरब क्षेत्र और उसके नागरिकों को अत्याचार, अज्ञानता, बर्बरता और वहशत के अंधियारे से निकाल कर मानवता, इल्म व फिक्र, सभ्यता व संस्कृति, और रौशन ख़याली की एक नई सुबह से परिचित कियाl इस्लाम की आधुनिक इतिहास में सैयद क़ुतुब और मौदूदी के अनुसार अब भी इस दुनिया के अधिक क्षेत्र जाहिलियत के अँधेरे में डूबे हुए हैं और अपनी इस स्वयंभू अज्ञानता के अँधेरे से आज़ाद होने के लिए अब भी इस्लाम का मुंह तक रहे हैंl

 
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  • Excellent article!
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    ( By Ghulam Ghaus Siddiqi غلام غوث الصديقي )
  • GM Sb,If you find the Quran not the speech of Allah, and its claims false, why do you then cling onto Islam?By definition you ...
    ( By Naseer Ahmed )
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    ( By john Adward )
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    ( By karen minton )
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    ( By karen minton )
  • He is not referring to kafirs. Magians were not kafirs and  most of those who produced spurious Hadiths were Muslims, not Magians.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Naseer sb.,Read Abdullah Saeed's "Reading the Qur'an in the Twenty-First Century: A Contextualist Approach," and, "Interpreting the Qur'an: Towards a Contemporary Approach," and Ebrahim ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • Naseer sb.,By not replying directly to my post of December 13 you have again shown your devious methodology.The four points that you raise have ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • A worthy tribute from Ramachandra Guha to Prof. Mushir ul Hasan.
    ( By Ghulam Mohiyuddin )
  • "Iranian Activist, Narges Mohammadi, Sentenced To 16 Years in Prison"There is no difference between Iranian Ayatollahs and Saudi Wahhabis when it comes to dishing out ...
    ( By Ghulam Mohiyuddin )