न्यु एज इस्लाम एडिट डेस्क
2 मई, 2013
मिस्र में क्रांति के बाद धार्मिक सहिष्णुता का इस्लामी संदेश को सबसे ज़्यादा निशाना बनाया गया। हालांकि ऐसा माना जाता रहा है कि मुस्लिम ब्रदरहुड जो इस्लामी शिक्षाओं और सिद्धांतों की पैरवी करने का दावा करता है, वो उदारवादी मूल्यों और धार्मिक सहिष्णुता के इस दौर की मिस्र में शुरुआत करेंगे, क्योंकि इस्लाम धर्म मानवाधिकारों की गारंटी देता और कुरान संभवतः सबसे अच्छे अंदाज़ में अंतर्रधार्मिक संवाद का समर्थन करता है। लेकिन दुर्भाग्य से व्यवहार में इसके विपरीत हुआ। धार्मिक असहिष्णुता, साम्प्रदायिक नफरत, अल्पसंख्यकों का दमन और महिलाओं का अपमान मुस्लिम ब्रदरहुड के नेतृत्व वाली सरकार की पहचान बन गई है।
बहुत से उदारवादी बुद्धिजीवी, धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की हस्तियों का मुस्लिम ब्रदरहुड और मुर्सी सरकार के द्वारा राजनीतिक और धार्मिक व्यवहार में किसी भी प्रकार की असहिष्णुता और हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के इल्ज़ाम में प्रताड़ित किया गया।
इससे पहले देश भर में विरोध के दौरान तहरीर स्कवायर पर आन्दोलनकारियों की नमाज़ की इमामत करने के लिए मशहूर ओमर मकरम मस्जिद के इमाम शेख़ मज़हर शाहीन के द्वारा राज्य की संस्थाओं पर एकाधिकार करने पर मुर्सी सरकार की आलोचना करने के कारण उन्हें निलंबित किया गया था। लेकिन मिस्र की प्रशासनिक अदालत ने बाद में निलंबन के इस आदेश पर रोक लगा दी थी। मुस्लिम ब्रदरहुड के असहिष्णु रवैय्ये का एक और शिकार प्रसिद्ध मिस्री टीवी के एंकर और हास्य कलाकार बसेम यूसुफ हैं, जो अपने हास्य कार्यक्रम के हर ऐपिसोड में राष्ट्रपति मुर्सी की आलोचना करते हैं। कार्यक्रम मिस्री दर्शकों में बहुत लोकप्रिय हुआ क्योंकि इसने हाल ही में हिंसक क्रांति के बाद मानसिक रूप से परेशान देश की जनता को आवश्यक राहत पहुँचायी थी। लेकिन मुर्सी सरकार और मुस्लिम ब्रदरहुड के द्वारा उन्हें अदालत में खींचा गया और और उन्हें इस्लाम के अपमान का आरोपी बनाया गया, जो कि हर राजनीतिक और धार्मिक विरोधियों को खामोश करने के लिए कट्टरपंथियों का आखरी हथियार है। आखिरकार बसेम यूसुफ को कुछ समय के लिए अपने शो को बंद करने का फैसला लेना पड़ा। हालांकि ऐसी अफवाहें हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड के दबाव ने कार्यक्रम को बंद करने पर मजबूर कर दिया।
मिस्र में धार्मिक असहिष्णुता की सबसे ताज़ा शिकार मोना प्रिंस है, जो एक प्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार और स्वेज़ कैनाल युनिवर्सिटी में शिक्षा विभाग में प्रोफेसर हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े छात्रों ने उन पर धर्म के अपमान का आरोप लगाया गया है। उन्होंने सिर्फ इतना किया था कि छात्रों के साथ मिस्र में जारी सांप्रदायिक संघर्ष के संदर्भ में सांप्रदायिकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने सल्फ़ियों के द्वारा बढ़ावा दी जा रही सांप्रदायिकता की आलोचना की थी। इस विषय पर मोना प्रिंस और छात्र सहमत थे, और इस विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने सल्फ़ी छात्रों द्वारा युनिवर्सिटी की दीवारों पर लगाए गए पोस्टर को दिखाया था जिसमें लिखा था कि शिया दुश्मन हैं और उन्होंने ये कहा कि हम इसे ही सांप्रदायिकता कहते हैं। लेकिन क्लास के बाद कुछ छात्रों ने फ़ैकल्टी के डीन से मोना प्रिंस की शिकायत की और उन पर इस्लाम का अपमान करने का इल्ज़ाम लगाया। उनके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया और उन्हें युनिवर्सिटी में आने से मना कर दिया गया क्योंकि उनकी जान को खतरा पैदा हो गया था। मोना ने बताया था कि उन्हें सल्फ़ियों की तरफ से मारने की धमकी मिल रही है। हालांकि बाद में युनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उन्हें फिर से अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने की इजाज़त दे दी।
मोना का कहना है कि उन्होंने इस्लाम के खिलाफ कुछ नहीं कहा और सिर्फ मुसलमानों के एक समूह की धार्मिक असहिष्णुता की आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने इस्लाम के दूसरे समुदायों के खिलाफ सांप्रदायिकता और नफरत को बढ़ावा दिया था और जो इस्लामी शिक्षाओं और सिद्धांतों के खिलाफ है। लेकिन इसके बावजूद उनको धमकी दी गई और परेशान किया गया।
मानवाधिकार समूहों ने प्रोफेसर को परेशान किए जाने की निंदा की और इसे बौद्धिक आतंकवाद करार दिया और प्रशासन से मांग की कि वो ऐसा माहौल पैदा करें जिसमें बुद्धिजीवी, विद्वान और प्रोफेसर स्वतंत्र रूप से अपने विचारों को रख सकें।
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