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Hindi Section (13 Mar 2014 NewAgeIslam.Com)



Controversy Over Facilitating the Second Marriage Proposal in Pakistan पाक में दूसरी शादी को आसान बनाने वाले सुझाव पर विवाद

 

जागरण समाचार

11 मार्च, 2014

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक धार्मिक संस्था की ओर से दूसरी शादी को आसान बनाने के संबंध में सरकार को दिए गए कानूनी सुझाव को लेकर उसे कड़ी आलोचनाओें का सामना करना पड़ रहा है। द काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडोलॉजी [सीआइआइ] द्वारा सोमवार को दिए गए इस कानूनी सुझाव में कहा गया है कि पुरुषों को दूसरी शादी करने के लिए पहली पत्नी की स्वीकृति की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

सीआइआइ ने कहा कि पाकिस्तानी कानून के अनुसार पहली पत्नी की मौजूदगी में दूसरी शादी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद खान शेरानी ने सोमवार को इस मुद्दे पर एक बैठक के बाद कहा कि शरिया में पुरुषों को एक से ज्यादा पत्नियां रखने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में सरकार को मौजूदा कानून में संशोधन करना चाहिए।

शोरानी ने कहा कि दूसरी शादी करने के लिए पुरुषों को पहली पत्नी से किसी तरह की स्वीकृति की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक दूसरी शादी करने के लिए पुरुषों को पहली पत्नी की अनुमति नहीं लेनी पड़ती हैं जबकि मुस्लिम परिवार कानून 1961 के तहत पत्नी की स्वीकृति अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह कानून इस्लामी शरिया कानून के ठीक विपरीत है। शोरानी ने कहा कि उनकी काउंसिल सरकार से मांग करती है कि वो निकाह, तलाक और व्यस्कता से संबंधित कानूनों को शरिया के अनुरूप तैयार करें।

दूसरी ओर सीआइआइ के इस सुझाव को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है। पाकिस्तानी डॉक्यूमेंटी निर्माता शारमीन ने व्यंग करते हुए कहा कि काउंसिल ने एक बार फिर हम लोगों को गर्व से भरा महसूस कराया है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता निलोफर अफरीदी काजी ने ट्विटर के माध्यम से प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा, सीआइआइ महिलाओं को असमर्थ बना रहा है। क्यों ना इस परेशानी से बचने के लिए खुद पर ही बम गिरा लिया जाए।

स्रोतः http://www.jagran.com/news/world-wife-consent-for-mans-second-marriage-not-needed-pak-body-11153604.html?src=gg_home

URL: http://newageislam.com/hindi-section/jagran-news/controversy-over-facilitating-the-second-marriage-proposal-in-pakistan-पाक-में-दूसरी-शादी-को-आसान-बनाने-वाले-सुझाव-पर-विवाद/d/56113

 




TOTAL COMMENTS:-   3


  • मुसलमान पुरुषों को शादी के अलावा और कोई काम नहीं है. वहीँ अगर मुसलमान महिलाओं की शादी की बात आ जाये तो मुल्ला-मौलवी फतवे पे उतर जाते हैं. मैं इस्लाम के ठेकेदारों से पूछना चाहती हूँ की हिंदू धर्म के लोग अपनी एक पत्नी के साथ कैसे पूरी जिंदगी गुजारते हैं. पहली पत्नी के होते हुये इस्लामिक कानून को दूसरी शादी की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं देना चहिए. हिंदू धर्म में एक पत्नी, कम बच्चे और तलाक जैसे शब्द को अच्छे से समझते हैं तो मुसलमान क्यू नहीं समझते? 
    By Bushra - 9/4/2015 7:43:40 AM



  • मुस्लिम पुरुषों को शादी के अलवा शायद और कोई काम नहीं है वहीँ आगर मुसलमान महिलाओं की दुबारा शादी की बात आ जाये तो मुल्ला मौलवी फतवा पे उतर जाते हैं. मै इस्लाम के ठेकेदारों से पूछना चाहती की हिंदू धर्म के लोग एक पत्नी के साथ पूरी जिंदगी कैसे रहते हैं. पहली पत्नी के रहते हुये इस्लामिक कानून को दूसरी शादी की अनुमति किसी भी सूरत में नहीं देना चहिए. आगे बढ़ने की सोचो नही तो शादी तक ही सिमट कर रह जावोगे. हिंदू धर्म में एक शादी,कम बच्चे और तलाक से हटकर जिंदगी जीते हैं. 
    By Bushra - 9/4/2015 7:23:51 AM



  • इस्लाम ने यह क़ानून सिर्फ़ मर्दों को दिली सुकून देने के लिये बना दिया है वर्ना इस पर अमल करना संभव नहीं। इस सिलसिले में यह बात भी क़ाबिल तारीफ है कि इस्लाम ने कई शादियों में इंसाफ़ को शर्त क़रार दिया है। 
    By varsha sharma - 3/15/2014 4:57:03 AM



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